The Internal Desire |
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#11
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वृक्ष लगाने में भी आध्यात्मिक आनंद है
पटना स्थित गुरु गोबिंद सिंह जी की जन्मस्थली तख्त श्री हरिमंदिर में मत्था टेक कर बाहर निकले तो ऑटो वाले ने कहा, 'गुरु का बाग जरूर जाइएगा। तबीयत बाग-बाग हो जाएगी।' इतना तो पता था कि गुरु का बाग नौंवें पातशाह गुरु तेग बहादुर की स्मृति में बना गुरुद्वारा है। ढाका और असम की यात्रा से वापस आकर गुरुदेव विश्राम के लिए यहीं रुके थे। लेकिन 'तबीयत बाग-बाग हो जाने' की बात पर असमंजस में पड़ गया। बहरहाल, जाकर दर्शन किए तो ऑटो वाले की बात का मर्म समझ आ गया। विशाल भूभाग में फैला है गुरु का बाग। अपने नाम के अनुरूप हरा-भरा और घना छायादार उपवन। चिलचिलाती धूप के विपरीत तन-मन को शीतलता प्रदान करने वाला वातावरण। चारों ओर ऊंचे-ऊंचे पेड़। पेड़ों के झुरमुट के बीच में बना हुआ गुरुद्वारा। पता चला कि ये पेड़ यहां दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं द्वारा लगाए गए हैं। धर्मस्थलों पर लोग श्रद्धावश बहुत कुछ भेंट करते हैं, लेकिन पेड़ भेंट करने के बारे में पहली बार जाना। देश विदेश से आने वाले श्रद्धालु अपने बच्चों, बुजुर्गों या अन्य प्रियजनों से नाम से यहां पौधा लगाते हैं, जिसे खाद पानी देने का काम गुरुद्वारा कमिटी करती है। रोपने को पौधा भी अंदर ही उपलब्ध होता है। पौधा एक व्यक्ति लगाता है, उसका सुख हजारों उठाते हैं। इसी में तो आनंद है। इस संदर्भ में याद आती है तमिलनाडु में आध्यात्मिक संस्था ईशा फाउंडेशन की, जिसने करीब डेढ़ साल पहले महज एक दिन में सवा आठ लाख पेड़ लगा कर सामुदायिक भागीदारी के जरिए अध्यात्म को विकास के साथ जोड़ने की एक अनुकरणीय पहल की थी। आयोजकों द्वारा मूल रूप से सात लाख पेड़ लगाने की योजना थी। लेकिन पर्यावरण संरक्षण को समर्पित इस अभियान से जुडे़ दो लाख लोगों का उत्साह इतना अधिक था कि यह आंकड़ा सवा आठ लाख तक जा पहुंचा। फाउंडेशन द्वारा अगले दस साल में राज्य में ग्यारह करोड़ से ज्यादा पेड़ लगाने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि राज्य की 33 फीसदी जमीन को हराभरा बनाया जा सके। पेड़ हमारा जीवन हैं। ऑक्सिजन से लेकर आहार तक सभी कुछ हम उनसे हासिल करते हैं। जिंदगी के कितने ही सुख प्रदान करने का श्रेय वृक्षों को जाता है। पेड़ जीवित हो या मृत, हर रूप में हमारे काम आता है। दफ्तर की कुर्सी, घर का पलंग- ये सब वृक्ष की ही देन है। पेड़ न तो हो तो जिंदगी चलाना दूभर हो जाए। चिलचिलाती धूप या बरसात से बचाव के लिए कई बार किसी पेड़ की ही ओट ली जाती है। अंतिम संस्कार में भी पेड़ की लकड़ी ही काम आती है। वृक्षों ने न जाने कितनी कविताओं को जन्म दिया है। पेड़ ही मिट्टी के कटाव को रोकते हैं। पेड़ जमीन को रेगिस्तान में तबदील होने से बचाते हैं। जीवन के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में पेड़ों का खासा महत्व है। कम से कम इंसान के अपने हित में ही सही, पेड़ लगाना और बचाना जरूरी है। वृक्षों के महत्व से सभी वाकिफ हैं। यह दीगर बात है कि पेड़ बचाने और लगाने के प्रति लोग अभी उतने जागरूक और सक्रिय नहीं हुए हैं। इंसान की जिंदगी का सिलसिला ही कुछ ऐसा बन गया है कि रोजमर्रा की अनेक जरूरतें पूरी करने के लिए पेड़ काटने ही पड़ते हैं। कायदे से जितनी संख्या में पेड़ काटें जाएं, हाथों हाथ उतने ही पेड़ नए लगाए जाने चाहिए, ताकि इकलॉजिकल बैलेंस बना रहे। लेकिन हकीकत में ऐसा हो नहीं रहा है। असलियत में तो कुछ लोग अपने घरों के सामने लगे पेड़ को काटने से नहीं चूकते। उन्हें लगता है कि पेड़ से उनके मकान की शोभा कम हो रही है। पर वृक्ष तो असल में हमारे घर और जीवन की शोभा हैं। आज अगर हम वृक्षों को खुद से दूर कर रहे हैं, तो हो सकता है कि आने वाले वक्त में हम जीवन के असली स्वरूप से ही दूर हो जाएं। वृक्षविहीन कृत्रिम चीजों से घिरे संसार में और चाहे कुछ भी हो, पर वह खुशी और आध्यात्मिक आनंद बिल्कुल नहीं होगा, जो आज हमें वृक्षों से मिल रहा है।
