फ़ोन पर सेक्स की बातें



प्रेषिका : आशा

शायद आप मेरे बारे में यह सब जानना चाहेंगे : मैं आशा हूँ, सेक्स की मूर्ति ! और मैं आपके लिए वो सब कर सकती हूँ जो आपकी पत्नी आपके लिए कभी नहीं कर पाएगी।

क्या आप मेरे बदन की सैर करना चाहेंगे?

मैं आपको ले चलती हूँ।

मेरा हर छेद कोमल, गीला, और हर तरह से इस्तेमाल के लिए तैयार है। और मैं कुछ ऐसा कर सकती हूँ कि अनुभवी से अनुभवी लण्ड भी मुझसे हार जाएगा। वास्तव में, जब तक आप मेरे तीनों छिद्रों में अपना काम-रस नहीं भर देते, तब तक मुझे लगता ही नहीं कि चुदाई पूरी हो गई है।

मेरी योनि के मुलायम, भूरे रंग के होंठ आपके लौड़े को जकड़ लेंगे और पूरा निगल जाएँगे।

मेरी जीभ की नोक जानती है कि पुरुष के लिंग पर कहाँ स्पर्श करना है ताकि वो अपना रस छोड़ दे। और मेरी तंग छोटी गाण्ड आपके सख्त लौड़े को कम उम्र की कुंवारी चूत से भी बेहतर निचोड़ देगी। मुझ पर विश्वास नहीं है? मैं आपको चुनौती देती हूँ ! अभी फोन करके मुझे आजमा लीजिए !

क्या आप जानते हैं कि फ़ोन पर सेक्स की बातें किस तरह और कैसी होती है?

नहीं?

तो इसे पढ़िए, इसे पढ़कर आदमी का लंड चूत के लिए और औरत की चूत लंड के लिए बेताब हो जायेगी !

तो पेश है :

नितिन : हाय !

मैं (आशा) : बोलिए ! कैसे हैं आप ?

नितिन : ठीक हूँ और तुम ?

मैं : ठीक !

मैं : क्या चल रहा है ?

नितिन : बस ठीक कट रही है !

नितिन : लंड खड़ा हो गया तुझसे बात शुरु करते ही !

मैं : अच्छा ! इतनी जल्दी?

मैं : इसका मतलब आपके लिए बहुत हॉट पिक हूँ मैं?

नितिन : हाँ यार बहुत दिन बाद मिली ना !

मैं : हाँ यार ! तुम फ़ोन कर लिया करो ना !

नितिन : अच्छा, फिर आज कुछ मूड है या नहीं?

मैं : अपना तो हर समय मूड रहता है ! बोलो, गांड मारनी है या चूत ?

नितिन : दोनों !

मैं : पहले क्या ?

नितिन : आप का जो भी मन हो वो मरवा लो ! एक साथ मारनी हो तो दो लोग लगेंगे।

मैं : नहीं आपसे ही मरवानी है और से नहीं।

नितिन : अच्छा क्या पहना है?

मैं : मिनी स्कर्ट और टॉप पहना हैं, पैंटी और ब्रा भी हैं काले रंग की।

नितिन : मैंने पैन्ट और टी-शर्ट

मैं : अब एक दूसरे को किस करते हैं और एक एक करके कपड़े उतारते हैं।

मैं : टी-शर्ट उतारो !

नितिन : ओ के ! आप भी हेल्प करो।

नितिन : अब मैं तुम्हारी टॉप उतारता हूँ !

नितिन : वाह ! क्या साइज़ है बॉडी का बताओ जरा !

मैं : वक्ष 34, कमर 30, और हिप्स 34

नितिन : जान खुलकर बोल ! तभी मजा आयगा ! बोल मेरी चूचियाँ 34, कमर 30 और गाण्ड 34

मैं : अच्छा अब जींस उतार दो

मैं : आप का लंड साइज़ क्या है?

नितिन : साढ़े आठ इंच लंबा हैं और सवा दो इंच मोटा है।

मैं : लंबा बहुत है !

नितिन : हां !

मैं : जान, डर लग रहा है !

नितिन : डरो नहीं ! तुम्हारी चूत इसी पूरा ले लेगी।

मैं : नहीं मेरी तो बहुत टाइट और छोटी है, बहुत डर लग रहा है। फट गई तो?

नितिन : जान, क्या तुम पहली बार चुदने वाली हो?

मैं : नहीं पहले एक बार शुरुआत की थी पर ठीक से नहीं चुदवाई।

नितिन : अच्छा वो क्यूँ?

मैं : उसे छोड़ो ! आप आगे बोलो।

नितिन : जान शुरू में तो थोड़ा दर्द होगा ! लेकिन फ़िर मज़ा आएगा।

मैं : अच्छा?

नितिन : जान, तुम्हारी चूत पर बाल हैं क्या?

मैं : हाँ ! थोड़े-थोड़े थे, पर आपके लिए क्लीन शेव की है।

नितिन : तुम पूरा मुँह में ले लोगी?

मैं : मेरे मुँह में पूरा नहीं आएगा !

नितिन : अच्छा चलो कोशिश कर लो ! तुम्हारी चूत पर कुछ तेल/क्रीम लगा लेते हैं, तेल लगा लेने से आसानी से चूत में चला जाएगा और तुम्हें दर्द भी कम होगा।

मैं : अच्छा !

नितिन : हाथ में लो लंड को !

मैं : अच्छा ले लिया ! बहुत हॉट हैं और टाइट भी रॉड के जैसा !

