चूत एक पहेली -84

(Chut Ek Paheli- Part 84)

पिंकी सेन 2016-05-04 Comments

This story is part of a series:

अब तक आपने पढ़ा..

कोमल की चूत ने रस का फव्वारा छोड़ दिया और उसके साथ ही सन्नी भी अपना कंट्रोल खो चुका था। उसका लौड़ा भी वीर्य की धारा उसकी चूत में भरने लगा।
करीब 5 मिनट तक तीनों ऐसे ही पड़े रहे सन्नी का लौड़ा मुरझा कर चूत से बाहर आ गया था.. मगर अर्जुन तो अभी भी गाण्ड का भुर्ता बनाने में लगा हुआ था।

सन्नी- अरे बस कर.. अब रहम कर इस पर और मुझ पर.. हमारा हो गया है यार.. अब तो निकल दे अपना मूसल..
सन्नी की बात सुनकर अर्जुन ने दोनों हाथों से कोमल को उठाया और सन्नी के ऊपर से हटा दिया और बिस्तर पर घोड़ी बना कर स्पीड से चोदने लगा। जल्दी ही उसका लौड़ा भी झड़ गया.. तब जाकर कोमल को चैन आया।

अब आगे..
कुछ देर वो सब ऐसे ही पड़े रहे उसके बाद अपने-अपने कपड़े पहन कर जाने के लिए र हो गए।
टोनी जब वापस आया.. तब तक तीनों बाहर आ चुके थे, हाँ कोमल की चाल थोड़ी बदल गई थी।

टोनी- अरे बाप रे.. क्या कर दिया बॉस ये बेचारी तो सच में लंगड़ा रही है।
कोमल- चुप कर कुत्ते.. मेरा मजाक ना बना.. इतना बड़ा अगर तेरी गाण्ड में जाए ना.. तो तू हिल भी ना पाए।
अर्जुन और सन्नी ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगे और टोनी का पोपट हो गया।

थोड़ी देर बाद सन्नी ने टोनी को बताया- हम दोनों पहले जाएँगे.. बाद में तू और कोमल आ जाना.. ओके!
और वो दोनों वहाँ से निकल गए।

उनके जाने के बाद टोनी ने कोमल को ऊपर से नीचे तक देखा।
कोमल- क्या देखता है रे साले..?
टोनी- देख रहा हूँ कि दोनों ने तेरी चुदाई बहुत जबरदस्त की है.. तेरी आँखें बता रही हैं.. तू रोई भी है।
कोमल- बड़ा कमीना है रे तू.. तू तो सब जान गया कुत्ते!

टोनी- मेरी जान अब गाली मत दे तू.. मेरी बहन का रोल कर रही है.. चल बता ना.. ऐसा क्या कर दिया उन दोनों ने कि तेरी आँखों में आँसू आ गए।
कोमल- अब क्या बताऊँ तुझे.. वो अर्जुन है ना.. साला आदमी नहीं कोई घोड़ा है.. उसका ‘इतना’ लंबा और इतना मोटा है।
कोमल ने हाथ के इशारे से टोनी को लौड़े के बारे में बताया।

टोनी तो बस कोमल को देखता ही रह गया.. क्योंकि बताते वक़्त उसके चेहरे पर एक अजीब सा डर था।
टोनी- ओह्ह.. तभी तू रोई होगी.. साला बॉस ठीक बोला था.. इसको लास्ट चान्स देंगे.. नहीं तो ये पायल की चूत का भोसड़ा बना देगा और हमें कुछ मज़ा नहीं आएगा।
कोमल- हाँ उसका लौड़ा है ही ऐसा तगड़ा.. कि किसी को भी रुला दे.. अब बातें ही करेगा या यहाँ से चलेगा भी?

टोनी- तुझे बड़ी जल्दी पड़ी है वहाँ जाने की.. क्या बात है?
कोमल- अबे जल्दी होगी ही ना.. कब तुम लोगों का ये नाटक ख़त्म होगा और कब मुझे मेरे पूरे पैसे मिलेंगे।
टोनी- तू भी ना साली पैसे के लिए मरी जा रही है.. चल अब निकलते हैं।

ये दोनों भी फार्म के लिए निकल गए। अब ज़रा हम रॉनी की तरफ़ चलकर देखते हैं कि वो क्या कर रहा है।

पुनीत और पायल एक गाड़ी में निकले और अर्जुन उनके पीछे दूसरी गाड़ी में निकला.. क्योंकि उसको तो वहाँ पर मुनिया को लेकर जाना था ना।

