गीता भाभी की चुदाई

, 3 June 2009


प्रेषक : वैभव जोशी

मैं मुंबई के एक उपनगर डोम्बीवली का रहने वाला हूँ, मेरी उम्र २३ साल है। मेरा कद 5’6″, रंग सांवला और बदन कसरत की वजह से अच्छा कसा हुआ है, मेरा लण्ड 8 इंच लम्बा और 3 इंच मोटा है।

यह मेरी पहली और सच्ची कहानी है।

जब मैं बीस साल का था और बी कॉम के आखिरी साल की पढ़ाई कर रहा था।

यह कहानी एक गुजराती भाभी की है जो मेरी ही बिल्डिंग में हमारे नीचे वाली मंजिल पर रहती थी। उसका नाम लीना है वो अपने परिवार के साथ दो साल पहले ही आई थी। उसके परिवार में वो, उसके पति और दो साल का बेटा थे। उसके पति कपड़े के व्यापारी थे। भाभी दिखने में एकदम क़यामत थी उनकी उम्र तब 27 -28 साल की होगी। वो बदनसे एकदम भरी हुई थी, उनकी फीगर 38-28-38 की होगी और जब वो चलती थी तब उनके दोनों कूल्हे ऐसे हिलते थे कि देखकर तो कोई भी अपने होश खो बैठे।

उनके परिवार और मेरे परिवार में अच्छा मेलजोल था और हमारे परिवार एक साथ कई बार खाना खाने और पिकनिक पर जा चुके थे।

मैं तो मन ही मन उन्हें चोदने के सपने देखता रहता था पर मुझे कोई मौका नहीं मिल पा रहा था। पर एक दिन भगवान ने मेरी सुन ली और भाभी के पति को बिज़नस के सिलसिले में आठ दिन के लिए गुजरात जाना पड़ा।

जाने से पहले दिन भाभी के पति ने मेरे पिताजी को पूछा- अगर आपको कोई दिक्कत न हो तो वैभव को मेरे घर सोने के लिए भेज दें !

अच्छे सम्बन्ध होने के कारण पिताजी ने भी हाँ कर दी। जब मुझे यह बात पता चली तो मैं मन ही मन भाभी को चोदने के सपने देखने लगा।

पहले दिन जब मैं भाभी के घर सोने गया तब भाभी खाना खा रही थी और उनका बेटा सो चुका था। भाभी ने गुलाबी रंग का नाइट गाऊन पहन रखा था, क्या मस्त दिख रही थी वो ! गाऊन में उनके चूतड़ और चूचे इतने अच्छे दिख रहे थे कि देखते ही मेरे लौड़े ने सलामी दे दी।

पर मैं चुपचाप जाकर भाभी के सामने वाली कुर्सी पर बैठ गया।

भाभी ने पूछा- क्यों वैभव? खाना खा लिया?

तो मैंने कहा- जी खा लिया !

फ़िर इधर उधर की बातें करके हम सो गए। भाभी अपने बेडरूम में और मैं हाल में सो गया। उस रात मैंने भाभी को सोचकर मुठ मार ली और कुछ नहीं कर सका।

दूसरी रात भी कुछ नहीं हुआ पर मैंने तो मन में ठान ली थी कि मैं भाभी को चोद कर रहूँगा।

जब तीसरे दिन मैं भाभी के घर सोने गया तब मैंने पहले से ही एक ब्लू फिल्म की डीवीडी अपने एक दोस्त से ले ली थी। जब मैं उनके घर गया तब भाभी खाना खा चुकी थी और अपने बालों में नारीयल का तेल लगा रही थी।

मुझे देखा तो बोली- आओ वैभव, खाना हो गया?

तो मैंने कहा- जी भाभी !

