स्तन कैंसर जानलेवा है



शीघ्र जांच करें, इलाज कराएँ

स्तन कैंसर जानलेवा है लेकिन शर्म की वजह से महिलाएँ इस बीमारी को छिपाए रहती हैं, ऐसा ना करें वर्ना कहीं देर ना हो जाए इलाज में !

आधुनिकता के इस दौर में भी शर्म के चलते और जागरूकता की कमी की वजह से महिलाओं द्वारा स्तन कैंसर की बीमारी छिपाना उन के लिए जानलेवा साबित हो रही है, स्तन कैंसर न बने जानलेवा, इस के लिए किन खास बातों का रखें ध्यान !
स्तन कैंसर एक जानलेवा बीमारी तो है लेकिन इस के बारे में अफवाह और गलत बातें ज्यादा फैली हुई हैं। लाज और शर्म की वजह से महिलाएँ इस बीमारी को छिपाए रहती हैं, जो उनके लिए जानलेवा बन जाती है।

स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता की कमी की वजह से महिलाएँ स्तन कैंसर समेत कई तरह की बीमारियों के जाल में फंसती रही हैं। जानकारी की कमी की वजह से ही स्तन कैंसर के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। विश्व में फ़ेफ़ड़ों के कैंसर के बाद स्तन कैंसर ही दूसरा सब से आम कैंसर बन चुका है, हर 22 में से 1 महिला को स्तन कैंसर होने की आशंका होती है।

विकसित देशों की तुलना में भारत में जागरूकता की काफी कमी है। ब्रैस्ट कैंसर समेत बाकी कैंसरों के इलाज की तकनीक तो काफी तेजी से विकसित हो रही है लेकिन अगर समय रहते इस का इलाज शुरू नहीं किया गया तो मरीज की जान बचाना मुमकिन नहीं हो पाता है। ब्रैस्ट कैंसर की शिकार 60 फीसदी महिलाएँ कैंसर की आखिरी स्टेज में जांच कराने के लिए डाक्टर के पास पहुँचती हैं, जिससे उनका इलाज नहीं हो पाता है। कैंसर का दर्द आखिरी स्टेज में ही होता है, इसलिए शरीर में होने वाले किसी भी बदलाव या गांठ की अनदेखी जानलेवा साबित हो सकती है।

पटना के महावीर कैंसर संस्थान के निदेशक और ब्रैस्ट कैंसर फाउंडेशन (इंडिया) के राष्ट्रीय सचिव डा. जितेंद्र सिंह कहते हैं कि स्तन में होने वाली हर गांठ या गिल्टी कैंसर नहीं होती है। वक्ष में होने वाली किसी भी तरह की सूजन या गिल्टी को ज्यादातर महिलाएँ कैंसर समझ लेती हैं और मानसिक तनाव में घिर जाती हैं। हर गिल्टी की जांच जरूर करा लेनी चाहिए, गिल्टी को ऑपरेशन के जरिए निकाला जा सकता है। कैंसर से बचने की कोई गारंटी नहीं है, लेकिन इस के प्रति सचेत रह कर इस के खतरे को कम किया जा सकता है।

पिछले दिनों पटना में ब्रैस्ट कैंसर पर आयोजित सेमिनार में देश और विदेश के 150 कैंसर स्पैशलिस्ट जुटे. सभी की यही राय थी कि कैंसर के 80 फीसदी मामले देर से इलाज के लिए पहुँचते हैं, यदि शुरुआती स्टेज में इस का पता चल जाए और सही इलाज शुरू कर दिया जाए तो इसे पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है। ब्रैस्ट कैंसर ऐसा रोग है जिसे ठीक किया जा सकता है, इसके लिए बड़े पैमाने पर जागरूकता मुहिम चलाने की जरूरत है।

कैंसर स्पैशलिस्ट डा. मनीषा सिंह बताती हैं कि ब्रैस्ट कैंसर को ले कर महिलाओं को खुद ही सचेत रहना होगा। ज्यादातर औरतें लाजशर्म की वजह से स्तन में पनपी गांठ को छिपाए रहती हैं, अपने पति को भी नहीं बताती हैं। अनपढ़ ही नहीं पढ़ी-लिखी महिलाएँ भी इसे छिपाती हैं। स्तन कैंसर का शुरुआती दौर में पता चलना बहुत जरूरी है, तभी मरीज की जान बचाई जा सकती है।

पिछले 15 सालों में दुनिया भर में स्तन कैंसर के मामले में तेजी से इजाफा हुआ है। शहरी महिलाएँ इसकी चपेट में ज्यादा आ रही हैं। शहरी महिलाओं में ज्यादा उम्र में विवाह, देर से बच्चे पैदा होने, कम बच्चे होने, बच्चे को स्तनपान नहीं कराना, मोटापा, जंकफूड खाना, शराब और तंबाकू लेना, फलों का कम सेवन, हार्मोनल ट्रीटमैंट लेना, हायर सोशियो स्टेटस आदि बै्रस्ट कैंसर की बड़ी वजहें हैं।

डाक्टरों की राय है कि हर महीने पीरियड के 15 दिनों के बाद अपने उरोजों की जांच कर लेनी चाहिए, यदि उसमें कोई बदलाव, गांठ या कहीं दर्द आदि हो या किसी भी तरह का शक हो तो तुरंत डाक्टर से सलाह लेनी जरूरी है, महिलाओं को स्तन हाइजीन पर भी खास ध्यान देने की जरूरत है।

बहरहाल, यह बात सभी को मालूम होनी चाहिए कि कैंसर जैनेटिक होता है, अगर परिवार में किसी को कैंसर हुआ हो तो दूसरे सदस्यों को सतर्क रहना चाहिए और समय-समय पर इस की जांच कराते रहना चाहिए। कैंसर के इलाज में 7 लाख रुपए से भी ज्यादा का खर्च आता है। इस खर्च को काफी कम करने की जरूरत है इसलिए कैंसर के प्रति सचेत रह कर इस जानलेवा बीमारी और इसके इलाज के खर्च से बचा जा सकता है।


comments powered by Disqus