कविता संग पहला प्यार भरा संसर्ग

(Kavita Sang Pahla Pyar Bhara Sansarg)

मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ, मैं अन्तर्वासना को करीबन आठ साल से पढ़ रहा हूँ।

अब तक मैंने जितनों के साथ सोया हूँ मुझे उन सबके नाम याद हैं। कुछ के साथ मेरे रिश्ते एक दिन के थे और कुछ के साथ महीनों तक चले। कुछ के साथ सालों के भी रहे और किसी के साथ शायद जन्मों का रिश्ता होगा.. जिन्हें मैं आज भी भोग रहा हूँ।

मैं आज जिसकी कहानी लिखने जा रहा हूँ.. वो मेरे दिल के काफ़ी नज़दीक थी और हमेशा रहेगी।
वैसे मैं दिल का बुरा इंसान नहीं हूँ और कभी किसी लड़की को मैंने फंसाया नहीं है।

बात उन दिनों की है.. जब मैं अपनी ग्रेजुएशन के प्रथम वर्ष में था।

हमारे घर के पास ही एक सुंदर लड़की रहती थी.. जिसका नाम कविता था। वो चलती थी.. तो ऐसे लगता था.. मानो कोई हिरणी चल रही हो।
उसका रंग गोरा.. बदन एकदम कसा हुआ.. और ताज़ी जवान उम्र 18 साल की थी।

उसकी एक अदा सब लड़कों को पसंद थी कि जब भी वो चलती थी.. तो उसका दुपट्टा गले पर होता था.. जिससे उसकी दोनों चूचियाँउभर कर दिखती थीं, उसको देख कर ऐसा लगता था कि काश ये चूचियां मसकने को मिल जातीं..

मैं बाकी लड़कों की तरह लफंगा तो था नहीं.. इसलिए मैं कभी उसको परेशान नहीं करता था।
लेकिन मेरा एक दोस्त था.. वो हमेशा उसके बारे में बात करता रहता था और मैं भी उसको देखने या मिलने का बहाना ढूंढता रहता था।

तभी एक बार पता चला कि हर शाम वो अपने घर के बाहर आती है.. जो कि मेरे एक दोस्त के घर से साफ़ दिखता है।

अब मैं रोज वहाँ जाने लगा.. मैं अपने दोस्त के घर से रोज उसको देखता और कुछ इशारे भी करता।

पहले 2 या 3 दिन तक उसने कुछ नहीं कहा.. लेकिन चौथे दिन उसने भी मुझे इशारा किया.. मैं बहुत खुश था.. लेकिन मन ही मन मैं ये सोच रहा था अब क्या करूँ.. इससे कैसे बात की जाए?

फिर 2 बाद मेरे दोस्त ने बोला कि उसे भी वो बहुत पसन्द है और बोला- मैं इसको कैसे भी पाकर रहूँगा।

तब मुझे लगा कि इससे पहले ये कुछ करे.. मुझे ही कुछ करना होगा।

उसके दूसरे दिन मैंने अपना मोबाइल नंबर एक कागज पर लिखा और उसके घर के पास ही रोड पर खड़ा होकर उसका इंतजार करने लगा।

दो घंटे बाद उससे मुलाकात हुई.. मैंने उसके हाथ में वो कागज का टुकड़ा दे दिया और वहाँ से चला आया और अब मैं उसके फोन का इंतजार करने लगा।

दो दिन बाद मेरे मोबाइल पर एक फोन आया.. उसने ही फोन किया था। वो फोन पर कुछ बोल नहीं रही थी.. बस इतना ही पूछा- तुम मुझे क्यों देखते हो और नंबर क्यों दिया?
मैंने भी वही पूछा और कहा- तुमने फोन क्यों किया?

