The Internal Desire |
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#51
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आप सब को भी।
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आप के सहयोग का आकाक्षीं (अविनाश मिश्र) फ़ोरम के प्रबन्धन,नियामकों की इज्जत एवं फ़ोरम के सभी नियमो का सख्ती से पालन करे। |
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#52
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धन्यवाद ढेबर भाई.... आपने हम सबको गुलजार साहब की कुछ नायाब रचनाओ से रूबरू करवाया.... धन्यवाद मित्र
और आखे भाई आपकी उन सुदर प्रस्तुतियों के लिए भी बहुत बहुत धन्यवाद...
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सुखी जीवन के लिए थोड़ी अज्ञानता भी जरूरी है..... शायद इसीलिए में ज्ञान से दूर हूँ..... ![]() ![]() |
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#53
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प्यार ही जीवन हे प्यार बाटते चलो -कभी किसी का दिल मत दुखाओ ! |
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Quote:
वर्षा जी सूत्र भ्रमण के लिए शुक्रिया धन्यवाद पूजा
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आज मेरे जनाजे में सारा शहर शरीक था,
जब के कल हम तनहाइयों के खौफ से मर गए |
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#55
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अब पेश है गुलजार साहब की एक और कविता
वो काट के पुरजे उड़ा रहा था वो काट के पुरजे उड़ा रहा था
हवाओं का रूप दिखा रहा था कुछ और भी हो गया नुमायाँ मैं अपना लिखा मिटा रहा था उसी का ईमान बदल गया है कभी जो मेरा खुदा रहा था वो एक दिन एक अजनबी को मेरी कहानी सूना रहा था वो उम्र कर रहा था मेरी मैं साल अपने बढ़ा रहा था
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आज मेरे जनाजे में सारा शहर शरीक था,
जब के कल हम तनहाइयों के खौफ से मर गए Last edited by ndhebar; 02-10-2010 at 11:50 AM. कारण: miss |
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#56
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इससे बेहतर भी नज़्म क्या होगी
नज़्म उलझी हुई है सीने में मिसरे ए टके हुए हैं होठों पर उड़ते-फिरते हैं तितलियों की तरह लफ्ज़ कागज़ पे बैठते ही नहीं कब से बैठा हूँ मैं जानम सादे कागज़ पे लिखके नाम तेरा बस तेरा नाम ही मुकम्मल है इससे बेहतर भी नज़्म क्या होगी
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आज मेरे जनाजे में सारा शहर शरीक था,
जब के कल हम तनहाइयों के खौफ से मर गए Last edited by ndhebar; 02-11-2010 at 01:03 PM. कारण: editing |
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#57
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अब बारी है गुलजार साहब द्वारा बनाइ गयी फिल्मोँ कि :-
इन्होने हमेँ बहुत सारी यादगार फिल्मेँ दि है। जो अब क्लासिक का दर्जा रखती है। अपने गीतोँ कि तरह अपनी फिल्मोँ मेँ भी इन्होने हमेशा एक मुद्दा उठाया है। एक बार तो इन पर ये आरोप भी लगा कि इनकी फिल्मेँ कुछ ज्यादा ही गम्भीर होती है।
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आज मेरे जनाजे में सारा शहर शरीक था,
जब के कल हम तनहाइयों के खौफ से मर गए |
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#58
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इन्होने आज तक कुल १६ फ़िल्में बनाई है
पेश है गुलज़ार द्वारा बनाई फिल्मों की लिस्ट अपनी पसंदीदा चुने मेरे अपने परिचय कोशिश अचानक खुशबू आंधी मौसम किताब किनारा मीरा अंगूर नमकीन इजाजत लेकिन माचिस हु तू तू
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आज मेरे जनाजे में सारा शहर शरीक था,
जब के कल हम तनहाइयों के खौफ से मर गए |
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#59
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मेरी पसंद है
परिचय और अंगूर
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आज मेरे जनाजे में सारा शहर शरीक था,
जब के कल हम तनहाइयों के खौफ से मर गए Last edited by ndhebar; 02-12-2010 at 09:50 AM. कारण: misstake |
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#60
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Quote:
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प्यार ही जीवन हे प्यार बाटते चलो -कभी किसी का दिल मत दुखाओ ! |
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