परीक्षा के बाद

, 11 April 2008


प्रेषक : राज

अन्तर्वासना के सभी पाठकों को मेरा प्रणाम !

सबसे पहले मैं अपने बारे में बता दूँ : मेरा नाम राज है, मैं गुडगाँव में रहता हूँ। वैसे तो मैं मध्यप्रदेश से हूँ पर गुडगाँव में जॉब करता हूँ सेक्स मेरा शौक है। मेरा मानना है कि आदमी सेक्स के लिए जीता है और सेक्स के लिए मरता है, मतलब सेक्स ही जीवन है ! मेरा मानना है कि अगर अपने जीवन काल में किसी गांडू ने कम से कम 50 लौंडियों के साथ सेक्स न किया हो तो उसे पैदा ही नहीं होना चाहिए था !

बहुत हो गई ये बातें !

मेरे लंड का आकार बहुत बड़ा तो नहीं पर ठीक-ठाक है साढ़े छः इंच, मोटाई देख कर तो अच्छी अच्छी लौंडियों की गांड फट जाये ! मालिश तो करता हूँ !

मैं आज आपको अपनी एक सच्ची घटना बताने जा रहा हूँ। बात कुछ दिन पहले की ही है।

मैं अभी एक प्राइवेट कंपनी में काम करता हूँ पर सरकारी जॉब की तैयारी भी कर रहा हूँ। मैंने सेल(स्टील अथोरिटी ऑफ़ इंडिया) का फॉर्म भरा था और उसकी परीक्षा 12 दिसम्बर 2010 को नॉएडा के एवरग्रीन पब्लिक स्कूल में 2:30 बजे से थी और 2 बजे रिपोर्टिंग टाइम था !

मैं परीक्षा केन्द्र पर ठीक दो बजे पहुँच गया। मेरा रोल नम्बर दूसरी मंजिल पर कमरा नंबर 203 में था। मैं कमरा खोजते हुए 203 नंबर में घुसने लगा। तभी मैडम बाहर आ रही थी, हम दोनों एक दूसरे से टकरा गये। टकराते ही मेरा मुँह उसके माथे को छू गया और उसके दोनों स्तन मेरे सीने से टकराए।

वो हटी और मुझे सॉरी बोला।

तो मैं उससे हंसते हुए बोला- कोई बात नहीं मैम ! ऐसा तो होता ही रहता है, गलती तो मेरी ही थी।यह सुनते ही उसने बोला- नहीं नहीं ! गलती मेरी है, मैंने ही ध्यान नहीं दिया !

फिर उसने कहा- ओके, जाओ, अपने सीट पर बैठ जाओ।

मैं गया और अपनी सीट पर बैठ गया और फिर से मैडम की तरफ देखने लगा। वो भी मुझे ही देख रही थी। मैं हंस दिया, वो भी मुस्कुराने लगी। चूंकि मैं आधे घंटे पहले आ गया था, मेरे पास समय बहुत था। तो मैं बस मैम के ख्यालों में खो गया और उसे देखता ही रहा। उसने भी मेरी तरफ देखना चालू कर दिया था, शायद उसे भी यह लग गया था कि मैं उसे लाइन मार रहा हूँ।

फिर उस आधे घंटे में उसने मुझसे कम से कम 5-6 बार किसी न किसी बहाने से बात की। और आखिर में तो मैं उसके वक्ष को देख रहा था कि उसने मुझसे पूछा- क्या देख रहे हो?

मैंने जवाब दिया- हिमालय की चोटी के बारे में सोच रहा था !

उसने फिर मुस्कुराते हुए मेरे कंधे पर हाथ रखा और चली गई। मैं समझ गया कि मेरा काम हो रहा है। मैं फिर उसे देखने लगा। कसम से क्या लग रही थी- 36-26- 24 का आकार होगा। मैं तो उसके सपने ही देखने लग गया। थोड़ी देर में परीक्षा शुरु हो गई और जब 5 बजे परीक्षा समाप्त हुई तो सभी निकलने लगे पर मैं वहीं बैठा रहा और अपना मोबाइल चालू करने लगा।

इतने में सारे लोग निकल चुके थे, केवल मैं और वो क्लास में थे।

उसने मेरी तरफ देखा और पूछा- कैसा हुआ टेस्ट?

