^ Back to Top




कंडोम की जरूरत नहीं

प्रेषक : जोधपुर गाए

दोस्तो, मैंने अन्तर्वासना पर बहुत सारी कहानियाँ पढ़ी हैं। मैंने सोचा कि क्यों ना आपको मैं अपनी कहानी सुनाऊँ।

यह तब की बात है जब मैं पढ़ता था। मेरे साथ एक लड़की पढ़ती थी, क्या बताऊ कैसे लगती थी? एकदम जैसे क़यामत ! लाल लाल होंठ, इतने लाल कि लगता था कि लिपस्टिक लगा कर आई है, गाल एकदम गोरे गोरे, चेहरे पर चश्मा लगाने के बाद ऐसे लगती थी जैसे "3 इडियट्स" की करीना कपूर !

हम दोनों मेडिकल साइंस के विद्यार्थी थे और किस्मत से हम दोनों के रोल नम्बर भी एक साथ थे जिससे हम दोनों एक साथ लैब में जाते थे और वहाँ भी हम दोनों को एक साथ काम करना पड़ता था यानि हम दोनों का जोड़ा बनता था।

एक दिन की बात है, लैब में कोई प्रयोग करते समय वो गलती पर गलती कर रही थी और वो प्रयोग ख़राब हो रहा था। तो मैंने बहुत समझाया पर वो सही नहीं कर पा रही थी। परेशान हो कर मैं उसके पीछे गया और उसके दोनों हाथ पकड़ कर उससे वो प्रयोग करवाया।

प्रयोग तो हो गया पर मेरे हालत ख़राब हो रही थी क्यूंकि मेरा लंड उसकी गांड को छू कर खड़ा हो गया और मै नहीं चाहता था कि उसे पता चले।

अगले दिन फिर वही कहानी हुई, तब मुझे भी लगा कि लोहा गर्म है, हथोड़ा मार देना चाहिए। पर मेरे एक दोस्त ने कहा कि उसे और तड़पाओ उसके बाद सेक्स का बहुत मजा आयेगा। इसलिए मैं उसे तड़पाता रहा।

कुछ दिनों के बाद मै भी उसे उत्तेजित करने लगा। जब लैब में मैं उसे पीछे से पकड़ कर कोई प्रयोग करवाता तो चुपके से उसकी गर्दन पर चूम लेता और लंड को भी उसे की गांड से छुआ देता और वो भी एक हाथ पीछे ले कर मेरे लंड को सहलाने लगती।

एक दिन जब स्कूल में परीक्षा हो रही थी तो उसका एक प्रयोग नहीं हो रहा था, जो हल्का लाल रंग आना था वो नहीं आ रहा था और फिर से करने का समय भी नहीं था, वो बहुत घबरा गई।

तब मुझे लगा मुझे ही कुछ करना होगा। मैंने एक झटके से उसकी हेयर-पिन निकाली और अपनी अंगुली से खून की दो बूँद उसकी प्रयोग में डाल दी जिससे उसका मनचाहा रंग आ गया।

पर एक बात बताऊँ दोस्तो, वो खुले बालों में क्या क़यामत लग रही थी ! मन कर रहा था कि वहीं पर उसे चोद दूँ !

मेरा लंड सलामी देने लगा जिसे शायद उसने देख लिया। पर हमारी यह हरकत एक लड़की शीला ने भी देख ली और उसे शक हो गया।

कुछ दिन यों ही निकल गए। मैं उसे चोदने की सोच रहा था पर कोई मौका नहीं मिल रहा था।

एक दिन उसने मुझसे कहा कि उसे एक चैप्टर में कोई परेशानी है तो मैं उसके घर पर आकर उसे पढ़ा दूँ।

उसने कहा कि घर पर कोई नहीं है, हम आराम से पढ़ सकेंगे।

"अंधे को क्या चाहिए, दो आँखें !"

मैंने हाँ कर दी।

मैं उसके बताए वक़्त पर उसके घर पहुँच गया, घर पर कोई नहीं था और वो मेरा इंतजार कर रही थी। उसने नाईटी पहन रखी थी जिसमें वो और भी सेक्सी लग रही थी।

पर उसने चश्मा नहीं पहना था तो मैंने पूछा- चश्मा क्यों नहीं पहना?

तो कहने लगी- चश्मे से मैं सेक्सी नहीं लगती !

यह सुन कर तो मुझे पक्का यकीन हो गया कि इसके मन में क्या है।

मैं और वो दोनों पढ़ने लगे उसे "रिप्रोडक्टिव सिस्टम" चैप्टर में प्रॉब्लम थी, मैं उसे पढ़ाने लगा।

आप तो जानते ही हैं कि उसे चैप्टर में कैसी-कैसी बातें होती हैं।

एक जगह उसे समझ नहीं आया तो मैंने उसे बताया कि लड़की के मासिक के दस दिन पहले और दस दिन बाद तक लड़की सेक्स करे तो वो गर्भवती नहीं होती।

तो वो दबी आवाज में बोली- मतलब आज तो कंडोम की जरुरत नहीं है।

मैंने उसकी तरफ देखा और बोला- मतलब?

