बड़े भाई की साली को चोदा

, 14 April 2005


प्रेषक : हॉट होर्स, कानपुर

हेल्लो दोस्तों !

मै ३५ साल का युवक हूँ, मेरा नाम कुमार है और अन्तर्वासना की कथाओं का नियमित पाठक हूँ। दोस्तों मै आज आप सभी को अपनी एक सच्ची कहानी भेज रहा हूँ।

बात करीब दो वर्ष पहले की है, मै अपने एक दोस्त की शादी में लखनऊ गया था। वहां मैंने एक खूबसूरत लड़की को देखा जिसकी उम्र २८ साल की होगी और उसका फिगर भी गजब का था, स्तन और गांड तो देखने लायक थे, उसको देखते ही मेरे मन में उसको चोदने का ख्याल आने लगा। फिर मैंने पता किया कि ये है कौन? पता चला कि ये मेरे दोस्त के बड़े भाई की साली है।

मैंने सोचा फिर तो ठीक ही है और उसको पटाने के लिए उसके पास जाकर उससे मेल जोल बढ़ाने के लिए बातचीत शुरू की और उसको बताया कि राजू जिसकी शादी हो रही है मेरा दोस्त है। और उससे उसका नाम पूछा तो उसने बताया- मेरा नाम दीपाली है।

मैंने कहा- मुझ को मालूम है कि तुम राजू के बड़े भाई की साली हो।

और पूछा कि तुम्हारा पति भी शादी में आया है?

तो दीपाली ने बताया- वो नहीं आए हैं ऑफिस के काम से बाहर जाना पड़ा है इसलिए नहीं आ सके।

बात करता हुआ मै दीपाली के बूब्स को देख रहा था। दीपाली भी समझ रही थी कि मै उसके स्तनों का जायजा ले रहा हूँ। तब दीपाली ने कहा- कुमार तुम बात तो हमसे कर रहे हो लेकिन नजरें तुम्हरी कहीं और हैं इरादा नेक है कि नहीं?

मै समझ गया कि दीपाली की भी इच्छा कुछ करने की है, मैंने कहा कि दीपाली तुम्हारी चूचियों के निप्पल तो बड़े बड़े लग रहे हैं तुम्हारे ब्लाउज के अंदर से निप्पल निकलने को बेकरार हैं।

तो दीपाली ने कहा- कैसी बातें करते हो?

मैंने कहा- जैसे तुमने पूछा कि नजरे कहाँ हैं तो मैंने बता दिया कि क्या देख रहा हूँ !

उसने हंस दिया तो मैंने कहा कि दीपाली तुमको देख कर चोदने का मन कर रहा है ! मै भी यहाँ अकेला ही आया हूँ, रात को शादी में शामिल होने के बाद कुछ मस्ती करने का इरादा है क्या?

तो दीपाली ने कहा कि किसी को मालूम हो गया तो हमारा घरवाला हमको निकल देगा !

मैंने कहा कि ऐसा करते हैं कि शादी की अगवानी की रस्म होने के बाद मेरे होटल में चलते हैं। मैंने लखनऊ जाकर एक होटल में कमरा ले लिया था क्योंकि शादी के घर में जगह नहीं होती है और मुझको बाथरूम में नंगे हो कर नहाने की आदत है, इसलिए कमरा लेना पड़ा था।

मैंने दीपाली से कहा कि रात में हमारे कमरे में रूक जाना, ऐसे समय में किसी को ध्यान नहीं होता कौन कहाँ है।

दीपाली ने कहा- देखा जायेगा !

फिर हम लोग अपने अपने काम से लग गए लेकिन मन ही मन सोच रहा था कि दीपाली चलेगी या नहीं?

लेकिन यह भी लग रहा था कि दीपाली का भी मन शायद चुदाई का है, नहीं तो वो दूसरे सुर में बात करती। खैर किसी तरह से शादी की अगवानी की रस्में पूरी हुई तो मैंने दीपाली से कहा- चलो जानेमन ! आज की रात हमारे लण्ड का भी मजा ले लो ! अभी तक तो तुमने अपने पति के लण्ड का ही मजा लिया होगा !

दीपाली भी चुदाने के पूरे मूड में थी, उसने कहा- बाहर चलो ! हम आते हैं !

और फिर ५ मिनट में ही दीपाली भी बाहर आ गई। हम और दीपाली एक ऑटो में बैठ कर होटल आ गए। कमरे में आते ही मैंने टीवी चालू कर दिया। रात का १ बजा होगा, टी वी के चैनल बदलने में एक चैनल पर ब्लू फिल्म चल रही थी।

दीपाली ने कहा- यह क्या है?