पायल के दिल में अब भी थोड़ा डर था कि अगर पुनीत हार गया तो क्या होगा? बस वो रास्ते में यही सब सोचती जा रही थी। उधर सन्नी और अर्जुन कुछ खाने-पीने का सामान लेकर मंज़िल की ओर चल पड़े थे।

दोस्तों अब रास्ते का हाल आपको क्या बताऊँ.. तो चलो सीधे फार्म का सीन ही बता देती हूँ।

सबसे पहले पुनीत और पायल वहाँ पहुँचे थे। वहाँ जाकर पुनीत ने नौकरों को कुछ हिदायत दी और उसके बाद कमरे में पायल को आराम के लिए भेज कर खुद बाहर सब का वेट करने लगा।
उनके कुछ देर बाद सुनील और विवेक भी वहाँ आ गए तो पुनीत उनसे बातें करने लगा।

उधर रॉनी सीधा मुनिया के घर पहुँच गया.. जिसे देख कर मुनिया बहुत खुश हुई।
मुनिया- अरे बाबूजी आपने आने में बड़े दिन लगा दिए?
अर्जुन- वो शहर में थोड़ा काम था ना.. इसलिए.. चल अब जल्दी से तैयार हो जा हमें अभी निकलना है।
मुनिया- आप अन्दर तो आओ.. माँ से मिल लो.. तब तक मैं कपड़े ले लेती हूँ।

रॉनी उसकी माँ से बातें करने लगा और कुछ पैसे भी दे दिए।
कोई 15 मिनट बाद वो मुनिया को लेकर वहाँ से निकल गया।

दोस्तो, मुनिया याद है या भूल गए.. चलो अगर भूल गए तो कोई बात नहीं.. अभी सब याद आ जाएगा।

मुनिया ने एक पुरानी सी मैक्सी पहनी हुई थी.. जो उसके बदन पर बहुत टाइट थी.. अन्दर उसने ब्रा भी नहीं पहनी थी जिससे उसके 30″ के चूचे साफ दिखाई दे रहे थे.. उसके निप्पल एकदम तने हुए थे।

रॉनी- अरे क्या बात है रे मुनिया.. तूने ये किसके कपड़े पहने हैं.. बहुत छोटे हैं ये तो.. और तेरे ये निप्पल ऐसे खड़े क्यों हो रहे हैं?
मुनिया का चेहरा शर्म से लाल हो गया, उसने शर्म के मारे अपना चेहरा हाथों से छुपा लिया।

रॉनी ने एक हाथ से उसके मम्मों को हल्के से दबाया.. तो मुनिया के मुँह से ‘आह्ह..’ निकल गई।
रॉनी- अरे क्या हुआ हूँ मुनिया.. तू तो ऐसे शर्मा रही है.. जैसे पहली बार मैंने इनको छुआ है।
मुनिया- सस्स आह्ह.. बाबूजी.. आपका हाथ लगते ही बदन में बिजली सी रेंगने लगी।
रॉनी- अच्छा ये बात है.. लगता है इतने दिन में तू मेरा स्पर्श भूल गई है.. अब दोबारा तुझे नंगी करके पूरे जिस्म पर अपनी छाप देनी होगी।

मुनिया- आह्ह.. बाबूजी भगवान के लिए ऐसी बातें ना करो.. आपको देखते ही मेरे जिस्म में हलचल पैदा हो गई.. ये चूचुक जो तने हुए से हैं ये आपको देखने से तने हैं.. अब आप ऐसी बातें कर रहे हो.. तो नीचे भी कुछ-कुछ हो रहा है।
रॉनी- ओह्ह.. अच्छा ये बात है.. लगता है इतने दिन बिना चुदे रही हो.. तो तेरी चूत अब लण्ड के लिए प्यासी हो गई है.. अब तो मुझे ही कुछ करना होगा.. तेरी प्यासी चूत की प्यास अब मेरा लौड़ा ही बुझाएगा।

रॉनी की बात सुनकर मुनिया की चूत से पानी रिसने लगा.. वो काफ़ी ज़्यादा उत्तेजित हो गई और रॉनी के लण्ड को पैन्ट के ऊपर से मसलने लगी।

रॉनी तो पहले ही मुनिया के खड़े निप्पल देख कर गर्म हो गया था.. अब मुनिया की ये हरकत उसको पागल बना गई।
रॉनी- आह्ह.. मुनिया.. तेरे हाथों में क्या जादू है.. देख लौड़ा कैसे बेकाबू हो गया है।
मुनिया- बाबूजी आप गाड़ी आराम से चलाओ.. तब तक आपके लौड़े को मैं काबू में लाती हूँ।

