प्रीत की कहानी



प्रेषक : मनदीप सिंह

मेरा नाम दीप है। मैं जालंधर का रहने वाला हूँ। आज मैं आपको अपनी सच्ची कहानी बताउंगा। इस कहानी में मैं हीरो हूँ और मेरी गर्लफ्रेंड प्रीत हिरोइन है।

बात तब की है जब मैं इंजीनियरिंग कर रहा था और वो मास्टर की डिग्री कर रही थी। हमारा चक्कर पहले एक साल तक चला और मैंने उसे छुआ तक नहीं, चुम्बन तक नहीं था किया। पर मेरे मन में कभी भी उसके बारे में गलत ख्याल तक नहीं आया था जब तक मैंने उसे छुआ नहीं।

एक बार गलती से मेरी कोहनी उसके मम्मे में लग गई। बस फिर क्या था, मेरे तो पूरे बदन मैं आग लग गई और फिर मैं बहाने बहाने से उसे स्पर्श करता। मैं उसे चोदने के बहाने सोचने लगा।

एक बात बता दूं मैं …. उसकी फ़ीगर थी- 34-30-36, क्या गज़ब की सुन्दर थी वो। जब वो चलती थी तो 71-72 होता था। क्या गज़ब के उभार थे ! उसकी गांड क्या गज़ब ढाती थी।

एक दिन मैंने उसे अपने जन्मदिन के बहाने अपने घर बुला लिया। वह आई और मेरे लिए एक सुंदर सी कमीज़ लाई। उस दिन उसने कसी हुई जीन पहनी हुई थी और कसा हुआ टॉप पहना हुआ था, जिसमें से उसके उभार एकदम मस्त लग रहे थे। वो आई, मुझे जन्मदिन की बधाई दी और हम कमरे में जाकर बैठ गए। मेरे मम्मी ने हमे चाय दी और खुद दूसरे कमरे में चली गई।

हम पास-पास ही बैठे थे। चाय पीकर मैंने उसे बहाने से चूम लिया। उसने भी मुझे मना नहीं किया। फिर मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर लगा दिए।

क्या गर्म लड़की थी वो ! एकदम गर्म। जब उसने मुझे समूच किया, उसके होंठ एकदम गर्म थे। मेरा एक हाथ उसके वक्ष पर चला गया खुद-ब-खुद !

उसने मना नहीं किया किया, शायद मेरे जन्मदिन की वजह से। पूरे दो मिनट तक मैं उसे चूसता रहा और वो गर्म हो गई। उसने मुझे हटा दिया और जाने को कहने लगी।

मैंने उसे अगले दिन आने को मना लिया और जाने दिया।

अगले दिन मेरे घर पर कोई नहीं था, उसने कालज से बंक मारा और मेरे घर आ गई। मैंने उसे कमरे में बिठाया और चाय बना कर पिलाई। फिर हम बातें करने लगे।

बात बात में मैं उसके काफी करीब आ गया और उसे चूम लिया। फिर उसने भी मुझे किस किया। मेरी हिम्मत बढ़ गई। मैंने उसे समूच किया, पूरे दो मिनट तक मैं उसके गर्म होंठों को चूसता रहा। मेरा एक हाथ उसके स्तन दबाने लगा। एकदम सख्त थे उसके मम्मे। उसने मुझे कस के पकड़ लिया और थोड़ी सी मेरे ऊपर आ गई मैं समझ गया था कि वह गर्म हो रही है। मैंने उसकी कमीज़ के अन्दर से हाथ डाला और उसकी ब्रा से मम्मा पकड़ लिया। एकदम सख्त था, मैंने उसे कस कर दबाया तो वह तड़प उठी। उसके मुँह से अहहहः ऊउह्ह्ह की आवाज़ें आने लगी। जब मैं उसकी कमीज़ उतारने लगा तो वो कहने लगी- ऐसे नहीं, एक चादर ले आओ, मुझे शर्म आ रही है।