मैंने कहा- टेस्ट का क्या है होते ही रहता है !

और मैं उससे उसके बारे पूछने लगा- कहा रहती हो? घर में और कौन कौन है?

यही सब !

तब तक उसका काम भी हो गया था पर फिर भी मैं बात किये जा रहा था तो उसने बोला- तुम गेट पर मेरा इंतज़ार करो, मैं दस मिनट में आती हूँ।

मैंने ओके बोला और गेट पर चला गया।

वो ठीक दस मिनट में आ गई फिर उसने खुल कर बात करना चालू किया। उसने बताया कि उसका घर पास में ही है और वो अकेली रहती है, उसके घर वाले कानपुर में रहते हैं।

फिर उसने मुझे बोला- चलो, तुम मेरे कमरे पर चलो।

मैंने पहले तो मना किया पर मन तो मेरा भी था ही ! हम उसके घर गये।

कमरा छोटा ही था एक बेड, एक कुर्सी और रसोई थी।

उसने मुझे बैठने को कहा, वो भी मेरे साथ बैठ गई। हमने बातें की। फिर सेक्स की बातें चालू हो गई।

उसने मुझसे पूछा- चाय पियोगे?

मैंने हाँ कर दी। वो रसोई में गई और चाय बनाने लगी। मैं उसके साथ रसोई में हो लिया और उसे पीछे से पकड़ लिया। वो पहले तो थोड़ा सहम गई पर फिर उसने कुछ नहीं बोला।

थोड़ी देर के बाद उसने बोला- क्या कर रहे हो?

मैंने कहा- वही, वो हम क्लास में नहीं कर पाए थे !

फिर वो चुप हो गई।

मैं वैसे ही उसे पीछे से पकड़े हुए झूल रहा था। फिर धीरे से अपने हाथ उसके वक्ष पर ले गया। थोड़ी के बाद वो गर्म होने लगी।

चाय तैयार हो चुकी थी फिर दोनों ने चाय पी। पर चाय पीने कामन किसका था, हम एक दूसरे को हाथ लगा रहे थे।

जल्दी से हमने चाय ख़त्म की, फिर उसने कहा- मैं कपड़े बदल कर आती हूँ।

और बाथरूम में चली गई पर उसने दरवाजा बंद नहीं किया। मैं समझ गया कि यह इशारा है।

मैं भी उठा और बाथरूम में चला गया और जाते ही मैंने उसे चूमना चालू कर दिया। उसने मुझे चूमना चालू कर दिया।

मैंने उसे अपनी गोद में उठाया और वापस बेडरूम में ले आया। अभी उसने पूरे कपड़े पहने हुए थे! मैंने उसे बेड पर पटक दिया, उस पर चढ़ गया और चूमने लगा।

देखते ही देखते वो गर्म हो गई। मैंने उसके होंठों को उसने मेरे होंठों खूब चूसा। चूसते हुए ही मैंने अपने हाथ उसके स्तन पर रख दिया और उसे दबाने लगा।

वो सी सी सी स स स स की आवाज़े निकलने लगी।

मैंने कम से कम 15 मिनट तक उसके स्तन दबाये और उसको होंठों को चूसता रहा। वो एकदम गर्म हो चली थी। अभी तक मैं उसे ऊपर से ही दबा रहा था। फिर मैंने उसके कुरते की चेन खोल करनीचे सरका दिया और उसे देखने लगा।

उसने अपने आप को दोनों हाथों से ढ़क लिया, पर कब तक ?