फ़िर भाभी ने कहा- आओ मैं तुम्हारे बालों में भी थोड़ा तेल लगाकर मसाज़ कर देती हूँ।

तो मैंने भी हाँ कर दी, इसी बहाने से भाभी को छूने का मौका मिल गया।

भाभी मेरे बालों में तेल लगा रही थी तो मैंने भी उन्हें तीन चार बार छू लिया। इस वजह से मेरे छोटे नवाब खड़े हो गए और बरमूडा पहने होने की वजह से उसका उभार दिखने लगा था।

एक दो बार भाभी की नजर भी उस पर पड़ गई। फ़िर भाभी ने कहा- अब चाहो तो तुम सो जाओ !

मैंने कहा- नहीं भाभी, कल रविवार है तो मैं थोड़ी देर टीवी देखूँगा। फ़िर सो जाऊँगा। आप सो जाओ।

भाभी बेडरूम में सोने चली गई और मैंने टीवी चला लिया। आधे घंटे के बाद जब मैंने देखा कि भाभी गहरी नींद में सो रही हैं मैंने ब्लू फिल्म की डीवीडी प्लयेर में डालकर चालू कर दी। उसमें अच्छा दृश्य चल रहा था और मैं भी अपना लण्ड निकाल कर हिला रहा था।

अचानक मुझे कुछ हलचल महसूस हुई तो मैंने पीछे मुड़कर देखा कि भाभी खड़ी हैं और वो भी ब्लू फिल्म देख रही हैं।

तो मैं डर गया और टीवी बन्द कर दिया और भाभी के सामने गर्दन झुकाए खड़ा हो गया।

भाभी ने पूछा- वैभव, यह क्या देख रहे थे?

तो मैंने कहा- कुछ नहीं भाभी, मेरे एक दोस्त ने एक पिक्चर की डीवीडी मुझे दी थी, मुझे नहीं मालूम था कि इसमें यह सब है।

इस पर भाभी सिर्फ मुस्कुराई और कहा- झूठ मत बोलो वैभव ! जब मैं तुम्हारे बालों में तेल लगा रही थी तो मैंने भी देखा था तुम्हारे बरमूडा का तम्बू हो गया है।

और फ़िर पूछा- यह सब सिर्फ देखते ही हो या कुछ किया भी है?

तो मैंने झूठ ही कहा- नहीं भाभी, मैंने कभी ऐसा नहीं किया।

असल में मैं तो कई बार चोद चुका था।

भाभी ने कहा- चलो मेरे साथ मेरे कमरे में ! मैं तुझे आज सब सिखाती हूँ।

फ़िर क्या था ! मुझे तो इसी का इंतजार था ! मेरी तमन्ना आज पूरी होने वाली थी। मैं भाभी के पीछे उनके बेडरूम में चला गया।

जैसे ही भाभी बेड पर लेटी, मैं उन पर चढ़ गया और उनके होंटों को चूसना चालू कर दिया।

भाभी की सांसें तेज़ हो रही थी और मैं एक हाथ से उनके चूचों को मसल रहा था। उन्होंने तो ब्रा भी नहीं पहनी थी।

भाभी ने कहा- वैभव, मेरे संतरों की जरा तेल से मालिश कर दो !

तो मैंने ड्रेससिंग टेबल से तेल की शीशी ली और उनके बड़े बड़े दो संतरे गाऊन से आज़ाद कर दिए।

क्या क़यामत के गोरे और बड़े थे उनके चूचे ! और चुचूक तो एकदम गुलाबी और मोटे हो गए थे।

मैंने थोड़ा तेल उन पर डाला और जोर जोर से मसलने लगा। भाभी भी अब गर्म हो गई थी और मेरे लण्ड को अपने हाथ से सहला रही थी।

फ़िर भाभी ने कहा- चूस लो मेरे इन आमों को !

