चाची की सहेली-1

, 10 August 2009


प्रेषक : मितेश कुमार

मैं अमित जोधपुर से हूँ, मैं अन्तर्वासना का नया लेकिन नियमित पाठक हूँ। मैंने बहुत सी कहानियाँ आप लोगों की लिखी पढ़ी और अनुमान लगाने की कोशिश की कि इनमें कितनी सच्चाई है, लेकिन मैं इसका अंदाजा नहीं लगा पाया क्योंकि आप लोगों की लिखी कहानियाँ हैं ही ऐसी।

मेरे वो पल जो मैंने एक गाँव में एक दिन के रूप में बिताए वो आप लोगों के साथ साझा करना चाहता हूँ। मैं जोधपुर में अपने चाचा के साथ रहता था। यह बात उस समय की हैं जब मैं बारहवीं में पढ़ता था। वैसे तो चाची भी माल कम नहीं थी लेकिन आज आपको चाची नहीं किसी और के बारे में बताने आया हूँ किसी को बताना नहीं।

एक दिन, मैं दादाजी से मिलने गांव गया उस दिन गांव में किसी शादी भी थी तो काफी चहल-पहल थी। दादाजी बाहर बरामदे में सो रहे थे, मैं गया और उनके पास बैठ गया। थोड़ी देर बाद एक लड़की आई और छोटी चाची से मिलने गई। मैंने दादा जी से बोला कि मैं खाना खा लेता हूँ और अंदर चाची के पास आ गया।

आप को बता दूँ कि मेरी दो चाचियाँ हैं और दोनों ही पूरी चुदक्कड़ हैं। मैंने चाची को इशारे से बोला कि इसकी दिला दे !

तो चाची जोर से बोली- क्या बोल रहा है? इसको चोदना है?

मैंने शर्माते हुए हाँ में सिर हिलाया।

चाची : ए अनु, सुन, तू रोज बोलती है कि खुजली हो रही है?

चाची गाँव की रहने वाली हैं लेकिन चुदाई के मामले में बिल्कुल खुली है।

अनु : हाँ चाची !

उसने नीचे देखते हुए कहा।

चाची : तो देख अमित आज ही आया है और इसको शाम को वापस भी जाना है।

अमित तू ऐसा कर कि अनु के साथ खेत में चला जा और वहाँ पर और कोई नहीं हैं तेरे चाचा आज खाद लेने शहर गए हैं।

मैं : चाची, अनु के घर में क्या कहोगी?

चाची : वो मैं बता दूंगी, वैसे भी आज पड़ोस में शादी है, मैं बता दूँगी कि वो मेरे बच्चों को लेकर शादी में गई है।

मैं : और दादा जी को क्या कहोगी?

चाची : वो तुम बता दो कि आज मैं खेत में जा रहा हूँ, वहाँ कोई नहीं है।

मैं : ठीक है !

और मैं खाना खाकर दादा जी को बता कर खेत की तरफ चल दिया, जाने से पहले मैंने चाची को बता दिया कि मैं जा रहा हूँ।

चाची : ठीक है गाँव से बाहर निकल कर इंतजार करना, अनु भी अभी आ रही है।

मैं घर से निकल कर पैदल ही गाँव से बाहर के रास्ते पर चल दिया। गांव ज्यादा बड़ा नहीं है सो मैं जल्दी ही गांव से बाहर एक पेड़ के नीचे खड़ा हो गया और इंतजार करने लगा। मेरा साढ़े छः इन्च का लण्ड अपनी जगह से हिलने लगा और धीरे धीरे खड़ा होने लगा।

मैं अपनी चाची जो शहर में रहती है, उसकी चुदाई करता रहता हूँ इसलिए यह पहली बार नहीं था। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं।

5 मिनट के इंतजार के बाद मैंने अनु को आते देखा, उसके हाथ में पानी का लोटा (बर्तन) जो जंगल जाने के बाद चूतड़ धोने के काम लिया जाता है।

जब अनु पास आ गई तो मैं बोला- हाय ! कैसी हो?

अनु : ठीक हूँ।

मैं : अनु, यह तो बता कि हमारे खेत किस तरफ हैं।

अनु : मैं जब थोड़ी आगे चली जाऊँ तो आप मेरे पीछे-पीछे चले आना।

इतना बोल कर अनु एक तरफ को चल दी और मैं भी उसके पीछे चल दिया। लगभग 10 मिनट के बाद वह एक खेत में एक पक्के मकान के सामने खड़े हो गई।

मैं समझ गया कि यही वह जगह है जहाँ मैं इस अनु को चोदूंगा।

मैंने आगे आकर घर का दरवाजा खोला और हम दोनों अन्दर चले आए और दरवाजा वापस बंद कर दिया, मैं दरवाजे में अंदर से कुण्डी लगाना नहीं भूला।

मैं एक अंजान लड़की के साथ एक कमरे में बंद था, ऐसा पहले भी हुआ था, लेकिन मैं थोड़ा शरमा रहा था, ऐसा ही कुछ अनु के साथ भी हो रहा था।