मैंने उसे दबाना चालू किया फिर धीरे से उसकी ब्रा का हुक खोल कर ब्रा हटा दी। उसका तन उस वक्त देखने लायक था।

मैं फिर उसे चूमने और दबाने लगा। इतने में वो मेरे कपड़े उतारने लगी और उसने मेरा शर्ट अलग कर दिया अब हम दोनों ऊपर से नंगे थे। मैंने भी देर न करते हुए जल्दी उसकी सलवार के नाड़े को खींच कर सलवार नीचे कर दी।

अब वो मेरे सामने सिर्फ़ पैंटी में थी। क्या लग रही थी !

फिर मैंने उसे चूमते हुए एक हाथ उसकी चूत पर पैंटी के ऊपर से ही लगाया, उसकी पैंटी गीली हो चुकी थी। इतने में उसने मेरी जींस को उतार फेंका। मेरा लंड भी खड़ा था, वो मेरे लंड की ओर देखने लगी, और मैं उसकी चूत सहला रहा था।

मैंने उसकी पैंटी भी उतार फेंकी और उसकी चूत को चाटने लगा। क्या स्वाद था उसके रस का !

फिर मैंने उसके स्तन दबाना चालू कर दिया। थोड़ी देर चूचियाँ दबाने के बाद मैंने फ़िर से उसकी चूत चाटना चालू कर दिया। वो भी गांड उठा-उठा कर चूत चटवाने लगी। दसेक मिनट में वो झड़ गई। मैंने उसका सारा रस चाट लिया।

वो थोड़ी देर तक लस्त पड़ी रही फिर उसने मेरे लंड को चूसना चालू किया तो मेरे लंड की मोटाई से उसका पूरा मुँह भर गया। वो जैसे मेरा लंड चूस रही थी उससे लग रहा था कि उसने पहले भी कई बार लण्ड चूसा होगा।

थोड़ी देर में मैं भी झड़ गया, उसने मेरा आधा रस पिया और आधा अपनी चूत पर लगा लिया।

फिर थोड़ी में हम दोनों 69 में आकर फिर एक दूसरे को चूसने लगे। मैंने उंगली करना चालू कर दिया। वो सीत्कारियाँ भरने लगी, मैंने और तेज़ उंगली करना चालू कर दिया और उसके स्तन दबाने लगा।

वो एकदम मदहोश हो गई और उसने मेरा लंड पकड़ कर अपनी चूत पर रख लिया।

मैं समझ गया कि अब यह चुदने को तड़प रही है पर मैंने उसे और तड़पाया और फिर उसे जोर जोर से उंगली करने लगा। वो एकदम बेहाल हो चुकी थी। उसने फिर मेरा लंड पकड़ा और अपनी गांड उठा के घुसवाने लगी। पर यह इतना आसान थोड़े ही था। फिर मैंने भी उसका साथ दिया, मैंने उसके दोनों पैर मोड़ कर फैला दिए अब उसकी चूत एकदम फ़ूल चुकी थी और गुलाबी दिख रही थी। मैंने अपना लौड़ा उसकी चूत पर रखा और रगड़ने लगा।

वो बोलने लगी- अब और मत तड़पाओ ! अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है !

मैं बोला- रानी, यह तड़प बुझाने के लिए ही तो कर रहा हूँ !

फिर मैंने देर न करते हुए अपने लंड को उसकी चूत के पानी से थोड़ा गीला किया और उसकी चूत पर रख कर रगड़ने लगा।

उसने सोचा कि मैं फिर उसे तड़पा रहा हूँ पर मैंने एक बार जोर का झटका लगा कर अन्दर डाल दिया।

वो जोर से चीख पड़ी।

मैंने उसके मुँह पर अपना मुँह रख दिया ताकि उसक आवाज़ दब जाये, और उसके बोबे दबाने लगा। अभी तो मेरे लंड का अग्र भाग ही बस अन्दर गया था। थोड़ी देर बाद जब उसका दर्द कम होने लगा तो उसने बोला- तुम्हारा बहुत ही मोटा है, बहुत दर्द दे रहा है।

मैंने बोला- मोटा से तो मज़ा भी आयेगा, पहले थोड़ा दर्द होगा पर बाद में मज़ा आयेगा।

फिर मैंने एक बार और जोर लगा कर धक्का मारा।

वो फिर चिल्ला उठी।

फिर मैंने उससे पूछा- इससे पहले कब चुदी थी?