और मैं भी एक बच्चे की तरह उनके चुचूक चूसने लगा। मैं एक हाथ से उनका दूसरा चुचूक निचोड़ रहा था और दूसरे हाथ से उनकी पैंटी मैंने उतार दी और उनकी चूत में ऊँगली करने लगा।

अब भाभी आह्ह्हह्हाह्ह आह्ह्हा ओहोहोह स्स्सस जैसे जोर जोर से सिसकारियाँ भरने लगी। मैंने भी अपने पूरे कपड़े उतार दिए और पूरा नंगा होकर उनसे लिपट गया। वो मेरे लंड को हाथ में पकड़ कर जोर जोर से हिलाने लगी।

फ़िर मैं भाभी पर उल्टा चढ़ गया और हम 69 की अवस्था में आ गए, मैं भाभी की चूत चाटने लगा तो भाभी की सिसकारियाँ और बढ़ गई, भाभी चिल्लाने लगी- और जोर से चाटो वैभव ! आह्हह्हाह्ह आह्ह्हा ओहोहोहोह स्सस बहुत मजा आ रहा है वैभव ! मेरे राजा और जोर से चूसो मेरी चूत को।

फ़िर भाभी मेरे लण्ड को जीभ से चाटने लगी और फ़िर लोलीपोप की तरह उसे चूसने और अन्दर-बाहर करने लगी। मैं तो मानो तब स्वर्ग में था।

मैं भी जोश में आ गया था और उनकी चूत को जोर जोर से चूसने लगा था, बीच बीच में उनके दाने को भी काट रहा था। अब भाभी से रहा नहीं जा रहा था और वो जोर जोर से अपने चूतड़ हिला रही थी और बोल रही थी- कम ऑन वैभव, फक मी ! ओ या …ओ य़ा….ओ यहा…..ओह होहोह स्सस्सस्सस ! कम ओन वैभव ! और जोर से चाटो इसे ! आःह्हा ऊऊह्ह्हू स्सस्स

और मेरे लण्ड को जोर जोर से चूस रही थी।

तब मैंने कहा- ओ ओ ओ भाभी, मैं झड़ने वाला हूँ।

तो भाभी बोली- मैं भी झड़ने वाली हूँ !

और हम दोनों एक दूसरे के मुँह में झड़ गए। भाभी ने मेरा सारा माल निगल लिया और मैं भी भाभी का सारा रस चाट गया।

थोड़ी देर हम ऐसे ही एक दूसरे पर लेटे रहे। दस मिनट बाद भाभी फिर से मेरा लण्ड चूसने लगी और मैं भाभी के चूचे सहलाने लगा।

हम फ़िर से गर्म हो गए, मेरा लण्ड तन कर आठ इंच का हो गया।

भाभी ने कहा- वैभव, अब रहा नहीं जा रहा ! जल्दी से मेरी चूत में अपना लण्ड डालो।

मैंने अपने लण्ड का सुपारा उसकी चूत के छेद पर रख दिया और एक जोर का झटका मारा तो लंड तीन इंच तक ही अंदर गया था कि भाभी जोर से चिल्लाई- हाय मार डाला मुझे ! वैभव, अपना लण्ड बाहर निकालो ! मुझे बहुत दर्द हो रहा है, मैं मर जाऊँगी।

तो मैं भी डर गया, अपना लौड़ा बाहर निकल लिया और भाभी से कहा- तुम क्या पहली बार चुदवा रही हो जो तुम्हें दर्द हो रहा है?

भाभी बोली- अरे नहीं, मैं तो मेरे पति से चुदवाती हूँ पर उनका इतना बड़ा और मोटा नहीं है।

फ़िर मैंने थोड़ा सा नारीयल तेल उसकी चूत में डाल दिया और ऊँगली से अन्दर लगा दिया और थोड़ा अपने लण्ड पर भी मल लिया।

उसकी टांगों को अच्छी तरह फैला कर अपना लण्ड उसकी चूत पर रख दिया और एक जोर का झटका लगाया तो मेरा लंड चार इंच तक अन्दर घुस गया और भाभी जोर जोर से चिल्लाने लगी- ओ नो वैभव ! बाहर निकालो ! जल्दी ! मुझे दर्द हो रहा है।

