मोना क़ी दीदी क़ी चुदाई

प्रेषक : संजय शर्मा

मैं संजय एक बार फिर अपनी आपबीती आपको बताना चाहता हूँ। मेरी पहले की कहानी आप लोगो को बहुत पसंद आई, उम्मीद है आपको यह भी पसंद आएगी।

जब तक मैं मोना के साथ रहा, हमने सेक्स के बहुत मज़े लिए पर उसी बीच एक ऐसी बात हो गई जिसने मुझे बहुत डरा दिया। मुझको लगा कि अब न तो मुझको मोना के शरीर से खेलने का मौका मिलेगा और डाँट भी पड़ेगी।

हुआ यह कि एक दिन मोना दोपहर में मेरे घर आई, उस वक़्त घर में कोई नहीं था। मैंने उसको अन्दर बुला कर दवाजा बंद कर लिया, उसको अपनी बाहों में ले लिया और चूमने लगा पर वो अपने को मुझसे दूर करके बिस्तर पर बैठ गई।

मैंने उससे पूछा- जान ! क्या बात है? आज मन नहीं है या कुछ और कारण है?

मोना बोली- एक परेशानी हो गई है ! मेरी दीदी को सब कुछ पता चल गया है और वो कह रही है कि वो यह बात सबको बता देगी ! संजय, मुझको बहुत डर लग रहा है ! कुछ करो !

मैंने उसको समझाया कि मैं कुछ करुंगा और उसको प्यार करके घर भेज दिया। मैंने उसको तो समझा दिया पर मन ही मन में मैं खुद बहुत डर गया था। मैं मोना की दीदी को जानता था, वो कॉलेज़ में पढ़ती थी और गुस्से वाली भी थी। वो कुछ भी कर सकती थी सो डर लगना ही था।

अगले दिन में मेरी माता मोना की मम्मी के साथ बाज़ार गई और मैं घर पर अकेला था। तभी दरवाज़े की घण्टी बजी, मुझको लगा कि मोना होगी तो मैंने दरवाज़ा खोला। पर सामने देखते ही डर के कारण मेरी जान निकल गई। सामने मोना की दीदी खड़ी थी। मैंने चुपचाप उनको अन्दर आने को कहा तो वो अन्दर आ कर सोफे पर बैठ गई, मैं भी वहीं नज़रें नीची करके बैठ गया।

वो बोली- संजय, यह सब क्या चल रहा है?

मैं कुछ नहीं बोला तो वो बोली- अब नज़रे नीचे करके क्या बैठा है, जवाब दे? मुझको मोना ने सब कुछ बता दिया है, मैं तो सोच भी नहीं सकती थी कि तू ऐसा है।

मुझको लगने लगा था कि आज मेरी खैर नहीं पर अब क्या कर सकता हूँ।

उन्होंने मुझको अपने पास बुलाया तो मैं चुपचाप उठ कर उनके पास गया। वो क्या बोल रही थी, डर के कारण मुझको कुछ समझ नहीं आ रहा था।

तभी उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर कहा- अब बचना चाहते हो तो मेरा कहना मानना होगा !

मैंने कहा- दीदी, गलती हो गई ! माफ़ कर दो !

तो वो बोली- गलती तो तुमने की है पर अब बचने के लिए तुमको एक गलती और करनी पड़ेगी ! मेरी तरफ देखो ! तुमको मेरे साथ भी वही करना पड़ेगा जो तुमने मेरी बहन के साथ किया है !

यह सुन कर मैं एकदम सकते में आ गया, मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि मेरी किस्मत इतनी अच्छी कैसे हो गई है ?

मेरे सामने एक 21 साल की भरपूर जवान लड़की बैठी है और खुद मुझको चोदने को कह रही है।

मैंने जब पहली बार दीदी को देखा था तब से ही यह इच्छा मेरे मन में थी, पर वो उम्र में बड़ी थी और गुस्से वाली भी थी। तो कहना तो दूर, उनको ठीक से देखने की भी हिम्मत नहीं हुई। पर आज वही लड़की मेरे पास बैठी थी। मैंने उनको सर से पाँव तक देखा। काला टॉप और सफ़ेद स्कर्ट में वो बहुत सुन्दर लग रही थी। रंग इतना साफ़ जैसे दूध हो !

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