इतना कहकर मुनिया ने रॉनी की पैन्ट का हुक खोल दिया और तने हुए लौड़े को बाहर निकाल लिया।

लौड़ा एकदम टाइट हो रहा था.. मुनिया ने देर ना करते हुए अपने होंठ लण्ड पर रख दिए और बड़े प्यार से पूरा लौड़ा मुँह में लेकर चूसने लगी।
रॉनी- आह ससस्स.. मुनिया आह्ह.. मज़ा आ गया.. चूस.. आह्ह.. तेरे होंठ भी क्या कमाल के हैं.. आह्ह.. चूस मेरी जान।

रॉनी का लौड़ा एकदम फड़फड़ा रहा था.. अब उसकी साँसें तेज हो गई थीं। रॉनी ने मुनिया को अपने से अलग किया और गाड़ी को एक साइड में खड़ा करके वो मुनिया के मम्मों को कपड़ों के ऊपर से चूसने लगा।

मुनिया- आह्ह.. बाबूजी.. अब बर्दास्त नहीं हो रहा आह्ह.. मेरी चूत किसी भट्टी की तरह जल रही है.. आह्ह.. अपने लौड़े की बरसात कर दो.. आह्ह.. मेरी चूत में.. इससस्स.. आह्ह.. आहह..
रॉनी- मुनिया मेरा हाल भी ऐसा ही है.. अब तो तेरी चूत चोद कर ही सुकून आएगा.. चल पीछे की सीट पर चल.. आज तुझे गाड़ी में ही चोदूँगा।

मुनिया तो चुदने को बेकरार थी.. जल्दी से वो पीछे चली गई और रॉनी भी सीट को एड्जस्ट करके पीछे चला गया और मुनिया पर टूट पड़ा।
रॉनी ने मुनिया को जल्दी से नंगा किया और उसके निप्पल चूसने लग गया।

मुनिया- आह्ह.. बाबूजी.. अब बर्दाश्त नहीं हो रहा.. ओह्ह आह्ह.. घुसा दो अपना डंडा.. मेरी चूत में.. आह्ह.. कर दो मुझे शान्त..
रॉनी- चल मेरी जान अब तू घोड़ी बन जा.. अब मेरा लौड़ा भी बेताब है तेरी चूत में जाने के लिए।
मुनिया घोड़ी बन गई और रॉनी ने एक ही झटके में पूरा लौड़ा चूत में घुसा दिया।

यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !
मुनिया काफ़ी दिनों की प्यासी थी, उसकी चूत में लौड़ा जाते ही वो ‘आह्ह..’ भरने लगी और गाण्ड को पीछे करके चुदवाने लगी।

रॉनी- आह्ह.. मेरी जान तू तो बड़ी चुदक्कड़ बन गई रे.. आह्ह.. ले साली.. एक बात तो बता.. गाँव में तो किसी से नहीं चुदी ना… इतने दिन.. आह्ह..
मुनिया- आह्ह.. फाड़ दो.. चोदो आह्ह.. नहीं बाबूजी.. आह्ह.. ये आप कैसी बात करते हो.. आह्ह.. आपके अलावा में किसी के बारे में सोच भी नहीं सकती आह्ह..
रॉनी- आह ले आह्ह.. अच्छा किया.. नहीं तो साली मज़ा खराब हो जाता मेरा.. आह्ह.. ले आह्ह..

रॉनी स्पीड से मुनिया की चूत को चोद रहा था.. वो भी उसका पूरा साथ दे रही थी। लगभग 20 मिनट तक ये तूफान जोरों पर था.. उसके बाद मुनिया की चूत नामक बाँध में दरार पैदा हो गई.. वो बाँध कभी भी फट सकता था।
मुनिया- आह्ह.. तेज तेज करो.. आह्ह.. मेरी चूत आह्ह.. गई.. आआ एयेए..
मुनिया का झरना फूट पड़ा और उसके साथ ही रॉनी का लौड़ा भी झड़ गया.. दोनों के पानी का संगम हो गया।

अन्तर्वासना के प्यारे पाठको, मुझे बताओ कि आपको मेरी कहानी कैसी लग रही है? तो जल्दी से मुझे अपनी प्यारी-प्यारी ईमेल लिखो!
कहानी जारी है।
[email protected]

What did you think of this story??

Comments

Scroll To Top