भाभी सच बताना

प्रेषिका : रानी सहिबा

कमलिनी का महीना हुए चार दिन हो चुके थे और मैं उसको चोदने की योजना बना रहा था। शाम के समय मैं अपने कमरे में चाय पी रहा था तो मैंने देखा कि कमलिनी अपने छज्जे पर खड़ी होकर सड़क का नज़ारा देख रही है, मुझसे नज़र मिली तो हल्के से मुस्कुरा दी। मुझसे चुदवाने के बाद आज पहली बार सामना हुआ था। मैंने अपनी जेब से मोबाइल निकला और कमलिनी का नम्बर डायल कर दिया, घंटी बजने पर उसने अपना मोबाइल देखा, फ़िर मुझे देखा तो मुस्कुरा कर फ़ोन काट दिया और मेरे पास आकर खड़ी हो गई।

मैंने हाल चाल पूछा तो बोली- ठीक है !

मैंने पूछा- आज रात को आओगी?

तो शरमाकर बोली- नहीं ! मैंने कहा- मैं तुम्हारा इंतज़ार करूंगा।

रात को लगभग १२ बजे मेरे मोबाइल पर मिस्ड कॉल आई, देखा तो कमलिनी की थी। मैंने कॉल-बैक किया तो बोली- क्या कर रहे हैं?

मैंने कहा- तुम्हारा इंतज़ार !

तो बोली- अभी आ रही हूँ।

५ मिनट बाद कमलिनी मेरे कमरे में आई और आते ही मुझसे लिपट गई। मैंने उसके बदन पर हाथ फेरा तो पाया कि उसने सिर्फ़ गाउन पहना हुआ था। गाउन के अन्दर ब्रा और पैंटी नहीं पहनी थी। मैं समझ गया बंदी चुदवाने की पूरी तैयारी कर के आई है।

दीवान के पास आकर उसका एक पैर मैंने दीवान पर रख दिया और उसका गाउन कमर तक उठा दिया। अपना लोअर मैंने उतार दिया और लंड उसकी चूत पर रखना चाहा तो मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा, आज उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था, अपनी झांटे साफ़ करके उसने चूत की सुन्दरता को चार चाँद लगा दिए थे। मैंने चोदने का इरादा फिलहाल छोड़ा और उसकी चूत चाटने लगा।

उसने भी पोजीशन बदली और मेरा लंड अपने मुंह में लेकर चूसने लगी। १० मिनट तक मुख-मैथुन का मज़ा लेने के बाद मैंने अपने लंड पर कंडोम चढाया और उसकी चूत में डाल दिया। जमकर चोदने के बाद जब मैं उसकी चूत में स्खलित हुआ तो मैं ख़ुद को जन्नत में महसूस कर कर रहा था। अब हमारी चुदाई की गाड़ी पटरी पर हौले हौले चल रही थी, दूसरे तीसरे दिन वह मुझसे चुदवा लेती थी, इतना मेरे लिए भी काफ़ी था और उसके लिए भी।

अब हमारी कहानी में एक तीसरा पात्र आ गया।

मेरी पत्नी की एक ममेरी बहन श्वेता इसी शहर में रहती थी। एक दिन लगभग ११ बजे मैं ऑफिस में था कि मेरी पत्नी का फ़ोन आया कि वह श्वेता के घर जाना चाहती है !

मैंने कहा- चली जाओ !

तो बोली- मैंने खाना बना दिया है और चाभी रागिनी भाभी को दे दी है, शाम को ४-५ बजे तक आ जाऊंगी।

मैंने कहा- ठीक है।

दोपहर को १ बजे मैं लंच करने घर आया, घंटी बजाई तो रागिनी भाभी बोली- चाभी लेकर आ रही हूँ। उन्होंने मुझे चाभी दी, मैंने ताला खोला और वो भी अन्दर आ गईं, उनके घर में भी कोई नहीं था, डॉक्टर साहब क्लीनिक और लड़कियाँ कॉलेज गई थीं।

अन्दर आकर बोली- रेखा दाल सब्जी बनाकर गई है और मुझसे कह रही थी कि रोटी मैं सेंक दूँ।

रागिनी का गदराया हुआ बदन और एकांत मेरे लंड को खड़ा कर चुके थे और मैंने उनको चोदने की ठान ली थी। मैंने कहा- भाभी आप कुछ देर बैठिये, मैं नहा लूँ फ़िर खाना खाऊँगा।

Comments

Scroll To Top