बेवफ़ा शौहर दगाबाज सहेली-1

(Bewafa Shauhar Dagabaz Saheli-1)

मेरा नाम फराह परवीन है, मैं अहमदाबाद में रहती हूँ। अन्तर्वासना पर मेरी यह पहली कहानी है। मुझे पता नहीं कि यहाँ सारी कहानियाँ वास्तव में सच्ची हैं या कल्पना मात्र लेकिन जो भी हो जब से नगमा ने मुझे अन्तर्वासना के बारे में बताया, तब से मैं लगभग दो कहानी यहाँ रोज पढ़ती हूँ। यहाँ कहानियाँ पढ़कर मैं काफी रोमांचित महसूस करती हूँ और अच्छा टाइमपास भी हो जाता है।

आज मैं आपको अपनी सच्ची कहानी बताने जा रही हूँ और इसमें कल्पना का लेशमात्र भी नहीं है। सेक्स के मामले में मैं काफी फ्रैंक हूँ लेकिन एक हद तक। यह अल्लाह का दिया एक खूबसूरत तोहफा है। प्रेम ही विश्व में केवल एक ऐसी चीज है जो हमें जीवित रहने के लिए उत्साह प्रदान करती है।

दो साल पहले मेरा निकाह हुआ और मैं यहाँ आ गई। मेरे शौहर किराने की एक दुकान चलाते हैं और मैं और मेरी एक सहेली नगमा हम दोनों एक बुटीक चलाते हैं।
नगमा काफी अच्छी लड़की है बस उसमें एक ही कमी है वह बोलती बहुत है और कहीं भी कुछ भी बोल देती है। खैर वह मुझे बहुत पसंद है और हम दोनों बहनों की तरह रहते हैं।

मेरे शौहर मुझे बहुत प्यार करते हैं और हम अपनी जिन्दगी में बहुत खुश हैं। बस कभी-कभी पैसों की बहुत तंगी आ जाती है पर जहाँ मुहब्बत हो, वहाँ ये सब समस्याएँ बहुत छोटी हैं। मुझे फेसबुक चलाने और ऑनलाइन फ्रेंड बनाने का बहुत शौक है इसलिए अधिकतर टाइम फेसबुक पर बिताती हूँ।

मेरी लम्बाई 5 फीट 3 इंच है, मेरा फिगर 32-28-32 है। मुझे सजना संवरना काफी अच्छा लगता है और इसीलिए मुहल्ले के बहुत सारे लड़के मुझे घूरते रहते हैं।
उन्हीं में से एक लड़का था आसिफ… कई बार इनकी अनुपस्थिति में मुझे दुकान पर बैठना पड़ता है, खासकर जब वे नमाज के लिए जाते हैं, तब वह दुकान पर बहुत बार आता है और सिगरेट वगैरा खरीद के चला जाता है।
उसकी लम्बाई लगभग 6 फीट है और साँवले रंग का औसतन शरीर है। मुझे पता था कि वह भी मुझसे फ्रेंडशिप करना चाहता है पर वह बोलता बहुत कम है पर उसकी आँखें बहुत कुछ बयाँ कर देती हैं।

दो माह पूर्व में अब्बू का इंतकाल हो गया और मुझे घर जाना पड़ा। व्यस्तता के चलते मेरे शौहर मेरे साथ नहीं आ पाए।
मैं तीन दिन घर पर रुकी और फिर मुझे बुटीक के लिए वापस आना पड़ा। अब्बू के इंतकाल की वजह से मैं काफी परेशान थी वह मुझे बहुत प्यार करते थे।

दोपहर में लगभग एक बजे मैं घर पहुँची दुकान बंद थी तो मैंने सोचा शायद सिराज मार्किट गये होंगे तो मैंने सोचा नगमा भी अकेली होगी तो इससे अच्छा बुटीक चली जाती हूँ और मैं बुटीक चली गई।

मेरे घर से बुटीक तक जाने में लगभग 10 मिनट लगते हैं। मैं सीधे अंदर जाने वाली थी पर मैंने अंदर से आ रही कुछ आवाज सुनी और मैं रुक गई। मेरे अंदर का जासूस सक्रिय हो गया था, मैं सीढ़ी से उतरकर नीचे आई और बाढ़ पार किया और बैक साइड की खिड़की पर पहुँची और आँख टिकाकर अंदर देखा तो मैं सन्न रह गई।

