सोचा ना था

(Socha Na tha )

जिदंगी का वो सच्‍चा अनुभव जो यादगार रहा और जो कभी सोचा ना था कि ऐसा भी होगा कभी! मेरी एक अनजान दोस्‍त के साथ समलैंगिक अनुभव की कहानी जो मेरे लिये एक नया और रोमांचक अनुभव देकर गई, सीख मिली कि सेक्स किसी से भी करो, प्यार से करो तथा जब मन और अंतरआत्मा तैयार हो तभी करो !
फिर देखो कितना मजा आयेगा।

समस्त अर्न्तवासना के पाठकों को मेरा नमस्कार ।
मेरा नाम यूँ तो कुछ और हैं, लेकिन प्यार से सब मुझको लिक्विड पुकारते हैं और मैं अर्न्तवासना का विगत 08 वर्षों से पाठक हूँ।
यूँ तो मैं अब तक दो गर्लफ्रेण्ड बना चु‍का हूँ किन्तु उनके साथ सेक्स करने के पहले भी कुछ किया है। जिदंगी में ऐसा समय आया जो मैंने कभी सोचा भी नहीं था। मैं कोई समलैंगिक नहीं हूँ मगर कहा जाता हैं ना कि परिस्थिति आपसे कुछ भी करा सकती हैं।

मैं बीस साल का पतला बदन छरहरा शरीर का जवान लौंडा इंदौर में अपने बड़े भैया के घर काम सीखने गया था, रोजाना शाम को मुझे घूमने जाने का शौक और सायबर कैफे में ब्लू मूवीज डाउनलोड कर दूसरों को बेचने का शौक था।

उस दौरान मेरी दोस्ती मुझसे बड़े लड़के से हुई, जिसे सभी लारा नाम से पुकारते था, उसे ब्लू मूवीज देखने का बड़ा शौक था इसलिये वो मुझसे दोस्ती रखता था और सस्ते में ब्लू मूवीज खरीद लेता था।

एक दिन मैं उसे मूवीज कॉपी कर दे रहा था उसने अपने सीधे हा‍थ से मेरे कूल्हे‍ को दबा दिया।
मैंने जब उसे अनजान गुस्सैल नजरों से देखा तो वह मुझे आँख मारते हुए मुस्करा कर बोला- क्या हुआ लिक्विड? बुरा लगा?
उस दिन मैंने उसे कुछ नहीं कहा लेकिन अब वो दिन ब दिन रोज कुछ न कुछ हरकत करता रहता था, जैसे मेरे शरीर से चिपक जाना, बदन को दबाना यानि सेक्स अपील करना।

उसकी और मेरी दोस्ती को एक महीने से ज्यादा हो गया, वो मुझे बोला- लिक्विड आज तक सेक्स किया है?
मैंने उसे कहा- नहीं किया… पर तू ये क्यों पूछ रहा है?
उसने कहा- शनिवार को मेरे साथ मेरे रूम पर चलना, मैंने कुछ इंतजाम किया है।

मैंने उसे ठीक से जवाब नहीं दिया लेकिन वो शनिवार के पहले रोज मुझसे जिद करने लगा और मैंने उसे वादा किया कि मैं शनिवार को उसके रूम जरूर आऊँगा।

शनिवार को मैं भैया से इजाजत लेकर दोपहर खाना खाकर एक बजे लारा के रूम चला गया, उसका रूम इंदौर के बीचोंबीच एक नामचीन कॉलोनी में था। इसलिये वहाँ मुझे जाने में अजीब सा लग रहा था।
मैं लारा के रूम में गया, वहाँ लारा बिल्कुल तैयार होकर बैठा था जैसे उसकी सुहागरात हो या कोई बकरा हलाल करने की तैयारी में लगा हो।
उसका फ़्लैट दो कमरों में था, जिसमें सारा सामान व्यवस्थित जमा हुआ था और रूम बहुत शानदार खुश्बू से महक रहा था। सफेद चादर बिछाया हुआ जमीन पर बिस्तर तथा उसके पास ही कुछ अडल्ट बुक और दवाईयों के पैकेट पड़े थे।

मेरे आते से ही लारा ने मुझे पानी का ग्लास दिया और पूछा कुछ और लगा। मैंने मना किया और उससे पूछा- क्या इंतजाम है?
उसने मेरे होंठों पर अंगुली रखी और बोला- चुप हो जा लिक्विड, सब्र कर!

उसने दरवाजा बंद कर दिया और कम्‍प्‍यूटर पर जाकर एक समलैंगिक मूवीज फ़ुल स्‍क्रीन कर चालू कर दी।
मैं कुछ समझता उसके पहले ही वो पूरा नंगा हो गया, उसने अपनी लोवर और टी शर्ट उतार दी, अब वो पूरा नंगा हो गया, उसने अंडरवियर भी नहीं पहनी थी जिससे उसका काला नाग फनफनाता हुआ मुझे ही देख रहा।

फिर उसने कहा- लिक्विड, मैं जबरदस्ती कुछ नही करूँगा तुम्हारे साथ पर, तुम मेरी गांड मार सकते हो और मेरी इच्छा पूरी कर सकते हो।