फिर थोड़ी बहुत बात हुई.. एक-दूसरे के बारे में पूछा और फोन कट कर दिया।

यह सिलसिला करीब 6 महीनों तक चला, इन 6 महीनों में हमने एक-दूसरे से अपने प्यार का इज़हार कर दिया था।

आख़िर वो वक्त भी आ ही गया.. उसका कॉलेज चालू हो गया और मैं उससे मिलने जाने लगा। हम हफ्ते में 2 बार मिलते थे.. शनिवार को मिलना लगभग पक्का ही रहता था।
एक महीना मिलने के बाद मैंने सोचा कि अब इसके साथ सेक्स करने का समय आ गया है.. लेकिन बात ये थी कि उसको कुछ भी पता नहीं था।

अगले हफ्ते जब हम मिले तो मैं उसे अपने एक दोस्त के खाली कमरे पर ले कर गया। रिक्शे में जाते वक़्त मैं यही सोच रहा था कि उसको बिना कपड़ों के देखने का दिन आ ही गया।

मैं उसकी खूबसूरती में सिर्फ़ यही कहना चाहूँगा कि पद्मिनी कोल्हपुरी भी उसके जैसी ही दिखती है.. सिर्फ़ यह बहुत गोरी है।

मुझे डर था कि रिक्शे से उतरते वक़्त कोई परेशानी ना हो.. इसलिए मैंने उससे बोला- उतरते वक़्त कुछ मत बोलना जो भी बोलना है.. अन्दर बोलना..

उसने वैसा ही किया.. हम उतरे और मैंने कमरे का ताला खोला और अन्दर चले गए।
कमरे में अन्दर जाते ही उसने बोला- यहाँ क्यों आए हो..?
मैंने बोला- बताता हूँ.. पहले फ्रेश तो होने दो।

मैं आगे कुछ लिखूँ.. इससे पहले मैं अपने लण्ड के बारे में कुछ लिखना चाहूँगा।

मेरा लण्ड 7 इंच लंबा.. काफ़ी मोटा है और जब ये सख्त होता है.. तो सारी नसें ऊपर आ जाती हैं। लड़कियों को तो छोड़ो.. आज तक मैंने जिस भी रंडी के साथ सेक्स किया है.. उसने सिर्फ़ यही बोला है.. ऐसा मोटा लण्ड सालों में एक बार दिखता है.. और कितनी रंडियाँ तो लौड़ा लेते वक्त रो भी पड़ी थीं।

हम दोनों कमरे में गए.. मैं फ्रेश हुआ। उसके बाद मैंने उसके कन्धों पर हाथ रखा और उसे बिस्तर पर बैठाया। उससे बहुत सारी प्यार भारी बातें की.. उसको बहुत समझाया कि मैं उससे कितना प्यार करता हूँ।

अब उसको मैंने अपने इरादे साफ़ बता दिए.. वो थोड़ी सहमी हुई लग रही थी। तभी मैंने कहा- अगर तुम ना कहोगी तो मैं कुछ नहीं करूँगा और हम अभी घर वापस चले चलते हैं।

पर उसने अपना हरा सिगनल दे दिया, वो बोली- बात ऐसी नहीं.. कुछ हो गया तो?
मैंने उससे बोला- कुछ नहीं होगा।
और मैंने कन्डोम का पैकेट निकाल कर उसके सामने रख दिया।

उस पर बने हुए फोटो को देख कर वो बोली- आप बहुत गंदे हो..

