^ Back to Top




चाची की सहेली-2

प्रेषक : मितेश कुमार

वो और मस्त होकर चूसने लगी मुझे। मेरा लण्ड मोटा हो गया उसे भी लेकर चूसने में उसे कोई दिक्कत नहीं हो रही थी। मैं लगा धक्के मारने।

"अआह्ह, ओह, उन्म्मम्म्म्म ! आह्ह्ह्हह्ह ! ऊऊऊ हां !" बस इन्हीं आवाजों से वो मेरे होश लिए जा रही थी। मैं जैसे उसका मुँह ही चोदने लगा था। इतना मजा आज तक चूत मारने में नहीं आया था जितना अनु ने एक पल में दे दिया था।

मैंने अनु के स्तनों को पकड़ लिया और उन्हें दबाने और मसलने लगा। कपड़ों की कैद से आजाद कर मैं उसके चुचूकों को चूसने लगा। अनु बड़ी तेज़ी से अपनी उंगलियाँ मेरे लण्ड पर फिराने लगी। मैं काबू से बाहर हो गया। मैं और तेज़ धक्के मारने लगा और अपने पूरा लण्ड जड़ तक उसकी मुँह में डाल दिया। इतने पर भी अनु बड़े मजे से चूसे जा रही थी।

"आः, आः , आअ , आअ ,आआअह्ह्ह , उम्म्मम्म, अह, अह , ऊऊऊऊऊऊऊऊऊओ, आः अआह " जैसे शब्दों ने मुझे पागल ही कर दिया था। करीब पंद्रह मिनट तक हम ऐसे ही चिपके रहे। अनु के होंठों, जीभ और उँगलियों की करामत से मैं झड़ने तक पहुँच गया था। मैं अपना वीर्य उसके मुँह मैं नहीं निकलना चाहता था। पर अब खुद पर मेरा कोई वश नहीं था। अनु ने मेरे लण्ड को ऐसे जकड़ा हुआ था की छुड़ाना मुश्किल था।

आख़िरकार मैंने अपने सारा रस उसके मुँह में ही उगल दिया। वो मजे से अपने उरोजों को उछालती हुई मेरे रस को पीने लगी। कुछ बूँदें उसके बड़े बड़े स्तनों पर गिरीं। मैंने उसके दोनों स्तनों को हाथ में लेकर एक बार फिर मसल दिया।

उसकी गर्म आहों ने सारा माहौल गर्म कर दिया था। अब मैं आराम से बिस्तर पर बैठ गया। पहले मुख चोदन की ख़ुशी को मैंने पूरा समा लेने दिया अनु के पेट में। इसी बीच अनु खुद को साफ़ करके कपड़े पहन लिए। मुझे देख कर एक नशीली मुस्कान के साथ बोली- आओ ना ! मेरी चूत कुछ मांग रही है।

अब तो लग रहा था कि अनु को चोद दूँ। मेरी आँखों में भूख देखकर शायद वो भी गर्म हो गई। उसने झट वापस मेरे लण्ड को चूसना शुरू कर दिया। और मैंने अनु को सीधा बिस्तर पर ले जाकर पटक दिया।

उसने हवस भरी नज़रों से देखा मुझे। मैंने उसके शराबी होंठों को चूमा। उसने अपने जीभ मेरे मुँह के अन्दर डाल दी और मैं उसके जीभ और होंठ चूसने लगा।

वो अपनी उंगलियाँ मेरे लण्ड पर फिराने लगी। कुछ ही पलों में मेरा लण्ड सोते से जागकर उसकी आगोश में झूमने लगा। वो हलके हाथों से मेरा ऊपर-नीचे करने लगी। मैं एक हाथ से उसके स्तनों को दबाने और मसलने लगा और दूसरे हाथ की उंगलियाँ उसकी चूत पर फिराने लगा। वो पहले ही बहुत गीली हो चुकी थी। उसकी चूत से मीठी खुशबू आ रही थी।

मैंने अपनी एक ऊँगली से उसकी उसकी नंगी चूत में खुजली जैसे करने लगा। उसके होठों को छोड़कर मैं नीचे आने लगा। पहले उसकी भरी हुई चूचियाँ मैंने अपने मुँह में ली। उसके चुचूकों पर दांत से काटा मैंने।

एक मस्त आह से स्वागत हुआ मेरा। और अब मैं उसकी नाभि चाटने लगा। रुका मुझसे भी नहीं जाता था पर उसे तड़पाने में अलग ही मजा था। जब मैं उसकी चूत पर पहुंचा तो उसे देख कर तो मेरा रोम रोम खिल गया। अनु की चुत इतनी सुन्दर और मन-मोहक होगी मैं नहीं जानता था। बिलकुल साफ़, बस छोटे छोटे बाल। उसकी चूत किसी गुलाब की पंखुड़ियों की तरह ही गुलाबी थी।

रहा न गया और मैंने भी एक जबरदस्त चुम्मे के साथ उसकी चूत को जोरदार तरीके से चूसने लगा। उसकी एक लम्बी सीत्कार ने मेरे जोश को दोगुना कर दिया। अब तो रहा नहीं जाता था। मैंने चूसने के साथ झट उसकी चूत में अपनी दो उंगलियाँ डाल दी। उसे उँगलियों से ही जबरदस्त ढंग से चोदने लगा। उसने सीत्कारों, और कराहों की जैसे झड़ी लगा दी।