नितिन : हम्म ! अब पकड़ने से कुछ डर कम हुआ?

मैं : अब आप ऐसे ही पैंटी के ऊपर से मेरी जांघों और चूत पर हाथ क्यों फेर रहे हो?

नितिन : मैं इसको किस कर लूँ, देख कर बहुत मन हो रहा है !

मैं : हाँ कर लो ! मेरा भी मन हो रहा है तुम्हारे लण्ड के सुपारे को अपने मुँह में लेने का ! एकदम अखरोट के जैसा है !

नितिन : हाँ किस करो, और फिर इसे मुँह में लो जान !

मैं : बहुत मोटा है, मुँह में नहीं आ रहा !

नितिन : थोड़ा मुँह और खोलकर कोशिश करो जान, आ जायगा !

मैं : बहुत बड़ा है ! नहीं आ रहा !

नितिन : जितना आ रहा है, ले लो !

मैं : पौचा पौच

नितिन : कितना आ गया है?

मैं : ऊई माँ ! यह तो चूसने से और मोटा लंबा हो रहा है !

नितिन : अब मैंने तुम्हारे बालों को पीछे की तरफ़ से जोर से पकड़ लिया है और अब अचानक मैंने एक ज़ोरदार झटके के साथ पूरा लंड तु्म्हारे मुँह में दे दिया।

मैं : अह्हा मर गई !! ऐसे नहीं ! धीरे धीरे !! ऐसे तो मेरा दम घुट जाएगा ! मारना चाहते हो क्या अपनी आशा को?

नितिन : तुम्हें नहीं ! तुम्हारी चूत और गाण्ड मारना चाहता हूं आशा डार्लिंग !

मैं : रुको ! थोड़ी देर साँस तो लेने दो !

नितिन : आइस क्रीम लगा के चाटेगी ?

मैं : नहीं चोकलेट !

नितिन : कौन सा फ़्लेवर पसंद है?

मैं : कोई भी !

नितिन : अब लंड पर चोकलेट लगा दी है चाट ले पूरी, अब मैं तुम्हारे मुँह में लंड को अंदर बाहर कर रहा हूँ !

मैं : अह्हा अब अच्छा लग रहा है। हम्म्म ऐसे ही करते रहो !

नितिन : कैसा लग रहा है?

मैं : अहा अब अच्छा लग रहा है।

नितिन : और अब मैं तुम्हारी चूत और गांड में ऊँगली कर रहा हूँ !

मैं : पहले थोड़ी देर ऐसे ही पूरा बदन मसलो ! और अपना बदन भी रगड़वाओ !

नितिन : अच्छा अब अपनी चूत तो चटा ! मुझको बहुत बेचैन कर रखा हैं इसने !

मैं : हम्म चाट लो! पर मैं भी आपका लंड चूसूंगी !

नितिन : तो ठीक है, लेट जा, मेरे लंड को मुँह में लेकर ! और में तेरी चूत चाटता हूँ !

नितिन : हम्म बहुत गुलाबी और उभरी हुई हैं जान तेरी चूत इसे मारने में बहुत मजा आयगा !

मैं : प्लीज़ यार, ऐसे मत बोलो ! मुझे शर्म आती है।

नितिन : चल ठीक हैं अब लंड डालता हूँ तेरी चूत में !

मैं : बहुत गीली हो गई हैं चाटने से अब लंड भी आराम से जाएगा।

मैं : उम् मर गयीईइ !

मैं : रुको बहुत दर्द हो रहा हैं,

नितिन : रुक गया ! अब तेरे होंठ चूस रहा हूँ !

नितिन : तेरी चूचियाँ दबा रहा हूँ, इससे दर्द कम हो जाएगा।

मैं : अच्छा फिर?

नितिन : और फिर एक और झटके में लंड पूरा तेरी चूत में अन्दर गया

मैं : प्लीज़ रुको, मर गयी ई ओह ऊई, फट गयी ई !

नितिन : फिर थोड़ी देर तू अपने आप गांड हिला, दर्द कम हो जाएगा !

नितिन : मस्ती में चुदा !

नितिन : मजा ले ले के !

नितिन : अब बोल कि मैं अपनी चूत मरा रही हूँ !

मैं : मजा आ रहा है

मैं : हम्म्म पूरा पूरा जन्नत का

नितिन : तुझे तो एक साथ तीन लंड चाहियें !

मैं : नहीं यार ! ऐसे मत बोल !

मैं : पहले बहुत दर्द हुआ था। आप की खुशी के लिए सहन कर रही थी।

नितिन : अच्छा फिर?

मार घच घच

नितिन : अब मेरा पानी निकलने वाला है !

मैं : मैं भी झरने वाली हूँ।

नितिन : तेरे मुँह से लंड की गंध आ रही है।

मैं : लौड़े का स्वाद आ रहा है।

नितिन : हम्म तो चाट लो दोनों को ! अच्छा लगा?

नितिन : अपनी चूत का रस चूस न मेरे मुँह से !

मैं : हाँ ! बहुत अच्छा लग रहा है !

क्या आप मुझसे इस तरह की बातें नहीं करोगे?

तो फ़िर देर क्यों ?

मेरा फ़ोन नम्बर यहाँ है ! मुझे कॉल करने के लिए यहाँ क्लिक कीजिये

[email protected]

Download PDF पीडीएफ प्रारूप में इस कहानी को डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें


comments powered by Disqus