दो मिनट तक कोई आवाज नहीं हुई। मैंने घूम कर अंदर से पूरे मकान का जायजा लिया, मैंने देखा कि मेरा चाचा भी तगड़ा आशिक है क्योंकि उस मकान के अंदर का बेडरूम बहुत ही सेक्सी था।

मैंने वहाँ खड़े होकर अनु को आवाज लगाई तो अनु भी वहाँ पर आ गई, उसने जब वहाँ का नजारा देखा तो शरमा कर उसने अपना चेहरा नीचे कर लिया।

मैं उसके नजदीक सरक गया और उसकी गाण्ड पर धीरे-धीरे हाथ फेरते हुए उसकी चूचियों तक पहुँचा और उसकी चूचियों को ब्लाउज के ऊपर से मसलने लगा।

अनु ने अपने शरीर को ढीला छोड़ दिया और वो गर्म होने लगी।

मैंने उसको बोला- वो देखो क्या रखा है?

उसने देखा, बोली- फ्रिज है।

मैंने कहा- उसको खोलो और देखो शायद अपने काम की कोई चीज मिल जाए।

उसने फ्रिज खोला और देखने लगी।

मैंने पूछा- क्या रखा है?

तो बोली- इसमे तो बीयर और दारू रखी है।

मैंने कहा- अरे, फिर तो मजा आ जाएगा।

इसके बाद मैंने एक बीयर निकाली और उसके साथ एक वोदका की बोतल भी निकाल ली और दो गिलास उठा कर गिलासों में डाली।

तो अनु बोली- मैं नहीं पीती।

मैंने उसको पटा कर एक गिलास उसको दिया और देने से पहले मैंने धीरे से उसमें वोदका का डेढ़ पैग के करीब डाल दिया।

हम दोनों धीरे-धीरे पीने लगे और साथ ही मैं अनु को सहला भी रहा था। अनु को बीयर का नशा कम और सेक्स का नशा ज्यादा चढ़ने लगा।

थोड़ी देर बाद अनु को बीयर और वोदका का नशा भी होने लगा और वो खुल कर बात करने लगी।

मैं : अनु इससे पहले तूने कितनी बार चुदवाई है?

अनु : इससे पहले मैं तीन बार चाची के साथ वो करवाने के लिये गई थी।

मैं : अनु, वो क्या होता है, जरा खुल कर बता ! तू शरमा क्यों रही है?

नशे के झोंके में अनु बोली- मुझे ऐसी बातें करने में शर्म आती है।

मैं : मैंने अनु के हाथ से गिलास लिया और उसमे और बीयर कम और वोदका ज्यादा डाल कर पकड़ा दी।

वो उसको पीने लगी और कहा- यह तो ज्यादा कड़वा है।

मैं बोला- पीने के बाद सबको ऐसा ही लगता है।

अनु ने जल्दी से गिलास खाली कर दिया।

मैं भी तब तक दोबारा पैग लगा चुका था।

अब नजारा देखने लायक था।

अनु बोलती- यार अब तो गर्मी लग रही है !

मैं बोला- तो फिर देर किस बात की? गर्मी में कपड़े बहुत परेशान करते हैं इनको उतार दे !

बस इतना कहना था कि वो उछल कर मेरी गोद में लेट गई। मैं तो जोश के मारे बस कुछ भी नहीं बोल पाया।

वो इठलाती हुई बैठ गई और उसने मेरी पैन्ट की जिप खोली। पिंजरे से बाहर निकलते ही लण्ड फनफना उठा।

उसने मेरे मोटे लण्ड को देखकर बस इतना कहा- ओह !

इतना कहकर उसने मेरे लण्ड पर ही अपने रसीले होठों से एक चुम्मा जड़ दिया।

हाय, वो चुम्मा तो जैसे मेरी जान ले गया। 440 वोल्ट का झटका लगा जैसे मुझे। उसने मेरा पूरा पैन्ट नीचे कर दिया और लगी मेरे लण्ड और अन्डकोषों को चाटने और चूमने।

“आह ऊह्ह ,आह्ह आआआअ, ऊऊओ, आआह्ह्ह्ह, आआह्ह्ह्ह !” मेरे से ज्यादा आवाजें तो वो कर रही थी। उसकी मधुर सीत्कारों से जैसे कमरा भर गया था।

मेरा लण्ड पूरे जोश में था। उसने पहले मेरे सुपारे को धीर धीरे चाटा, फिर उसे अपने मुँह में लेकर पूरा ही चूसने लगी। उसके जीभ की लगातार रगड़ से मेरा सारा संयम छुटने लगा। प्री-कम की एक जबरदस्त धार मैंने उसके मुँह में ही निकाल दी।

वो और मस्त होकर चूसने लगी मुझे। मेरा लण्ड मोटा हो गया उसे भी लेकर चूसने में उसे कोई दिक्कत नहीं हो रही थी। मैं लगा धक्के मारने।

“अआह्ह, ओह, उन्म्मम्म्म्म ! आह्ह्ह्हह्ह ! ऊऊऊ हां !” बस इन्हीं आवाजों से वो मेरे होश लिए जा रही थी। मैं जैसे उसका मुँह ही चोदने लगा था। इतना मजा आज तक चूत मारने में नहीं आया था जितना अनु ने एक पल में दे दिया था।

शेष कहानी दूसरे भाग में !

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