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धन्यबाद उर्जा कोइ भी हो सहेज कर रखो, क्यु कि उर्जा ही भविष्य है॥ आप सब का "आर्यन अकेला" aaryan.akela@in.com |
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#12
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हमे प्रतीत होता नज़र आ रहा है कि यहाँ पर उपस्थित सभी नियामक गंण, बरिष्ठ सदस्य, सदस्य, व हमारे नवागत मित्रों को ये सूत्र कुछ अच्छा नही लगा, अस्तुत: अब मै इस सूत्र को बन्द करने के मूड मे हूँ ।
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धन्यबाद उर्जा कोइ भी हो सहेज कर रखो, क्यु कि उर्जा ही भविष्य है॥ आप सब का "आर्यन अकेला" aaryan.akela@in.com |
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मित्र आर्यन , देरी से सूत्र भ्रमण के लिए क्षमा चाहूँगा! आपने बहुत ही जागरूकता वाला सूत्र प्रारम्भ किया है, इसके लिए आप बधाई के पात्र है! और हाँ आप इसे बंद करने के बारे में ना सोचे ! आप निरंत्रंता बननाए रखे !
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Quote:
मित्र आप ने हमारा उत्तसाहवर्धन किया इसके लिये हम आप के अत्यन्त आभारी है।
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बुंदेलखंड में जागरूकता लाने के लिए अभी एक विवाह हुआ जिसमें बारात कई बैलगाड़ियों पर निकली व विवाह की हर रस्म के साथ एक वृक्ष रोपा गया ( कुल ५१ वृक्ष ) | यह निश्चित ही उपाय नहीं है किन्तु जागरूकता का एक प्रशंस्ह्निय तरीका है |
Last edited by atal; 12-14-2009 at 04:14 PM. |
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#16
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hame jagruk hona padega aur chipko aandolan jaisa hi kuch karna hoga
aaj sabhi log tecknology ke pichhe bhaag rahe hai , paise bana rahe hai lekin un paise se kya haasil kar rahe hai koi kuch nahi bataa sakta yadi aaj bijali band ho jaye to hame pine kaa paani bhi nahi milegaa aisi dependeshi kis kaam ki |
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मित्र अभी इस सूत्र मे और भी रोचकता लाने की ज़रूरत है।
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आप के सहयोग का आकाक्षीं (अविनाश मिश्र) फ़ोरम के प्रबन्धन,नियामकों की इज्जत एवं फ़ोरम के सभी नियमो का सख्ती से पालन करे। |
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#18
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मित्र आर्यन, आपके ग्लोबल वार्मिंग विषयक सूत्र को देख कर जहाँ एक तरफ मन रोमांच से भर जाता है वहीँ दूसरी तरफ मस्तिष्क भय से . मित्रों, आज हम सभी को चाहिए की प्राकर्तिक संसाधनों का अंधाधुंध दुरूपयोग होने से रोकें. अधिक से अधिक वृक्ष लगाएँ. प्लास्टिक का कचरा यहाँ वहां न फेंकें और ऐसे ही अन्य उपाय अपनाएं जिनसे हम पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाएँ. अन्यथा वो दिन दूर नहीं है जब इन तस्वीरों को हकीकत में बदलता हुआ देखेंगे .
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