भूतों का डेरा

प्रेषक : जो हन्टर

मुझे जॉन ने अपने गांव में छुट्टी मनाने के लिये बुला लिया था। आज शाम को डिनर पर वो मुझे बता रहा था कि उसके पुराने मकान पर भूतों का निवास है, और वहां जाने पर वो उत्पात मचाते हैं। मैं हमेशा उसकी बातों पर हंसता था। मेरी हंसी सुन कर वो बड़ा निराश हो जाता था। उसका मन रखने के लिये मैंने उससे कह दिया कि अगले दिन अपन वहां चल कर देखेंगे।

दूसरे दिन शाम को वो चलने को तैयार था। मैं उसे टालने के चक्कर में था पर एक नहीं चली….। हम दोनों डिनर करके कार में बैठ कर चल दिये। गांव की आबादी से थोड़ी ही दूर पर यह मकान था। जॉन ने कार रोक दी और बताया कि यही मकान है। मैंने उसे समझाया कि देखो ये भूत वगैरह कुछ नहीं होता है…. तो उसने मेरी तरफ़ देखा और कहा कि चलो वापस लौटते हैं….। मैंने उसके दिल से वहम निकालने के लिये उसे कहा कि अब आये है तो अन्दर चल कर देख लेते हैं।

जॉन अब झुन्झला गया,”अच्छा चलो…. अपनी आंखों से देखोगे तो पता चलेगा….”

मैंने उसकी बात हंसी में उड़ा दी। हम दोनों उस मकान में दाखिल हो गये। तभी एक जवान लड़का दौड़ता हुआ आया और पूछा,”साब…….. कौन हैं आप।…. ओह्…. जॉन साब….आप……..आईये !”

“सब यहां ठीक तो है ….” जॉन ने पूछा।

“हां मालिक…. मैं यहां की रोज सफ़ाई करता हूँ…. अब मैं ही ध्यान रखता हूँ यहां का….आईये….!”लड़के ने कहा।

मैं हंसा – “ये लड़का यहां रहता है…. तेरा नौकर है ना….”

“ह…. आ…. हां ये तो कालू है….।”

हम अन्दर मकान में चले आये। पुराना मकान था…. कालू और उसका परिवार वहां रहता था। उसने हमे बड़े आदर के साथ अन्दर बैठाया। मैंने कहा।

“अरे भाई कालू मुझे मकान तो दिखाओ….”

” हां साब…. जब तक चाय बनती है आपको मकान दिखाता हूँ!”

“और जॉन ….तुम मुझे भूत दिखाओ….” मैंने जॉन का मजाक बनाया, कालू थोड़ा सहम गया।

हम दोनों कालू के पीछे चल दिये…. वो एक एक कमरा बताता जा रहा था। मैंने एक जगह रुक कर पूछा,” इस कमरे में क्या है?”

“इसे रहने दो मलिक्…. ये कमरा मनहूस है….!”

“मैंने कहा था ना…. अब चलो यहां से….” जॉन ने मुझे खींचा।

“क्या मनहूस है …. खोलो इसे….”

“वहां चलते हैं……..” कालू बात पलटता हुआ बोला।

“नहीं रुको…. इसे खोलो….” मैंने ज़िद की….

“जी चाबी नहीं है इसकी……..”

मुझे गुस्सा आ गया…. मैंने दरवाजे पर एक लात मारी…. दरवाजा खुल गया…. वह एक सजा सजाया कमरा था।

“तो यह है शानदार कमरा….यानि भूतों वाला…. तुम इसे मनहूस कहते हो….?” मैंने व्यंग्य से कहा “जॉन को बेवकूफ़ बनाते हो….!”

तभी वहां दो जवान लड़कियाँ नजर आई….

मैंने उनसे पूछा,”आप लोग कौन हैं….?”

वो दोनों लड़कियाँ घबरा गई….

उनमें से एक ने हिम्मत करके कहा….”हम तो छुप कर यहां रहती है…. ये कालू हमारी मदद करता है….”

“तो जनाब ये है आपके भूत बंगले का राज़……..जॉन निकालो इन्हें यहां से….”

“साब आप हमे मत निकालिये….हम आप को खुश कर देंगी….” एक मेरे पांव पर झुक गई। उसके बड़े बड़े बोबे उसकी कमीज में से छलक पड़े। मैं ललचा गया उसकी जवानी देख कर।

“जॉन खुश होना है क्या….” पर मैंने देखा जॉन वहां से शायद घबरा कर जा चुका था। दूसरी ने विनती की….

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