^ Back to Top




कोई ना कोई तो आएगा

कभी ना कभी, कहीं ना कहीं,

कोई ना कोई तो आएगा,

कभी ना कभी, कहीं ना कहीं,

कोई ना कोई तो आएगा,

अपना मुझे बनाएगा,

दिल में मुझे बसाएगा !

कभी ना कभी, कहीं ना कहीं,

कोई ना कोई तो आएगा।

कब से तन्हा घूम रहा हूँ,

दुनिया के वीराने में,

खाली जाम लिए बैठा हूँ,

कब से इस मैखाने में,

कोई तो होगा मेरा साकी,

कोई तो प्यास बुझाएगा !

कभी ना कभी, कहीं ना कहीं,

कोई ना कोई तो आएगा।

किसी ने मेरा दिल ना देखा,

ना दिल का पैगाम सुना,

मुझको बस आवारा समझा,

जिसने मेरा नाम सुना,

अब तक तो सबने ठुकराया,

कोई तो पास बिठाएगा।

कभी ना कभी, कहीं ना कहीं,

कोई ना कोई, तो आएगा।

कभी तो देगा सन्नाटे में,

प्यार भरी आवाज़ कोई,

कौन ये जाने, कब मिल जाए,

रास्ते में हमराज़ कोई,

मेरे दिल का दर्द समझकर,

दो आँसू तो बहाएगा।

कभी ना कभी, कहीं ना कहीं,

कोई ना कोई तो आएगा,

अपना मुझे बनाएगा,

दिल में मुझे बसाएगा।

कभी ना कभी, कहीं ना कहीं,

कोई ना कोई तो आएगा,

कोई ना कोई तो आएगा।

 

नवीनतम कथाएँ