मुझे रण्डी बनना है-9

(Mujhe Randi Banna Hai-9)

This story is part of a series:

हरेश जोगनी

मौसी ने मुझे खींचते हुए अपनी बाहों में लिया और बोली- भड़वे, तेरी तारीफ मैंने सभी रण्डियों से सुनी तो सोचा मैं भी तेरा लौड़ा ले ही लूँ। आज रात मैं सोने वाली नहीं और तुझे भी नहीं सोना।

मैं- हाँ मेरी रण्डियों की रानी। तू क्यूँ बाकी रहेगी? तेरी तो खास खातिरदारी करूँगा। सारे दाँव आजमाऊँगा।

उसने मुझे नंगा किया और खुद कपड़े पहनकर मेरा लौड़ा चूसने लगी।

5 मिनट बाद मौसी- क्या रे? तू मुझे नंगी नहीं करेगा? कर ना रे !

मैंने उसके सारे कपड़े उतारे, उसका भोसड़ा भूखा-प्यासा था। उसने झट से मेरे मुँह पर अपना भोसड़ा धर दिया। मैंने उसे चाट-चाट कर तड़पा दिया।

मौसी ने लौड़ा मसल मसल कर दुबारा खड़ा किया और दोबारा चोदा उसको।

मौसी- भड़वे, क्या लम्बा लौड़ा है रे? आज की रात तुम्हारी आखरी रात है। मैं चाहती हूँ कि तुम दोनों और थोड़ा, मतलब दो-एक दिन रुको न? मैं भी जी भर के चुदवा सकूँ और और सीमा को भी मस्त कमाई हो?

मैं- मौसी, आज की रात तुम्हारी। पर हम नहीं रुक सकते ! घर पर राह देखते होंगे।

मौसी- राजू ! रा..जू… आ भड़वे.. क्या तड़पा रहा है?

मैंने उसे खड़ा किया और पीछे से एक टांग उठाकर एक हाथ का सहारा देकर लौड़ा घुसेड़ दिया। थोड़ी देर बाद मैंने उसे पाँच अलग अलग तरीकों से चोदा और आखिर में सीधे लिटा कर पूरा लौड़ा घुसेड़ दिया और चोद डाला।

मौसी- मज़ा आया इस हफ्ते ! तुम दोनों मिया बीबी के साथ किए मज़े मैं भूल नहीं सकती।

सुबह होते ही मैं और मौसी बाहर !

आते ही सारी रण्डियों ने ताली बजाकर हमारा स्वागत किया।

जाहिदा- तुमने तो तिजोरी पे ही हाथ मार दिया। बड़े उस्ताद चोदू हो? राजू और एक बार मुझे चोद ना ! भड़वे, क्या मस्त चोदता है तू !

जूली- जीजू, आज मेरी वो सहेली डोना आने वाली है, उसके लिए तगड़ा ग्राहक ढूंढ कर लाना।

मैं- अच्छा फिकर मत करना ! मिल जाएगा कोई ना कोई। पर वो तैयार होगी क्या?

सुनीता- उसकी चिन्ता छोड़ो ! यहाँ के नजारे देखते ही मचल उठेगी। पहले तो मैं भी डरी थी। मगर अब मेरा भोसड़ा हर लौड़े के लिए बेताब रहता है। आखिरी दिन है तो बहुत चुदवाऊँगी। सारी कसर एक ही दिन में पूरी करूंगी। फिर कहाँ ऐसा कर सकूँगी?

इतना कहकर सुनीता ग्राहक का इन्तजार करने लगी। साली पूरी तरह रण्डी ही बन गई थी। भड़काऊ मेकअप, तंग हाफ-पैंट, उस पर बिना बाहों वाली जर्सी जिसमें से उसके गोलों की लकीर दिखाई देती थी। मैं सोच भी नहीं सकता था कि वो मेरी पत्नी है और एक संसारी स्त्री है। वो इतनी मस्ताई थी कि उसने एक एक करके सारी रण्डियों की गाण्ड दबा दी..

करीब 11:30 बजे कोठे सामने एक रिक्शा रुकी। उसमें से जूली और एक खूबसूरत लड़की उतरी। उसकी छाती देखते ही सब समझ गए कि यह डोना ही है जिसके बारे में जूली बात कर रही थी।

मैंने सामान उतारकर अन्दर रख लिया। मैं वहाँ भड़वे का काम करता था तो यह सामान उठाने का काम भी कोई बुरा नहीं लगा। मैंने सामान उठाने के बहाने उसकी गाण्ड को छू ही लिया। साली को पता ही नहीं चला। वो तो बावरी बन गई थी। सोच रही होगी कहाँ फंस गई?

जूली- यह है मेरा ऑफिस, जहाँ मैं काम करती हूँ। और यह मेरी सहेली डोना है जो मेरे जैसे गोवा से ही है.. कल से तुम्हें भी काम करने को मिलेगा। जीजू, इसे अन्दर ले चलो। सारा काम अपने आप सीख लेगी ! बहुत होशियार है यह।

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