मैंने कहा- ब्लू फिल्म ! अक्सर रात में डिस्क वाले लगा देते हैं, वही चल रही है।

तो उसने कहा- हमने तो कभी ब्लू फिल्म देखी ही नहीं है !

तो मैंने कहा- बड़े मौके से आ रही है, देख लो ! और टीवी चालू करके मैं बाथरूम में घुस गया, दरवाजा अंदर से बंद नहीं किया और नंगे होकर नहाने लगा।

उधर दीपाली ब्लू फिल्म देख कर गरम हो रही थी। फिल्म में एक लड़की को पॉँच आदमी चोद रहे थे, एक आदमी उसकी चूत में लण्ड डाले हुए था, दूसरा गांड में लण्ड डाले था, तीसरा मुंह में लण्ड डाले था और दो आदमी उसकी चुचियों को दबा रहे थे और वो लड़की उन दोनों आदमियों का लण्ड अपने हाथ में लेकर मुठ मारने में लगी थी।

यह सीन देख कर दीपाली बहुत गरम हो गई थी और उसने अपनी साड़ी खुद ही उतार दी। मेरा लण्ड भी यह देख कर डंडे जैसा तन गया और फिर मैं तौलिया लपेट कर बाहर आ गया। मेरा लण्ड तौलिये को फाड़कर बाहर आने को बेताब था।

दीपाली ने भी देखा कि मेरा लण्ड तना हुआ है, उसने उठ कर तुंरत मेरा तौलिया खींच दिया। अब मैं बिलकुल नंगा हो गया, मेरा ८” का लण्ड देख कर दीपाली तो ख़ुशी से उछल पड़ी, बोली- इतना लम्बा और मोटा लण्ड है? हमारे आदमी का तो ५” का ही है ! आज पूरा मज़ा आयेगा !

मैंने कहा- जानी ! आज जैसा मज़ा तुमको पहले कभी नहीं मिला होगा !

और यह कह कर मैं उसको उठा कर बिस्तर पर ले गया और उसको किस करना शुरू कर दिया। मैंने उसके होंठों को किस करना शुरू किया तो उसने अपनी जीभ मेरे मुंह में दे दी। मैं उसको चूसता रहा और हाथों से उसके बूब्स को सहलाने लगा। और फिर धीरे धीरे उसका ब्लाउज उतार दिया, फिर उसके पेटीकोट का नाड़ा भी खोल दिया। अब दीपाली सिर्फ पैंटी और ब्रा में थी। उसकी चड्डी गीली हो रही थी, चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था।

मैं तो उसके बदन को देख कर दंग रह गया। बिलकुल दूध की तरह गोरी थी दीपाली !उसको देख कर तो किसी का भी मन चोदने का हो जायेगा। मैंने तुंरत ही उसकी ब्रा का हुक खोल दिया और उसकी चूचियों को धीरे धीरे सहलाने लगा। फिर एक चूची को मुंह से चूसने लगा और फिर धीरे धीरे किस करते हुए उसकी नाभि तक आ गया।

दीपाली बहुत गरम हो रही थी उसने मेरा लण्ड पकड़ लिया था और उसको हिला रही थी। मैंने उसकी चड्डी भी उतार दी, लगता था कि उसने अपनी बुर के बाल कुछ दिन पहले ही साफ किए थे।

दीपाली ने बताया कि अभी ३ दिन पहले ही महीना ख़तम हुआ है इसलिए मन तो चुदवाने का कर ही रहा था क्योंकि महीना समाप्त होने के बाद चूत की प्यास बढ़ जाती है, लेकिन शादी में आना पड़ा।

मैंने कहा- मेरी जान ! आज मैं तुम्हारी चूत की पूरी प्यास बुझा दूंगा !

और फिर मैं उसकी बुर को चाटने लगा तो वो बोली- ये क्या कर रहे हो?

मैंने कहा- क्या तुम्हारे आदमी ने कभी तुम्हारी बुर नहीं चाटी?

उसने कहा- नहीं तो !

मैंने कहा कि तब तो तुमने अभी तक चुदाई का असली आनंद लिया ही नहीं ! आज ले लो मेरी जान पूरा आनंद !

और यह कह कर मैं उसकी बुर को थोड़ा फैला कर जीभ से चाटने लगा। दीपाली के मुंह से सिसकारी निकल रही थी और बड़बड़ा रही थी- ऐसा तो पहले कभी मज़ा नहीं आया !