थोड़ी देर हम ऐसे ही पड़े रहे। जब पाँच मिनट बाद उसका दर्द कुछ कम हुआ तो मैंने और एक झटका लगाया तो मेरा पूरा का पूरा लंड अन्दर चला गया। भाभी के चिल्लाने से पहले ही मैंने उसके होंटों पर अपने होंट रख दिये।

जब धीरे धीरे उसका दर्द कम हुआ तो उसे भी मजा आने लगा और वो अपने चूतड़ उठा उठा कर मेरा साथ देने लगी, मैंने भी धक्के लगाना चालू कर दिए।

अब उसे भी मजा आने लगा था तो मैंने अपने गति बढ़ा दी। फ़िर से भाभी आहें भरने लगी और सिसकारियाँ तेज़ होने लगी, वो बोल रही थी- ओ वैभव ! कम ओन…फक मी बास्टर्ड…ऊऊह्ह्ह्ह…. आआअ……ह्ह्ह…. अहहहः ….. स्स्स्स्स् ……मादरचोद…चोद दे मुझे !

और गालियाँ सुनते ही मैं पूरे जोश में आ गया और जोर जोर से चोदने लगा। अब मैं भी चालू हो गया, मैं बोला- ले मेरी रण्डी… ले मेरा लवड़ा खा जा… ले और जोर से ले… ले तेरे माँ की चूत…

और मैंने अपनी स्पीड और बढ़ा दी, पूरे कमरे में सिर्फ गालियों की और फक फक फक और फच फच की आवाजें आ रही थी।

भाभी ने अपने दोनों टांगों से मुझे कस कर पकड़ रखा था और भाभी पूरे जोश में थी, बोल रही थी- भेनचोद और जोर से चोद मुझे… फाड़ दे मेरी चूत को… आआअ….. स्स्सस अहहः……अहहहः …..ओहोहोह….. ले… ले माँ के लवडे… भोसड़ा बना दे मेरी चूत को… आज से गीता तुम्हारी है… जब चाहे इसे चोदना तू।

अब भाभी चरमसीमा पर थी, वो अपने चूतड़ जोर जोर से हिला रही थी, अब भाभी बोली- वैभव, पूरी ताकत से चोद मुझे ! मैं आने वाली हूँ !

मैं भी पूरी तेजी से उसे चोदे जा रहा था। भाभी का शरीर अब अकड़ने लगा था, उसने मुझे कस कर पकड़ा और ह्ह्ह्हह…. अह्हहहः …….ह्ह्ह…. अह्हहः ……स्सस्सस करते हुवे वो झड़ गई।

पर मैं अब तक नहीं झड़ा था, अब मैं कहाँ रुकने वाला था, मैं शॉट पे शॉट मारता गया और लगभग दस मिनट के बाद मैं झड़ने वाला था तो भाभी से कहा- मैं आ रहा हूँ, मैं अपना लवड़ा बाहर निकाल लूँ?

तो भाभी बोली- नहीं पूरा माल अंदर ही डाल दे ! मैंने गोली ले ली है !

फ़िर क्या था, मैंने ऐसे जोर के धक्के लगाये कि भाभी भी चरमरा उठी और उसकी चूत मैंने अपने वीर्य से भर दी। फ़िर थोड़ी देर तक मैं उस पर ही लेटा रहा।

बाद में हमने बाथरूम जाकर एक दूसरे को साफ किया और फिर से बिस्तर पर आ गए।

उस रात मैंने भाभी को दो बार और चोदा, एक बार घोड़ी बना कर और एक बार उनकी गाण्ड भी मारी।

यह कहानी मैं बाद में बताऊँगा। फ़िर दो सालों तक मैं भाभी को इसी तरह चोदता रहा, उसके बाद भाभी का परीवार यहाँ से गुजरात में शिफ्ट हो गया।

अब हम एक दूसरे को नहीं मिल पाते पर आज भी भाभी की बहुत याद आती है।

दोस्तो, यह थी मेरी कहानी ! आपको कैसी लगी मुझे ज़रूर बताना। मेरा ईमेल है :

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