कमरे में लाइट जल रही थी.. फिर क्या मैंने अपना शर्ट निकाला और बिस्तर पर उसको पकड़ कर लेट गया। उसके होंठों को किस करने लगा। उसके होंठ थोड़े छोटे थे.. लेकिन किस करने में जो मज़ा आ रहा था.. वो मैं शायद यहाँ शब्दों में ना लिख पाऊँ।

उसको किस करते-करते मैं उसकी दोनों चूचियों को दबा रहा था.. और रह-रह कर उसके सलवार में हाथ डाल देता।
मैं जब भी सलवार में हाथ डालता.. तो वो निकाल देती।
एक-दो बार तो मैं गुस्सा भी हो गया.. मैंने उससे बोला- ऐसे मत करो.. मुझे करने दो.. जो भी कर रहा हूँ।
फिर वो कुछ नहीं बोल रही थी।

अब मैंने उसकी सलवार में हाथ डाल कर उसकी चूत को अपनी उंगली से छुआ और धीरे-धीरे उंगली को उसकी चूत में अन्दर तक डाल दिया।

वो अपनी आँखें बंद करके मेरे किस और अपनी चूत में मेरी घुसती-निकलती उंगली.. दोनों का बहुत मज़ा ले रही थी।

मैं उसके पूरे कपड़े उतारूँ.. इससे पहले मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए थे.. मैं सिर्फ़ अंडरवियर में रह गया था।
फिर मैंने उसकी कमीज़ उतारी.. देखा तो उसने एक लाल रंग की ब्रा पहनी हुई थी।
मैंने सोचा- धीरे-धीरे करूँ.. तो अच्छा होगा.. अभी पूरे 2 घंटे से भी ज़्यादा बचे थे।

फिर क्या था.. मैंने उसे बहुत चुम्बन वगैरह किया। करीबन दस मिनट के बाद मैंने उसकी ब्रा भी निकाल दी।
तभी उसने बोला- पहले लाइट तो बंद करो।
तब मैंने उसको समझाया- देखो पहली बार है.. तो लाइट बंद ना करो.. तो अच्छा होगा।
तो वो मान गई। उसको क्या पता था उसका पहली बार है.. मेरा थोड़ी ना..

उसने अपना चेहरा अपने हाथ से ढका हुआ था और मैं उसकी मस्त चूचियों को चूस रहा था। कसम से बोलता हूँ आज तक मैंने ऐसे निप्पल और मम्मों का गठजोड़ अपने जीवन में पहले कभी नहीं देखा था।

एकदम गोरी चूचियाँ और उन पर कड़क निप्पल.. ना बड़े.. ना छोटे.. ऊपर से दूधिया रंग पर गुलाबी रंगत के अंगूरी दाने.. माशा अल्लाह..

करीबन 15 मिनट तक मैं उसके चूचों के साथ खेलता रहा.. फिर मैंने सोचा.. कि ऐसी लड़की को एक बार नहीं.. 3 घंटे में कम से कम 3 बार तो चोदना ही चाहिए।

फिर क्या था.. मैं उसकी सलवार निकालने लगा.. तो पता नहीं क्यों मना करने लगी। तभी मैंने अपनी अंडरवियर निकाली और उसका हाथ पकड़ कर अपना लण्ड उसके हाथ में दे दिया।
उसके ठंडे-ठंडे हाथ और मेरा गरम लण्ड.. हाय.. अलग ही मज़ा आ रहा था।
फिर उसके बाद उसने अपनी सलवार निकालने के लिए मना नहीं किया।

उसको नग्नावस्था में मैंने ऊपर से नीचे तक देखा तो ऐसे लगा कि क्यों इस लड़की के साथ ये कर रहा हूँ। कितनी हसीन है ये.. लेकिन दिल की चाहत और दिमाग़ की चाहत में फरक होता है।

फिर क्या था.. मैंने उसका बचा हुआ आखिरी कपड़ा यानि उसकी चूत का ढक्कन भी निकाल दिया और अब वो मेरे सामने बिल्कुल नंगी थी।

मैंने बिना वक्त बर्बाद किए उससे बोला- देखो थोड़ा दर्द होगा.. अगर ज़्यादा दर्द हुआ तो बता देना..
उसने बोला- ठीक है..