मैं थोड़ा सपकपाया पर उसने मुझसे रिक्वेस्ट ही ऐसी करी कि मैं ना नहीं बोल सका।
उसने मुझे एक गोली दी जिससे मैं लम्बे समय तक सेक्स कर सकूँ। गोली खाने के बाद वह मुझे चाटने और मेरे होंठों को चूसने लगा और साथ ही साथ मेरे कपड़े भी उतारने लगा।
उसने मुझे पूरा नंगा कर दिया और मुझे चाट चाट कर गीला भी कर दिया। ठंड का समय था तो मुझे भी हल्का हल्का मजा आने लगा। मेरा नाग भी तनतना रहा था लेकिन उसके नाग के सामने छोटा ही था।

वो मुझे उल्टा लेटा कर कूल्हे चाटने लगा और मेरी गांड के छेद पर भी अंगुली फेरने लगा जिससे मुझे भी बहुत मजा आ रहा था। मुझे सीधा कर उसने टोमेटो सॉस का पाउच निकाल कर मेरे लंड पर लगा दिया और लंड को पूरा मुंह में भर लिया।

उसके लंड मुंह में लेते से ही मैं पागल सा हो गया और उसके सर के बालों को सहलाने लग गया। वो मेरा लंड पूरा अंदर लेकर अंदर बाहर करता रहा जिससे मैं पूरी तरह से पागल होता गया।
चरम सीमा पर आने से पहले मैंने उसे रोका और बताया कि मैं अब माल बाहर फेंक सकता हूँ।
वो बोला- फेंक दे, मैं पी जाऊँगा।

वो वापस लंड चूसने लगा, उसने मेरा पूरा लंड चूस चूस कर गीला कर दिया और आखिरकार मेरे लंड ने माल उसके मुं‍ह में ही छोड़ दिया।
उसने माल का एक भी कतरा मुं‍ह से बा‍हर नही आने दिया और लंड को जब तक चूसता रहा तब तक कि वो पूरी तरह मुरझाया नहीं।
फिर वो मुझसे हटकर अपने लंड पर हाथ फेरने लगा और हस्तमैथुन करने लगा जब वो सिसकने लगा तो मैंने उसका हाथ हटा दिया और उसके लंड को अपने हाथ से हस्तमैथुन करवाने लगा।
उसका लंड पूरी तरह से चि‍पचिपा हो गया मुझे एक प्रतिशत भी अच्छा नहीं लग रहा था पर उसकी संतुष्टि देखकर मैं और जोर जोर से हस्तमैथुन करवाने लगा।
उसका हस्तमैथुन होते ही सारा माल बाहर आ गया और मेरे हाथों में चिपक गया। उसने मेरे हाथ को चूसना शुरू कर दिया और हाथ पर लगा पूरा माल चूस गया।

आधे घंटे तक हम दोनों बिस्तार पर लेटे रहे और मूवी देखते रहे। इस दौरान वो बार बार मेरी गांड में अंगुली घुसाने का प्रयास करता रहा जिससे मुझे मजे आ रहे थे।
जब मेरा लंड वापस खड़ा हो गया तो उसने वापस लंड को मुंह में ले लिया और पांच मिनट चूसने के बाद एक चाकलेट फलेवर कंडोम मेरे लंड पर चढ़ा दिया और मुझसे बोला- लिक्विड तुम मेरी गांड मारो।
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वो उल्टा लेट गया घुटने उपर और जांघ चौड़ी कर जिससे मुझे उसकी गांड का बंद छेद साफ-साफ नजर आ रहा था।
वो खुद अंगुली कर छेद से अंदर बाहर करने लगा और गांड पर कोई तेल लगाने लगा। मैं उसकी गांड पर बहुत सारा थूका और बीच वाली अंगुली से अंदर बाहर करने लगा।
कुछ देर बाद मैंने लंड पर ज्यादा तेल लगाया और उसे हद से ज्यादा चिकना करने की कोशिश करने लगा। दो से तीन मिनट तक उसकी गांड पर ही मेरा लंड हिलता रहा और फिर मैं जब पूरा जोर लगाकर उस पर घोड़ी चढ़ा तो मेरा लंड उसकी गांड में फंस गया।
मुझे बहुत दर्द हो रहा था पर मैं धीरे-धीरे लंड को हिलाते रहा और‍ फिर कुछ देर बाद लंड ने अपना काम दिखाना शुरू कर दिया। मैं लंड को अंदर बाहर करता रहा और शायद मुझसे ज्यादा मजा लारा को आ रहा था।
जब मेरा लंड ज्यादा दुखने लगा और मुझे लगा कि हो गया तो मैंने अपना लंड निकाल दिया।
लारा ने कंडोम उतारा और लंड को चूस कर पूरा माल खत्म कर दिया और फिर खुद हस्तमै‍थुन कर हल्का हो गया।
चार बजे मैं नहा धोकर वापस घर चला गया।

लारा मुझे कई बार वापस बुलाया पर मैं फिर कभी नही गया और अब गर्मी में मैं अपने गृहनगर वापस आ गया हूँ और लारा से मेरा कोई सम्पर्क नहीं।
इस दौरान मैंने दो बार और सेक्स किया वो भी लड़कियों के साथ जो मैं बाद में बताऊँगा। मगर इस अनुभव के बाद मुझे लगा कि लड़का हो या लड़की, सेक्स किसी से भी करो प्यार से करो तथा जब मन और अंतरआत्मा तैयार हो तभी करो।
फिर देखो कितना मजा आयेगा।
तो आपका मेरा यह अनुभव कैसा लगा मुझझे जरूर बताइयेगा।
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