मुंहबोला भाई-बहनचोद

, 8 October 2011


प्रेषक : कुमार रवि

मेरा कोई सगा भाई नहीं है इसलिए जब भी राखी या भाई दूज का त्यौहार आता है, मैं पड़ोस के एक लड़के को राखी बांधती हूँ, उस लड़के का नाम रवि है, वह मेरा दूर के रिश्ते की बुआ का लड़का है, उसकी आयु 24 और मेरी 18 साल है। रवि के पिता गुजर गए थे और वसीयत में एक मकान छोड़ गए थे उसी में रवि की माँ रहती थी।

घर से 7 किलोमीटर दूर सिटी में रवि की कम्प्यूटर की मरम्मत की दुकान है। साथ ही रवि वहीं पर वीडियो लाइब्रेरी भी चलाता था। अपने साथ उसने एक लड़के को भी काम पर रखा था जिसका नाम सुनील था। सुनील 27 साल का युवक था, उसका काम ग्राहकों को उनकी पसंद की सीडियाँ देना था। रवि की दुकान घर से बहुत दूर है इसलिए उसने अपनी दुकान के ऊपर एक कमरा किराये पर ले लिया था। कमरे में लैट-बाथ साथ ही थे। रवि दिन भर दुकान पर रहता था, सुनील उसके लिए घर से खाना ले आता था।

जब भी रवि को समय मिलता था, वह एक दो दिन में मेरे घर जरुर आता था, कई बार मम्मी उससे बाजार से जरूरी सामान मंगवा लेती थी। रात को रवि घर में खाना खाता था।

छोटी होने के कारण रवि मुझे बहुत चाहता था और जब भी आता था मेरे लिए कोई न कोई चीज जरूर लाता ! मम्मी भी उसे पसंद करती थीं और उससे हर एक बात में सलाह लेती थीं।

यह घटना राखी के दिन की है, मैं रवि को राखी बांधती थी और हर साल की तरह उसी के आने का इन्तजार हो रहा था। रवि ने मुझे राखी पर एक मोबाइल गिफ्ट देने का वादा किया था। उस दिन रह रह कर बरसात हो रही थी और रास्तों में पानी भर गया था, शाम के पांच बजे के करीब रवि आया और देर के लिए माफ़ी मांगी। फिर मैंने जब उसे राखी बांधी तो उसे मोबाइल देने का वादा याद दिलाया।

खाने के बाद रवि ने कहा- मेरे साथ मार्केट चल, तुझे जैसा मोबाईल चाहिए, वैसा दिलवा दूँगा।

उस समय शाम के सात बज चुके थे, तभी जोर की बरसात होने लगी, मेरी मम्मी ने रवि से कहा- तुम अगले दिन मोबाइल खरीद देना !

लेकिन मैं उसी दिन की जिद करने लगी।

रवि ने कहा- अगर पानी के कारण देर हो गई तो?

मगर मैंने कहा- चाहे कितनी भी देर हो जाये, मुझे तो मोबाईल चाहिए !

मेरी मम्मी भी बोली- बेटा, यह बड़ी जिद्दी है, अगर तू आज मोबाईल नहीं देगा तो यह मेरी जान खाती रहेगी। मुझे तुम पर पूरा विश्वास है, भले कुछ देर अधिक भी हो जाये।

रवि बोला- आंटी चिंता मत करो, अगर बरसात जोर से आने लगेगी तो हम अपनी दुकान के ऊपरी कमरे में रुक जायेंगे क्योंकि वह सिटी में है, वहीं नए नए तरह के मोबाइल मिलते हैं।

यह सुनते ही मैं रवि की बाइक पर बैठ गई और जाते जाते रवि ने मम्मी से कहा- आंटी, आप चिंता नहीं करो, मैं आपको फोन कर दूँगा।

उस समय थोड़ी बून्दाबून्दी हो रही थी, हमने काफी घूमने के बाद एक मोबाईल पसंद कर लिया लेकिन जैसे ही हम दुकान से बाहर निकले तो मूसलाधार बरसात होने लगी, साथ में ठंडी हवाएँ भी चलने लगी।