मैंने उसके पैर फैलाए और उसके ऊपर चढ़ कर उसको एक चुम्मा लिया उसके बाद क्या.. मैंने उसके पैर चूत का छेद खोलने के लिए फैलाए और उसकी चूत के मुँह पर अपने लण्ड को रख दिया।

अब मैंने उसकी आँखों में देखा और धीरे से लण्ड को धक्का मारा ही था कि वो ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगी- ओह्ह..उई.. मर गई.. निकालो.. मैं मर गई.. प्लीज़ निकालो.. मैं मर गई.. आह..
तो मैं रुक गया और अपना लण्ड बाहर निकाल लिया।

ऐसी कसी हुई चूत शायद ही नसीब वालों को मिलती है। हल्की सी दोनों तरफ से फूली हुई.. पैर फैलने पर पैरों के बीचों बीच एकदम लाल गुलाब जैसी दरार देख कर तो ऐसा लग रहा था कि इसमें लण्ड नहीं सिर्फ़ जीभ जानी चाहिए।

इस बीच मैं उसको चुम्मा लेता था और समझाता रहा- देखो.. पहली बार दर्द तो होगा ही.. इसको सहन करने के बाद ही मज़ा आता है।

फिर उसने मुझसे बोला- अजीब सा दर्द है.. ये दर्द सहन करने जैसे नहीं है.. लेकिन फिर भी आप बोलते हो.. तो एक बार फिर से ट्राई करते हैं।
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मैं फिर से उसके ऊपर आ गया और वो मेरे लौड़े के नीचे आ गई। इस बार मैंने उसकी चूत पर ढेर सारा थूक लगाया और फिर अपना लण्ड रखा..

मैंने उसको किस करना चालू किया और जब मुझे लगा कि उसे मज़ा आ रहा है.. तो पूरे ज़ोर के साथ अपना लण्ड उसकी चूत में पेल दिया।
उसका असर यह हुआ कि वो ज़ोर से चीखी और अपने राइट पैर से मेरे सीने पर इतने ज़ोर से मारा कि पूरा लण्ड उसकी चूत से बाहर निकल गया।

अब वो ज़ोर-ज़ोर से रोने लगी और बोलने लगी- देखो.. खून निकल रहा है.. कितना दर्द हो रहा है..
मैंने उसे समझाया- देखो.. इसमें रोने की बात नहीं है.. थोड़ी देर में खून बंद हो जाएगा।

वो थोड़ी देर तक रोई.. फिर मेरे गले लग कर उसने कुछ पलों तक आराम किया।
फिर मैंने बीस मिनट बाद उससे पूछा- अभी भी दर्द हो रहा?
तो उसने बोला- हाँ लेकिन उतना नहीं..

मैंने उससे कहा- एक इलाज है.. लेकिन तुम राज़ी हो तो करेंगे..
तो बोली- क्या?

मैं बोला- अगर मैं तुम्हारी चूत चाटूं.. तो ठीक हो जाएगा।
पहले उसने बहुत मना किया.. फिर मैंने उससे बोला- देखो.. यह हमारी सुहागरात जैसा ही है.. इसे खराब मत होने दो।

तो वो कुछ नहीं बोली.. मैंने उसे फिर से बिस्तर पर लिटाया और उसकी चूत पर धावा बोल दिया। काफ़ी देर तक उसकी चूत पर अपनी जीभ से उसको चाटता रहा।

फिर उसके पेट को चाटते हुए उसकी चूचियों को चूसना चालू किया.. फिर उसको खूब चूमा-चाटी की। चूत चाटने से शायद वो जोश में आ गई थी।

उसकी चूचियों को चाटने के बाद मैंने उसे किस किया और उसके कानों को चूमते-चूमते मैंने उसको कान में बोला- फिर से एक बार ट्राई करें? इस बार मैं धीरे-धीरे करूँगा।
तो उसने बोला- ठीक है..

