मकान मालकिन और उसकी बेटियाँ

, 1 April 2006


प्रेषक/प्रेषिका : रानी साहिबा

मेरा नाम दीपक है, उम्र ५१ साल, कद ५ फीट ९ इंच, रंग गोरा और बदन कसरती है। मेरी पत्नी का नाम रेखा है, उम्र ४८ साल, रंग गोरा और बदन दुबला पतला है। हमारे दो बेटे हैं, दोनों पुणे में इंजीनयरिंग पढ़ रहे हैं। मैं भी पेशे से इंजीनीयर हूँ।

बात लगभग दो साल पहले की है, जब मेरा ट्रान्सफर आगरा हुआ।

आगरा में जो मकान हमने किराये पर लिया, वह एक होमेओपथिक डॉक्टर का था। डॉक्टर साहब दक्षिण भारतीय हैं। उनका नाम के रामचंद्रन है, उम्र लगभग ५८ साल, कद ५ फीट ६ इंच, रंग सांवला और बदन दुबला पतला है। पहली नज़र में ही लगता है कि शरीफ आदमी हैं। उनके परिवार में उनकी पत्नी रागिनी है। उम्र लगभग ५२ साल, कद ५ फीट ४ इंच, रंग सांवला और बदन भरा पूरा है। नैन-नक्श तीखे होने के कारण इस उम्र में भी अच्छी खासी सेक्सी दिखती हैं। इन दोनों के अलावा इनके परिवार में इनकी तीन बेटियाँ हैं, जिनके नाम नंदिनी, कमलिनी और कुमुदिनी हैं। इनकी उम्र क्रमशः २४, २२ और २० साल है। तीनों का कद लगभग ५ फीट ४ इंच, रंग सांवला और नैन नक्श अपनी माँ की तरह तीखे हैं। सबसे बड़ी नंदिनी अपनी माँ की तरह भरे बदन की तथा कमलिनी और कुमुदिनी अपने पापा की तरह दुबली पतली हैं। तीनों एक ही कॉलेज में पढ़ती हैं।

मुझे इस मकान में रहते हुए तीन महीने हो चुके थे और डॉक्टर साहब व हमारे परिवार के सम्बन्ध घरेलू जैसे हो चुके थे। एक दिन रात को खाना खाने के बाद मैं कंप्यूटर पर अपना काम कर रहा था और मेरी पत्नी अपने कमरे में सोने जा चुकी थी, मुझे ऐसा लगा जैसे मेरे मुख्य द्वार के पास कोई खड़ा है और किसी से बात कर रहा है। मैंने घड़ी पर नज़र डाली तो देखा साढ़े बारह बज रहे थे।

मैं चुपके से उठा, दरवाजे के पास जाकर ध्यान दिया तो पता चला कि डॉक्टर साहेब की मंझली लड़की कमलिनी मोबाइल पर किसी से धीरे धीरे बात कर रही थी। मैंने बातचीत पर ध्यान दिया तो अंदाजा हो गया कि अपने बॉयफ्रेंड विक्की से बात कर रही थी। उसकी बात सुनकर मेरे पैरों के नीचे से ज़मीन निकल गई। वह विक्की से कह रही थी कि तीन दिन ऊपर हो गए हैं और मुझे महीना नहीं हुआ है, बहुत डर लग रहा है।

उसकी बातें सुनकर बहुत अजीब सा लगा कि मैं जिसे सीधी-सादी समझता था, खूब छुपी रुस्तम निकली। एक बात और यह हुई कि उसकी बातें सुनकर मेरा लंड खड़ा हो गया। पिछले तीन साल से मैंने अपनी पत्नी को नहीं चोदा था, क्यूंकि वह ठंडी हो चुकी थी और चुदाई के समय साथ नहीं देती थी। उसको चोदने की अपेक्षा मैं कंप्यूटर पर ब्लू फ़िल्म देखते हुए मुठ मारना ज्यादा पसंद करता था।

खैर, कमलिनी और विक्की की मोबाइल पर बातचीत जारी थी और मेरा लंड भी जोर मारने लगा था।