रवि ने मेरी मम्मी को बता दिया कि हम बाजार में हैं, हमें देर हो सकती है।

रवि का कमरा थोड़ी दूर ही था, उसने कहा- बरसात रुकने तक हम कमरे में रुकते हैं, वहाँ कोई नहीं होगा।

कमरे की एक चाभी रवि के पास थी, दूसरी उसने अपने नौकर को दे रखी थी।

कमरे के आने तक हम पूरी तरह भीग चुके थे, मुझे सर्दी लग रही थी, मैं काँप रही थी लेकिन उस कमरे में मेरे लिए दूसरा कपड़ा नहीं था, रवि ने मुझे अपना कुरता दे दिया, मैं नीचे से नंगी थी।

रवि के कमरे में सिर्फ एक तौलिया और लुंगी थी, जब वह गीले कपड़े बदलने लगा तो उसका तौलिया नीचे गिर गया और उसका लम्बा मोटा, गोरा, प्यारा लंड मैंने देख लिया। शायद उसने जानबूझ कर ऐसा किया होगा।

मैं दो-तीन बार मोहल्ले के लड़कों से चुदवा चुकी थी, तब से मुझे लंड लेने की इच्छा होती रहती थी। मैं चाहती थी कि कोई लम्बा लंड वाला मेरी चूत की जमकर चुदाई करे और मेरी चूत की प्यास बुझा दे।

रवि का लंड मुझे अच्छा लगा,10 इंच लम्बा और 3 इंच मोटा था, मेरी चूत भर जाने पर भी लंड बचा रहता।

जब से मैंने रवि का मस्ताना लंड देखा, सर्दी होने बावजूद मेरी चूत में वासना की आग भड़क रही थी, मैं सोच रही थी कि किसी न किसी तरकीब से रवि का लंड लिया जाये।

मैंने रवि से कहा- मुझे ऐसा लग रहा है कि मुझे सर्दी होने वाली है, तुम्हारे कमरे में गैस भी नहीं है, वर्ना चाय बन सकती थी। रवि ने कहा- मैं नीचे से किसी दुकान से चाय मंगवा लेता हूँ, अगर कोई दुकान खुली हो ! वैसे मेरे पास तो ब्रांडी है, मुझे जब भी सर्दी हो जाती है, मैं एक दो पैग ले लेता हूँ। मैं नौकर सुनील को फोन करता हूँ, वह चाय का इंतजाम कर देगा, अगर तू चाहे, तब तक तू भी एक पैग ले ले !

मैं खुश होकर बोली- अगर तुम खुद अपने हाथों से पिलाओ, तो मैं पी लूंगी।

मेरा काम हो गया, मेरी चूत लपलपाने लगी, मैंने फ़ौरन एक की जगह तीन पैग ले लिए और कहा- मेरी सर्दी जल्दी जाने वाली नहीं है, मुझे और गर्मी चाहिए।

रवि मे मुझे अपने पास बिठाया और कहा- तू मुझसे सट कर बैठ जा, शायद मेरे शरीर से तुझे कुछ गर्मी मिल जाए।

बातें करते वक्त रवि मेरे शरीर पर हाथ फेरने लगा, उसका लंड लुंगी में उछलने लगा था और मेरी चूत से रस रिसने लगा था। रवि ने मुझे अपने बिल्कुल पास लिटा लिया और अपनी टाँगें मेरी टांगों में फंसा लीं। मेरी चूचियाँ एकदम कड़क हो गई, रवि की सांसें मेरी सांसों से मिल रही थीं।

तभी रवि का नौकर सुनील अचानक कमरे में आ गया, हम दरवाजा बंद करना भूल गए थे, हमें ऐसी हालत में देखकर सुनील पहले तो चौंका और बोला- यार माल तो मस्त लाये हो, क्या अकेले ही मजा लेने का प्लान था?