" ओऊ य़ा, उम्म्म्मम्म्म्मम्म्म्म, याआआआआआआ, ओर्रर्रर्रर, ओर्रर्रर्रर ओर्रर्रर्रर जोरररर जोर से !" जैसे शब्दों से मेरे कान गूंज गए। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं।

मेरी कामेच्छा और बढ़ने लगी। मैंने उसकी टांगों को ऊपर किया और उसकी गोरी संगमरमर जैसी जाँघों को चूमा और सहलाया। अब उसकी चूत नग्न और खुली मेरे सामने थी। सिर्फ जीभ से उसके दाने को चूसा, फिर रहा न गया तो मैं अपनी जीभ से उसकी चूत को चोदने लगा। तेज़ी से उंगलियाँ और जीभ चला चला कर मैंने उसे पागल कर दिया।

वो पूरी तरह गर्म हो गई थी। अनु मेरी उंगलियाँ अपनी चूत से निकालकर चाटने लग गई, जैसे अपनी ही चूत का स्वाद चखना चाहती हो। फिर उसने अपनी गांड उछाल-उछाल कर मुझसे अपनी चूत चटवाना शुरू किया।

तब मैंने अनु को पलट कर बिस्तर पर उल्टा लिटा दिया। वो झट से घोड़ी बन गई। पीछे से खुली उसकी मस्त चूत और गांड देखकर लण्ड और कड़ा होने लगा। मैंने उसकी चूत के मुहाने पर अपना लण्ड लगाया और एक ही धक्के में अपने आधा लण्ड उसकी चूत में उतार दिया। अनु कुँवारी नहीं थी पर अभी भी उसकी चूत बहुत कसी थी।

उसकी चूत रस से बिल्कुल तर हो गई थी। अन्दर जाते ही वो बड़े ही जोश से मेरे लण्ड को चोदने लगी। हम दोनों मिलकर धक्के मारने लगे। जोश के मारे दोनों को कोई ख्याल नहीं था। दूसरे धक्के में तो मेरे सारा लण्ड उसकी चूत में जड़ तक बैठ गया। वो अपनी चूत से जैसे मेरे लण्ड को निचोड़ने लगी। हाय, इतनी कसी चूत को चोदने में मजा इतना आता था, बता नहीं सकता। वो पूरे जोश में चुद रही थी। जैसे पूरा मुझे ही अन्दर ले लेना चाहती हो। मैंने झुक कर उसके रसीले होंठों का चुम्बन किया, और उसके लटके हुए गोल और मस्त चुचों को दबाने लगा। धक्के पे धक्का लगाते हुए हम दोनों हांफ रहे थे पर न मैं झड़ा था न वो।

"चोदो और चोदो और चोदो, ऊऊऊ येः , ऊऊ हाँ, चोदो मुझे मितेश, येआ ह्ह्ह !" वो तो बस यही सुर लगाये हुए थी। अपने रेशमी बालों को झटका झटका का वो अपनी कमर को आगे पीछे फेंके जा रही थी। मेरा लण्ड उसकी कसी हुई चूत में जैसे अमृत पान कर रहा था। उसकी चूत इतनी कसी हुई थी कि अब तो मैं अपने कामरस को निकलने से रोक नहीं सकता था। मैंने धक्के और तेज़ कर दिए। वो मेरे जोश का अंत जान कर खुद भी और तेज़ धक्के मारने लगी। अंत में हम दोनों साथ साथ झड़े।

मैंने अपने लण्ड को झड़ने से पहले ही उसकी चूत से निकाल लिया। वो मुड़ी और झट से मेरे लण्ड को पकड़कर अपनी हाथों से निचोड़ने लगी और फिर मुँह में लेकर उसने न्ग्न फ़िल्मों के तरीके में लण्ड चूसना शुरू कर दिया।

आह ! लावा की तरह मेरा रस निकल पड़ा और उसके मुँह से निकलकर उसके स्तनों के ऊपर से बहता हुआ नीचे आ गिरा, उसने अंतिम बूँद तक चूसा मेरे लण्ड को। फिर हम अलग होकर गिर पड़े बिस्तर पे। करीब एक घंटे बाद दोनों उठे अपने कपड़े पहन लिए और वापस गांव की तरफ चल दिए।

खैर, मैं उसे छोड़कर वापस आ गया। आज भी वो मेरी यादों में जिन्दा है पर अब जब भी मैं गांव जाता हूँ तो ए़क बार अनु को पक्का चोदकर आता हूँ।

अगर आपको मेरी कहानी अच्छी लगे तो मेरे लिए दुआ कीजियेगा कि इसके बाद मैं अब चाची की चुदाई की कहानी भेज सकूँ।

[email protected]

प्रकाशित: सोमवार 9 अप्रैल 2012 3:36 pm

 

PDF पीडीएफ प्रारूप में इस कहानी को डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें

नवीनतम कथाएँ