मैंने कुछ सोचा और धीरे से दरवाजा खोला। मुझे देखते ही कमलिनी सकपका गई और फ़ोन काट दिया। मैंने अपने होठों पर ऊँगली रखकर उसे चुप रहने का इशारा किया और उसका हाथ पकड़ कर अन्दर कमरे में खींच लिया। वह रोने की हालत में थी। मैंने उसके सिर पर हाथ फेरा, उसे अपने सीने से लगाकर सांत्वना दी तो वो कुछ सामान्य हुई।

मेरे पूछने पर उसने बताया कि विक्की उसकी क्लास में पढ़ता है, दोनों अच्छे दोस्त हैं। १५ दिन पहले जब मैं विक्की के घर गई तो वह अकेला था और प्यार करते करते सब हो गया।

मैंने उसे कहा- कोई बात नहीं, गलती किससे नहीं होती ? और कौन सी ऐसी समस्या है जिसका समाधान नहीं है ? अगर मुझ पर विश्वास करो तो तुम्हारा महीना १२ घंटे में हो जाएगा। लगभग रोते रोते उसने पूछा- बताइए अंकल क्या करुँ ?

मैंने कहा- पहली बात ! मैं तुम्हारा दोस्त हूँ, मुझे अंकल नहीं, दीपक कहो। दूसरी बात, तुम्हें कुछ नहीं करना है, जो करना है, मैं करूंगा, तुम शान्ति से देखती जाओ।

मैं उसे दीवान पर लाया और उसका हाथ अपने लंड पर रखकर कहा- तुम्हारा इलाज ये ही करेगा।

उसे अपने सीने से लगाकर उसके होठों पर अपने होंठ रखकर मैंने उसका गाउन धीरे धीरे ऊपर उठाया और चिकनी टांगों पर हाथ फेरते फेरते उसकी पैंटी पर पहुँच गया। धीरे से उसकी पैंटी उतारी, अपना लोअर नीचे खिसकाया, उसे दीवान पर लिटा दिया और उसकी टांगों के बीच आ गया। उसकी चूत पर बाल थे, शायद उसने कभी अपनी झांटें साफ़ नहीं की थीं। झांटें हटाकर उसकी चूत फैलाई तो मेरे पूरे शरीर में करंट दौड़ गया। एक तो मैं तीन साल बाद चूत देख रहा था, दूसरे उसकी चूत क्या गज़ब की थी।

उसकी चूत के गुलाबी होठों पर मैंने जब अपनी जीभ फेरी तो उसे भी करंट लगा। अब मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रखा और दो तीन बार में पूरा लंड उसकी चूत के अन्दर कर दिया और उसका गाउन ऊपर खिसका कर, ब्रा हटाकर उसके मम्मे अपने हाथ में लेकर चूसने लगा। लगभग आधा घंटा चोदने के बाद जब मेरा लंड पानी छोड़ने को हुआ तो मैंने

अपना लंड उसकी चूत से बाहर निकाला और ६९ की पोजीशन में आकर उसके मुंह में डाल दिया और उसकी चूत चाटने लगा। वह मेरा लंड चूस रही थी। जब लंड ने पानी छोड़ा तो

वह घबरा गई और लंड अपने मुंह से बाहर निकाल दिया जिससे सारा वीर्य उसके गाउन पर गिर गया।

हम दोनों ने अपने कपड़े ठीक किए। ढाई बज चुके थे, मैंने उसे अपने सीने से लगाकर किस किया और डोंट वरी ! कह कर विदा कर दिया और वहीं दीवान पर सो गया।

करीब ३ बजे मेरे मोबाइल पर घंटी बजी, देखा तो कमलिनी का नम्बर था। मैंने धीरे से बोला- हेल्लो !

तो उधर से काफ़ी खुश लहजे में बोली- थैंक्यू ! अभी अभी मेरा महीना हो गया।

मैंने उससे कहा- विक्की जैसे छोकरों से सावधान रहना ! अब सो जाओ। शुभ रात्रि !

बाकी कहानी अगली बार लिखूंगा, इंतज़ार करिए..।

प्रकाशित: मंगलवार 16 अगस्त 2011 11:53 pm

[email protected]

Download PDF पीडीएफ प्रारूप में इस कहानी को डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें

comments powered by Disqus