रवि ने कहा- यह मेरी मुंह-बोली बहन है।

सुनील बोला- इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, यह तेरी सगी बहन तो नहीं है, तुझे यह कहावत पता नहीं? ‘लंड न देखे दिन या रात, चूत ना देखे रिश्ता नात !’ यार जब लंड तैयार हो, चूत गर्म हो तो सारे रिश्ते नाते भूलकर चुदाई का मजा लेना चाहिए, ऐसे में अगर मेरी सगी बहन भी होती तो मैं उसे चोदे बिना नहीं छोड़ता, यार चूत का अपमान नहीं करना चाहिए।

सुनील ने मुझसे कहा- आप ही बताइए क्या मैंने कोई गलत बात कही है?

ब्रांडी के नशे में या चुदवाने की इच्छा में मैंने कहा- तुम सच कह रहे हो, कुदरत ने सर्फ मर्द और स्त्री ही बनाये हैं, रिश्ते तो लोगों ने बना दिये हैं।

रवि ने कहा- इसका मतलब तुम चुदवाने को राजी हो?

सुनील भी बोल पड़ा- मैंने यह ज्ञान दिया है, मेरा भी कुछ हक़ बनता है, इस लड़की को एक साथ दो दो लंड का मजा मिलेगा। यह भी याद करेगी कि चुदाई क्या होती है।

रवि ने मुझसे पूछा- क्या तुम तैयार हो?

मैंने अपना सर हिला कर हाँ का इशारा कर दिया। सुनील फ़ौरन नंगा हो गया, उसका लंड भी दस इंच से कम नहीं था और कड़क होकर ऊपर नीचे हो रहा था। मुझे लंड का गुलाबी गुलाबी सुपारा बहुत प्यारा लग रहा था और उसको चूसने की इच्छा नहीं रोक पा रही थी।

रवि ने भी अपनी पैंट उतार दी।

तभी सुनील ने रवि से कहा- आओ आज पिंकी को दो दो लण्डों का मजा दे दें, यह भी याद करेगी, अगर यह ऐसा मजा ले लेगी तो हमें खुद चोदने के लिए रोज बुलाया करेगी।

रवि ने कहा- पिंकी आओ, तुम मेरे खड़े लंड पर इस तरह चढ़ जाओ, जिससे लंड फक्क से चूत में समां जाए, मैं जानता हूँ कि तुम पहले भी तुम चुद चुकी हो, तो तुम्हें दर्द नहीं होगा।

जिस समय में रवि का लंड लेने के लिए लंड पर सवार होने लगी तो मेरी गाण्ड सुनील के सामने आ गई, उसने फ़ौरन अपना लंड मेरी गाण्ड पर टिका कर अन्दर घुसेड़ दिया। लंड गांड में रास्ता बनाते हुए अन्दर समां गया, मेरी चीख निकलने ही वाली थी लेकिन मैंने उसे रोक लिया। मजा लेने के लिए दर्द सहना ही पड़ता है, वर्ना मजा कैसे आयेगा।

फिर दोनों के लंड अपना काम करने लगे, मैं स्वर्ग के मजे ले रही थी, मेरी चूत से चिकना रस रिस रहा था लेकिन गांड लाल हो रही थी।

उस दिन दो घंटे तक मैं दोनों छेदों में दो दो लंड के मजे लेती रही थी। थोड़ी थोड़ी ब्रांडी पीकर यही काम दुहराया जाता गया, वे दोनों कई बार झड़े होंगे। मैंने उनके लंड चाट चाट कर साफ कर दिए और वादा लिया कि जब भी मैं रिंग करूँ तो सब काम छोड़कर मेरी चूत की सर्दी भगा दिया करो।

आज भी मैं छुप छुप कर दोनो से लंड ले रही हूँ ,मेरी गांड इतनी ढीली हो गई है कि गांड मरवाने में कोई तकलीफ नहीं होती, बल्कि मजा आता है।

आखिर चूत और गांड किस लिए होते है ? जो लड़कियाँ दो दो लंड लेती हैं, वे जवान बनी रहती हैं, गांड मरवा कर देखो !

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