मुंहबोला भाई-बहनचोद

कुमार रवि
मेरा कोई सगा भाई नहीं है इसलिए जब भी राखी या भाई दूज का त्यौहार आता है, मैं पड़ोस के एक लड़के को राखी बांधती हूँ, उस लड़के का नाम रवि है, वह मेरा दूर के रिश्ते की बुआ का लड़का है, उसकी आयु 24 और मेरी 18 साल है।
रवि के पिता गुजर गए थे और वसीयत में एक मकान छोड़ गए थे उसी में रवि की माँ रहती थी।

घर से 7 किलोमीटर दूर सिटी में रवि की कम्प्यूटर की मरम्मत की दुकान है। साथ ही रवि वहीं पर वीडियो लाइब्रेरी भी चलाता था।
अपने साथ उसने एक लड़के को भी काम पर रखा था जिसका नाम सुनील था। सुनील 27 साल का युवक था, उसका काम ग्राहकों को उनकी पसंद की सीडियाँ देना था।

रवि की दुकान घर से बहुत दूर है इसलिए उसने अपनी दुकान के ऊपर एक कमरा किराये पर ले लिया था। कमरे में लैट-बाथ साथ ही थे।

रवि दिन भर दुकान पर रहता था, सुनील उसके लिए घर से खाना ले आता था।

जब भी रवि को समय मिलता था, वह एक दो दिन में मेरे घर जरुर आता था, कई बार मम्मी उससे बाजार से जरूरी सामान मंगवा लेती थी। रात को रवि घर में खाना खाता था।

छोटी होने के कारण रवि मुझे बहुत चाहता था और जब भी आता था मेरे लिए कोई न कोई चीज जरूर लाता !
मम्मी भी उसे पसंद करती थीं और उससे हर एक बात में सलाह लेती थीं।

यह घटना राखी के दिन की है, मैं रवि को राखी बांधती थी और हर साल की तरह उसी के आने का इन्तजार हो रहा था।

रवि ने मुझे राखी पर एक मोबाइल गिफ्ट देने का वादा किया था। उस दिन रह रह कर बरसात हो रही थी और रास्तों में पानी भर गया था, शाम के पांच बजे के करीब रवि आया और देर के लिए माफ़ी मांगी।

फिर मैंने जब उसे राखी बांधी तो उसे मोबाइल देने का वादा याद दिलाया।

खाने के बाद रवि ने कहा- मेरे साथ मार्केट चल, तुझे जैसा मोबाईल चाहिए, वैसा दिलवा दूँगा।

उस समय शाम के सात बज चुके थे, तभी जोर की बरसात होने लगी, मेरी मम्मी ने रवि से कहा- तुम अगले दिन मोबाइल खरीद देना !

लेकिन मैं उसी दिन की जिद करने लगी।

रवि ने कहा- अगर पानी के कारण देर हो गई तो?

मगर मैंने कहा- चाहे कितनी भी देर हो जाये, मुझे तो मोबाईल चाहिए !

मेरी मम्मी भी बोली- बेटा, यह बड़ी जिद्दी है, अगर तू आज मोबाईल नहीं देगा तो यह मेरी जान खाती रहेगी। मुझे तुम पर पूरा विश्वास है, भले कुछ देर अधिक भी हो जाये।

रवि बोला- आंटी चिंता मत करो, अगर बरसात जोर से आने लगेगी तो हम अपनी दुकान के ऊपरी कमरे में रुक जायेंगे क्योंकि वह सिटी में है, वहीं नए नए तरह के मोबाइल मिलते हैं।

यह सुनते ही मैं रवि की बाइक पर बैठ गई और जाते जाते रवि ने मम्मी से कहा- आंटी, आप चिंता नहीं करो, मैं आपको फोन कर दूँगा।

उस समय थोड़ी बून्दाबून्दी हो रही थी, हमने काफी घूमने के बाद एक मोबाईल पसंद कर लिया लेकिन जैसे ही हम दुकान से बाहर निकले तो मूसलाधार बरसात होने लगी, साथ में ठंडी हवाएँ भी चलने लगी।

रवि ने मेरी मम्मी को बता दिया कि हम बाजार में हैं, हमें देर हो सकती है।

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