वो बहुत ही प्यासी आवाज में बोली- प्लीज़, आज मेरी प्यास मिटा दो।

मैंने उसकी बाल पकड़े और उसकी होठों पर अपने होंठ रख दिए।

मुझे तो जैसे जन्नत मिल गई। क्या बताऊँ दोस्तो ! क्या होंठ थे उसके ! आज तक वो लम्हा याद करके मेरा लंड खड़ा हो जाता है।

सच ही सुना था मैंने कि "पहला किस हमेशा याद रहता है।"

हम दोनों एक दूसरे में खो गये, कभी मैं उसके होठों को चूमता तो कभी उसके नर्म गर्म गालों पर तो कभी गर्दन पर !

फिर मैं धीरे धीरे उसके स्तन कपड़ों के ऊपर से ही मसलता रहा।

उसके मुँह से "आ आह ! मैं तुम्हारी हूँ ! मेरी प्यास बुझाओ !" निकल रहा था।

मैंने भी ज्यादा देर न करते हुए फ़ौरन उसके कपड़े उतारने शुरु किए तो वो भी मेरे कपड़े हटाने लगी।

थोड़े देर में वो ब्रा-पैंटी में थी और मैं अण्डरवीयर में !

लाल रंग के कपड़ो में एकदम क़यामत लग रही थी वो !

मेरा लण्ड तो एकदम सख्त लोहे जैसा हो गया था।

उसने मेरा अण्डरवीयर उतारा और मेरा लण्ड चूसने लगी। मुझे बहुत मजा आ रहा था, मुठ मारने में कभी भी इतना मजा नहीं आया था।

उसका एक हाथ मेरे लंड पर और दूसरा हाथ अपनी चूत पर था। उसकी चूत पानी छोड़ने लगी थी, मैंने उसे उठा कर बिस्तर पर लिटाया और बाकी कपड़े भी निकाल दिए।

उसकी चूत एकदम गुलाबी थी, बस कुछ भूरे बाल थे। देखते ही पता चल रहा था इसमें आज तक लंड तो क्या ऊँगली भी नहीं गई है।

हम दोनों 69 अवस्था में आ गये, मैं उसकी चूत चूस रहा था और वो मेरा लंड !

कुछ देर बाद वो उठी और बोली- अब और मत तड़पाओ ! चोदो मुझे !

मैं भी तैयार था। मैंने उसकी चूत पर लंड रखा और धीरे से एक झटका दिया क्योंकि मैं जानता था कि यह उसका पहली बार है और मेरा भी !

मेरा आठ इन्च का लंड अभी एक तिहाई ही अन्दर गया होगा। फिर मैंने एक जोरदार झटका दिया और इसी के साथ ही कमरा उसकी चीख से गूंज उठा- ऊई माँ आ आ आ आ मर गयी !

मैंने तुरंत उसकी होठ पर अपने होठ रख दिए ताकि उसकी आवाज़ न निकले

और कुछ देर रूक गया थोड़ी देर माँ जब उसका दर्द कम हुआ तो वो प्यार से बोली- आई एम नॉट अ वर्ज़िन एनीमोर (अब मैं कुंवारी नहीं रही)

हमारी चुदाई फिर शुरु हो गई, वो अभी भी कह रही थी- चोदो मुझे ! फ़क मी ! फ़क मी !

हमारी चुदाई 30 मिनट तक चलती रही और मैंने अपना सारा माल उसकी चूत में निकाल दिया।

जब लंड बाहर निकाला तो देखा लंड, बिस्तर और उसकी चूत सब खून से सने हुए थे।

हम बाथरूम में गए, सब कुछ साफ़ किया और साथ साथ ही नहाने लगे।

हम दोनों शावर के नीचे एक दूसरे के जिस्म से खेलने लगे।

मेरा लंड एक बार फिर सलामी देने लगा पर इस बार मेरा मूड उसकी गांड मारने का था।

इसलिए मैं बाथटब में लेट गया और वो मेरे ऊपर लेट गई। मैंने धीरे से लंड उसकी गांड पर लगाया और धीरे धीरे अन्दर सरकाने लगा तो मेरा लंड उसकी गांड फाड़ता चला गया।

दोस्तो, पानी में सेक्स करने का बहुत मजा आता है, एक बार आजमा कर देखना।

इसके बाद हम अक्सर पढ़ाई के बहाने सेक्स करते थे।

[email protected]

प्रकाशित: बुधवार 19 अक्टूबर 2011 9:59 am

 

PDF पीडीएफ प्रारूप में इस कहानी को डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें

नवीनतम कथाएँ