मैं फिर उसकी बुर की तिकोन को मुंह में भर कर चूसने लगा और फिर उसको जीभ से ही चोदने लगा। मैं अपने हाथों से उसकी चूचियों को मसलता रहा और गांड पर भी हाथ फिराता रहा।फिर मैंने ६९ की पोसिशन बनाई और अपना लण्ड उसके मुंह के पास ले गया और दीपाली से कहा- इसको भी तो चूसो !

उसने कहा- लण्ड भी चूसा जाता है क्या?

मैंने कहा- चूसो मेरी जान ! आज चुदाई का पूरा मज़ा लो !

तब दीपाली ने मेरे लण्ड का सुपाड़ा खोल कर जीभ से चाटना शुरू किया। मैंने उसका सर पकड़ कर पूरा लण्ड उसके मुंह में डाल दिया और उसकी बुर चूसने लगा। उसकी बुर बहुत गीली हो रही थी और फिर थोडी देर में ही दीपाली कि बुर ने पानी छोड़ दिया।

मेरा लण्ड भी तन कर डंडा बना हुआ था तो फिर मैंने अपना लण्ड उसके मुंह से निकाला और उसको घोड़ी बनने को कहा तो वो बोली- घोड़ी बना के क्या करोगे?

मैंने कहा- पहले तुम्हारी गांड मारूंगा !

वो बोली- हमने कभी गांड नहीं मरवाई है, उसमें तो बहुत दर्द होगा !

मैंने कहा कि पहली बार बुर चुदाई में भी तो दर्द हुआ होगा बस वैसा ही होगा फिर मज़ा आने लगेगा।

उसने कहा- धीरे धीरे डालना ! कहीं मेरी गांड न फट जाये !

मैंने उसकी गांड पर थूक लगाया और फिर अपने लण्ड का सुपाडा उसकी गांड के छेद पर लगा कर हलके से धक्का दिया मेरा सुपाड़ा उसकी गांड में घुस गया।

वो धीरे से चिल्लाई- लग रहा है !

मैंने कहा- बस अब नहीं लगेगा ! और फिर एक धक्का दे दिया मेरा आधा लण्ड उसकी गांड में घुस गया।

उसको कुछ ज्यादा ही दर्द हुआ और बोली- लण्ड बाहर निकालो प्लीज़ ! लग रहा है !

मैं फिर उसकी पीठ पर चुम्बनों की बौछार करने लगा और लण्ड डाले डाले ही उसकी चूचियों को हाथ से पकड़ कर सहलाने लगा। थोड़ी देर में उसका दर्द कुछ कम हुआ। फिर मैंने अपने लण्ड का एक धक्का जोर से मारा, मेरा पूरा लण्ड उसकी गांड में घुस गया और फिर मैंने अपने धक्के तेज कर दिए अब तो दीपाली को भी मज़ा आने लगा और वो भी अपने चूतड़ उठा उठा के मेरा पूरा लण्ड अन्दर लेने लगी।

थोड़ी देर बाद मैंने अपना लण्ड निकाल कर उसकी चूत में पीछे से ही डाल दिया चूत बिलकुल गीली थी आधा लण्ड उसकी चूत में घुस गया। फिर मैंने थोड़ा सा लण्ड बाहर निकाल कर एक जोर का धक्का मारा, मेरा पूरा लण्ड उसकी बुर में जड़ तक घुस गया।

वो चिल्लाई- मर गई ! धीरे धीरे करो ! तुम्हारा लण्ड बहुत बड़ा है !

मैंने फिर धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू कर दिए। अब दीपाली को भी मज़ा आने लगा था और वो भी चूतड़ उठा उठा कर धक्के लगाने लगी। करीब आधे घंटे की चुदाई में दीपाली दो बार झड़ चुकी थी और अब मेरा भी पानी निकलने वाला था। मैंने अपने लण्ड को दीपाली की बुर से बाहर निकाला और उससे कहा- मुंह खोलो !मेरा पानी पी लो ! मज़ा आ जायेगा !

और फिर उसने मेरा सारा पानी पी लिया और लण्ड को चाट चाट कर साफ़ कर दिया।

उस रात हम लोगों ने चार बार चुदाई की। दीपाली बहुत खुश थी, बोली- जिन्दगी में पहली बार ऐसा चुदाई का मज़ा आया है, अब हम कानपुर तुमसे मिलने जरुर आया करेंगे।

दोस्तों ! मेरी कहानी कैसी लगी जरूर लिखियेगा।

[email protected]

Download PDF पीडीएफ प्रारूप में इस कहानी को डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें

comments powered by Disqus