फिर क्या था.. मैंने उसके पैरों को फैलाया और अपना लण्ड फिर उसकी चूत पर रख दिया।
उसकी चूत से हल्का-हल्का खून अभी भी निकल रहा था।

इस बार मैंने धीरे से लण्ड को अन्दर डाला और उसके मुँह से ‘आह..’ निकला।
फिर मैंने उससे पूछा- दर्द पहले से कम है?
तो उसने बोला- हाँ।

मैंने उससे बोला- दर्द तो होगा.. लेकिन पहले जितना नहीं होगा.. थोड़ा सा सहन कर लो.. फिर देखना कितना मजा आता है।
उसके बाद मैं धीरे-धीरे अपना आधा लण्ड ही उसकी चूत में अन्दर-बाहर करने लगा। इसी के साथ थोड़ा-थोड़ा ज़ोर लगा कर लण्ड को चूत के और अन्दर पेलने लगा।

जब भी लण्ड थोड़ा और अन्दर जाता.. वो ‘आहह..’ की आवाज़ अपने मुँह से निकालती।
थोड़ी देर में पूरा लण्ड उसकी चूत में पेवस्त हो चुका था।
फिर क्या.. अब ना उसे दर्द हो रहा था ना हम दोनों को कोई परेशानी हो रही थी।

कन्डोम बिस्तर के एक कोने में पड़ा था और मैं बिना कन्डोम के उसकी चूत को चोदे जा रहा था।

वो भी पूरी मस्ती से मेरा साथ दे रही थी.. उसका पहली बार था। पर अभी भी जितना साथ उसे देना चाहिए था.. वो उतना साथ नहीं दे रही थी। लेकिन उसके मुँह से निकलती आवाज़ और उसका मासूम सा चेहरा और उसकी बन्द आँखें देख कर मुझे एहसास हो रहा था कि उसे भी मज़ा आ रहा है।

जब उसका दर्द पूरी तरह चला गया.. तो मैंने अपनी रफ़्तार बढ़ा दी और उसे कभी किस करता तो कभी उसके चूचियों को चूमता और जितना ज़ोर होता उतनी जोर से उसकी चूत में लण्ड को धकेल देता।
जब भी ज़ोर का धक्का मारता.. वो चिल्लाती- मर गई माँ..

हम इसी तरह काफ़ी देर तक सेक्स करते रहे। अब वो पल काफ़ी नज़दीक था कि मैं झड़ने वाला था.. मुझे नहीं पता था कि उसकी इच्छा पूरी हुई थी या नहीं.. पर मैं ये देख पा रहा था कि चादर खून से और उसकी चूत के पानी से गीली हो चुकी थी।

जब मेरा माल निकलने वाला था.. तो मैंने उससे कहा- मेरे लण्ड से कुछ निकलने वाला है.. क्या करूँ?
तो उसने बोला- मुझे क्या पता.. क्या करना है?
मैं बोला- अन्दर डालूँ.. या बाहर निकालूँ..?
तो उसने बोला- मत निकालिए.. इसे अन्दर ही रहने दीजिए।

मैंने ये सुनते ही झटके और ज़ोरदार कर दिए और 15-20 झटके पूरी ताक़त के साथ उसकी चूत मे ऐसे ढकेले कि पूरा लण्ड एक ही बार में अन्दर चला जा रहा था।

अब कुछ ही झटकों के बाद मैंने उसकी चूत में ही अपना सारा माल निकाल दिया और उससे एकदम से चिपक गया।
मेरा लौड़ा चूत से बाहर निकालने के कुछ ही पलों बाद.. लौड़े का माल थोड़ी देर में उसकी चूत से बाहर बहने लगा।

उसके बाद हमने एक-दूसरे से बहुत सारी बातें की.. एक-दूसरे से लिपटे रहे और उस दिन हमने उतने ही मज़े से दो बार और मज़े लिए।

फिर ये सिलसिला उसकी शादी तक चलता रहा.. उसके साथ बिताया एक-एक पल मुझे आज भी याद है।
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