मैंने बेड से ही चादर निकाल ली। अब मैं और वो चादर के नीचे थे और मैं उसकी कमीज़ उतार रहा था। उसकी ब्रा में से उसके बूब्स क्या गज़ब थे। मैंने उसकी ब्रा भी उतार दी और उसके मम्मे चूसने लगा। उसकी तो हालत खराब हो गई। वह तड़पने लगी।

पाँच मिनट तक मैं उसके मम्मे चूसता रहा। फिर मैं उसके पेट को चूमने लगा, वह तो सांप जैसे मचल रही थी। मुझे भी मज़ा आ रहा था। मैंने उसकी सलवार खोलने के लिए हाथ बढ़ाया तो उसने मना कर दिया। पर मैंने उसकी सलवार खोल दी और उसके पेट को चूमने लगा।

वह आह…. आऽऽह…. उह उहऽऽ … की आवाज निकालने लगी। फिर मैंने उसकी चड्डी भी उतार दी। मैं उसके नीचे अपनी जीभ से छूने लगा। उसने शेव की हुई थी अपने नीचे।

मैंने उसकी छोटी सी मोरी में अपनी उंगली डाली तो वह तड़प उठी और मुझे कस कर पकड़ लिया।

उसके दाने को मैं अपने जीभ से छू रहा था।

वह मस्त हो गई थी। उसके मुँह से अजीब अजीब सी आवाज़ें आ रही थी। वह तड़प रही थी मछली की तरह।

मैं उसके ऊपर लेट गया। वह उठ कर मेरे लण्ड को अपने मुँह में लेने लगी, उसने मेरे लंड को चूसना शुरू कर दिया। मुझे तो जैसे जन्नत मिल गई। पाँच मिनट तक वह मेरे लंड को चूसती रही। उसके मुँह से आवाजें निकल रही थी।

मैंने उसको नीचे लिटाया और उसकी टाँगें खोल दी।

वह कहने लगी- इस छोटी सी मोरी में इतना बड़ा कैसे जाएगा?

मैंने उसे कहा- थोड़ा सा दर्द होगा बस !

मैंने उसके मोरी के बाहर अपना लंड रखा और एक धक्का दिया। सिर्फ सुपारा ही गया उसके अन्दर और वह चीखने लगी।

मैंने उसे कस कर पकड़ा और एक ज़ोर से धक्का दिया। आधा लंड उसके अन्दर चला गया। उसकी आंखों से आंसू निकलने लगे। उसने भी मुझे कस कर पकड़ लिया। एक धक्के से पूरा लंड उसके अन्दर डाल दिया। वह मेरे नीचे तड़प रही थी।

मैंने उसे चोदना शुरू किया और वो सिसकारने लगी- आः अहह आःह्ह्ह अहह प्लीज़ बाहर निकाल लो ! मैं मर जाउंगी !

पर मैं धक्के मारता रहा। फिर उसे भी मज़ा आने लगा। दस मिनट तक उसे मैं चोदता रहा। फिर मैं झर गया। शायद वह भी झर गई थी। वह उठी और चादर में ही बाथरूम में चली गई।

वापस आकर उसने मुझे कहा- खून निकल रहा है।

मैंने उसे रूई दी तो उसने नीचे रख कर चड्डी पहन ली। कपड़े पहन कर वह कहने लगी- इतना दर्द उसे आज तक किसी चोट का भी नहीं हुआ।

फिर वह अपने घर चले गई। उसका फ़ोन आया और वह कहने लगी- मेरा तो बुरा हाल है, ठीक से चला भी नहीं जा रहा।

मैंने उसे आराम करने को कहा।

पर वह खुश लग रही थी। मैं भी खुश था।

इसके बाद की कहानी मैं अगली बार अन्तर्वासना पर ही सुनाउंगा।

यह मेरी सच्ची कहानी आपको कैसी लगी ?

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