उसने बताया- 8-9 महीने पहले !

शायद इसलिए उसे इतना दर्द हो रहा था। उसकी चूत कस चुकी थी। इस बीच मैंने उसके बोबे दबाने और चूमने का कार्यक्रम जारी रखा। मैंने तीसरा धक्का थोड़ा जोर लगा कर मारा और मेरा पूरा लंड उसकी चूत समां गया।

वो चिल्लाने लगी- मैं मर जाऊँगी ……

मैं थोड़ी देर रुक गया और बोला- अब दर्द नहीं होगा ! जो होना था वो गया !

तो वो बोली- बहुत दर्द हो रहा है !

तो मैं बोला- बहुत दर्द हो रहा है तो मैं निकाल लेता हूँ !

उसने तुरंत बोला- नहीं ! मैं दर्द बर्दाश्त कर लूंगी पर तुम निकालना मत !

और मैं उसकी चूचियों को जोर-जोर से दबाने लगा। अब मैं धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगा। अब उसका दर्द भी कम होने लगा था।

थोड़ी देर बाद जब उसका दर्द कम हो गया तो मैंने थोड़ी तेज़ी बढ़ाई और वो भी गांड उठा-उठा कर मेरा साथ देने लगी।

7-8 मिनट में ही उसने बोला- मैं झड़ रही हूँ !

यह सुनते ही मैंने अपनी गति और बढ़ा दी और वो झड़ने लगी। पर मैं अभी भी जस का तस था और उसे चोदे जा रहा था।मैं उसे थोड़ी वैसे ही चोदता रहा, फिर उसके होंठों जोर-जोर से चूसने लगा। थोड़ी ही देर में वो फिर तैयार हो गई और फिर मैंने अपनी गति बढ़ाई। इस बार तो पूर्ण अनुभवी की तरह मेरा साथ दे रही थी।फिर उसने चुदते हुए ही बातें करनी चालू कर दी, उसने बोला- पहली बार ऐसा लंड मिला है जिससे पूरी तसल्ली हुई है।

और वो जोर-जोर से गांड उठा-उठा कर चुदने लगी। इतने में मुझे लगा कि अब मैं झड़ने वाला हूँ।

यह सुनते ही उसने अपनी रफ़्तार बढ़ा दी और उस समय ऐसा लगा जैसे कि मैं जन्नत की सैर कर रहा हूँ।

और फिर हम दोनों साथ में ही झड़ने लगे। वो बिस्तर पर और मैं उस पर लस्त पड़ गया। थोड़ी देर के बाद हम फिर तैयार हो गये। और मैंने उसे घोड़ी बनने को कहा और उसे घोड़ी बना कर चोदने लगा। थोड़ी देर वैसे ही चोदने के बाद मैंने अपना लंड निकला और उसकी गांड में डाल दिया।

वो चिल्ला उठी, उसे यह नहीं मालूम था कि मैं उसकी गाण्ड भी मारने वाला हूँ।

थोड़ी देर गांड मारने के बाद फिर मैंने लंड उसकी चूत में डाल दिया। अब उसकी चूत ढीली हो गई थी। बीस मिनट की चुदाई के बाद हम दोनों झड़ गये। फिर देर तक एक दूसरे को चूमते रहे। उस दिन मैंने उसके साथ दो बार सेक्स किया और करीब 9:45 पर मैं गुडगाँव के लिए रवाना हो गया……..

तो दोस्तो, यह थी मेरी कहानी !

वैसे तो मेरी बहुत सी कहनियाँ है पर वो सब फिर कभी ……..

आपको मेरी कहानी कैसी लगी, यह जरूर बताएँ !

प्रकाशित: मंगलवार 16 अगस्त 2011 11:53 pm

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