वेब से बेड तक- 2

प्रेषक : लव गुरू

वह मेरे दूसरे चुचूक को अपने हाथ के नाखून से जोर जोर से कुरेद रही थी। एक तो चुचूक चूसे जाने की मस्ती दूसरा चुचूक कुरेदे जाने की वजह से होता दर्द ! इससे मैं तो स्वर्ग में पहुँच गया था। इस बेइंताह मस्ती के कारण मेरे मुँह से आह ओह की आवाज निकल रही थी। मैंने अपने हाथ उसकी पीठ और एक बाँह पर रख रखा था। एक हाथ से उसकी बाँह मसल रहा था और दूसरा हाथ उसकी पीठ और कमर पर फेर रहा था।

वो करीब 3-4 मिनट तक ऐसे ही करती रही। फिर रीमा बायाँ चुचूक छोड़ कर दायाँ चुचूक चूसने लगी और बाएँ चुचूक को नाखून से कुरेदने लगी।

दूसरे चुचूक को अच्छी तरह से चूसने के बाद ही उसने मेरे को छोड़ा। फिर मेरी ओर देख कर आँखो में आँखे डाल कर पूछा- कैसा लगा बेटा माँ का तुम्हारा चुचूक चूसना?

मैं बोला- क्या बताँऊ माँ ! बस इतना कह सकता हूँ कि तुम्हारे इस बेटे को तुमसे बहुत कुछ सीखना है। सीखाओगी ना माँ अपने इस अनाड़ी बेटे को?

रीमा बोली- जरूर बेटा, आखिर माँ होती किस लिये है। माँ का तो यह कर्तव्य है कि उसके बेटे की शादी से पहले उसे सेक्स की पूरी शिक्षा दे, प्रेक्टिकल के साथ जिससे कि उसकी पत्नी सुहागरात को यह ना कह सके कि उसकी माँ ने उसको कुछ भी नहीं सिखाया।

उसके मुँह से यह बात सुन कर मैं बोला- माँ, तुम्हारे विचार कितने उत्तम हैं। अगर तुम जैसी सबकी माँ हो तो किसी भी बेटे को रंडी के पास जाने की जरूरत ही नहीं।

सुन कर उसने मेरे होंठों को चूम लिया और बोली- तुम बिल्कुल मेरे बेटे कहलाने के लायक हो। चलो मैं अब तुम्हारा लंड पैन्ट से बाहर निकाल देती हूँ। यह भी मुझको गाली दे रहा होगा कि बात तो लंड को बाहर निकालने की कर रही थी और चुचूक को मजा देने लगी। कह रहा होगा कितनी निर्दयी है तुम्हारी माँ।

नहीं माँ, मेरा लंड तो बहुत खुश है कि मेरी माँ तुम हो। वह तो कह रहा है कि जिस तरह से तुम मेरी माँ हो, तुम्हारी चूत उसकी माँ हुई और जब तुम इतनी मस्त हो तो उसकी माँ और भी मस्त होगी । वो भी अपनी माँ से मिलने और उसकी बाँहों में जाने के लिये बेचैन है।

रीमा बोली- उसके लिये तो उसको थोडा इंतजार करना पड़ेगा। पहले मैं अपने बेटे को और उसके लंड को तो जी भर के प्यार कर लूँ और अपने बेटे से अपने आप को और लंड की माँ को प्यार करा लूँ, तब कहीं जाकर वो अपनी माँ से मिल सकता है ! समझे?

मैंने कहा- हाँ माँ, तुम ठीक कह रही हो।

इतना कह कर रीमा ने मेरी पैन्ट खोलनी शुरु कर दी। जब रीम मेरी पैन्ट खोल रही थी तो उसकी नजर मेरी तरफ थी। वह मेरी तरफ देख कर मन्द मन्द मुस्कुरा रही थी। सबसे पहले उसने मेरी बेल्ट को निकाल कर फेंक दिया, फ़िर मेरी पैन्ट का बटन खोलने लगी। बटन ओर चैन खोल कर उसने कमर से पकड़ कर एक ही झटके में मेरी पैन्ट नीचे कर दी और साथ में खुद भी नीचे बैठ गई। मैंने भी अपने पैर उठा कर पैन्ट निकालने में उसकी मदद की।

उसने पैन्ट निकाल कर उसको भी एक कोने में फेंक दिया। मैंने अन्डरवीयर पहन रखा था। रीमा का मुँह बिल्कुल मेरे लंड के सामने था। मेरा लंड पूरी तरह से खड़ा था जो कि मेरे अन्डरवीयर के उभार से पता चल रहा था। उसने मेरी तरफ़ देखा और अपनी जीभ बाहर निकाल कर अपने होठों पर फिराने लगी जैसे कोई बहुत ही स्वादिष्ठ चीज देख ली हो।

Comments

Scroll To Top