मेरे शौहर की बेवफाई

नगमा नीचे लेटी हुई थी और मेरे शौहर उसके ऊपर चढ़े हुए थे। क्षण भर में मेरे दिल से शौहर के लिए सारी इज्जत निकल गई। मुझे बहुत गुस्सा आया पर मैंने खुद पर काबू किया और चुपचाप देखने लगी।

मेरे शौहर खड़े हुए उनका 6 इंच का लिंग पूरा तना हुआ था। उन्होंने नगमा को खड़ा किया और उसे पीठ के बल झुका दिया और उसके नितम्बों पर एक जोर की चपत मारी तो नगमा कराह उठी। उन्होंने लिंग पर थोडा थूक लगाया और पीछे से एक ही झटके में नगमा की योनि में प्रवेश करा दिया।
नगमा की सिसकारी निकल गई और हल्के हल्के अपने नितम्बों को आगे पीछे हिलाने लगी। मुझे नगमा पर काफी गुस्सा आ रहा था पर उस वक्त वह दृश्य देख कर मैं भी कामुक होने लगी।

मेरी प्यास भी दो हफ्ते से नहीं बुझी थी। मेरा बयां हाथ अपने आप ही मेरी साड़ी के उपर से मेरी योनि को सहलाने लगा।

उधर मेरे शौहर जोर जोर से झटके मार रहे थे और नगमा की हल्की सिसकारियाँ उह उह आह आह ऊई आ आ आह पूरे कमरे में गूंज रही थी… मैं सेक्स में पूरी तरह खो चुकी थी।

जहाँ पर मैं खड़ी थी वहाँ से मुझे सामने मेरे शौहर के नितम्ब दिखाई दे रहे थे वह पूरी ताकत के साथ नगमा के नितम्बों के साथ टकरा रहे थे। मेरी योनि ने रस छोड़ना प्रारम्भ कर दिया और मेरी सांसे तेज होने लगी तभी मैंने अपनी पीछे चबूतरे पर आहट महसूस की, मैंने हाथ योनि से हटाया और झट से पीछे देखा।
वहाँ आसिफ खड़ा था और मुस्कुरा रहा था। मुझे कुछ बोलने को नहीं आया पर उसने तुरंत बोला- भाभीजान, जरा दुकान पर चलियेगा कुछ सामान चाहिए था।
वह फिर मुस्कुराया।

‘ह्म्म्म…’ मैंने सहमति में सिर हिलाया और हल्के से फिर अंदर देखा, मेरे शौहर नगमा के गुदाद्वार पर वेसलीन लगा रहे थे।
मुझे अपने गुदा द्वार पर हल्की सी टीस महसूस हुई और मैंने अपने नितम्ब सिकोड़ लिए।

मैं तेजी से चबूतरे से होती हुई रोड पर आई, आसिफ मेरे पीछे पीछे चल रहा था।

मैं दुकान पर पहुँची, दुकान खोली, मुझे काफी उत्तेजना हो रही थी कि कब आसिफ जाए और मैं ऊँगली करके अपनी प्यास बुझाऊँ।

‘एक गोल्ड फ्लैक देना।’ आसिफ धीरे से बोला।

‘और…?’ मैंने डिब्बी से सिगरेट निकालते हुए पूछा।

‘जो आप दे सको!’ आसिफ कातिल मुस्करहट से मुस्कुराया।
मैं उसका व्यंग्य समझ चुकी थी, उसे सब कुछ पता था।
मैंने एक बार सोचा कि क्यों ना इससे अपनी प्यास बुझा लूँ।
मेरे शौहर की बेवफाई ने मुझे पागल कर दिया था, मेरे सर पर गुस्सा और सेक्स एक साथ सवार थे।

जवाब में मैं हल्के से मुस्कुराई।

मेरे अंदर का डर और समझ सब गायब हो चुके थे, मैं बस सेक्स करना चाहती थी… जी भर कर सेक्स, मुझे मेरी योनि में गर्माहट महसूस हो रही थी ऐसा लग रहा था जैसे हजारों चीटियाँ मेरी योनि में काट रही हों।

आसिफ मेरी मनोस्थिति समझ चुका था। वह काउन्टर से अंदर आया और मुझे लगभग पकड़ते हुए बोला- भाभीजान, ऐसा हो जाता है जोश में।
कहानी जारी रहेगी।

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