चुदाई से परिचय-2

कहानी का पहला भाग: चुदाई से परिचय-1

माँ ने मुझे रगड़-रगड़ कर अच्छी तरह नहलाया, मेरी चूत के बाल साफ़ किए और तब बोलीं- अब तुम्हारी चूत लंड लेने के लिए एकदम तैयार है।
शाम को अंकल आए तो मैं उनको निहारती रह गई।
क्या बलिष्ठ गठा हुआ बदन पाया था अंकल ने..!
हम लोग खाना खाकर सोने की तैयारी करने लगे। मेरी छोटी बहन जल्दी सो गई। उसके बाद हम तीन लोग एक ही बिस्तर पर आ गए।

माँ ने कहा- क्यों जी, आप बहुत दिनों से किसी नए माल के बारे में कह रहे थे, आज मैं अपनी बिटिया को आपके हवाले कर रही हूँ। लेकिन दो बातों का ध्यान रखियेगा। पहली बात यह कि बेचारी की चूत एकदम कोरी है, बहुत आराम से पेलियेगा। दूसरी बात यह कि हम दोनों माँ-बेटी को कोई अच्छा ईनाम दीजिएगा।

अंकल बोले- नेहा, तुम भी तो साथ ही हो, जब मैं पेलूँगा तो तुम रहोगी ही, रही ईनाम की बात तो तुम्हीं बता दो, क्या ईनाम चाहिए?
माँ ने कहा- मुझे एक हार चाहिए।
मैं बोली- मुझे अभी कुछ नहीं चाहिए, बाद में बताऊँगी।

इस दौरान मम्मी ने मेरे कपड़े उतार दिए थे।
मेरी बुर को सहला कर अंकल को दिखा कर बोलीं- देखो जी कितनी चिकनी चूत है, मेरी रानी बिटिया की..!
मैंने अंकल के पजामे का नाड़ा खोलते हुए कहा- आपका लंड भी कोई कम नहीं है, इस उम्र में भी..!

माँ ने भी अपने सारे कपड़े उतार दिए। अब हम तीनों मादरजाद नंगे थे। अंकल मेरे होंठों को चूसते हुए एक हाथ से मेरी चूत को सहला रहे थे तथा दूसरे हाथ से मम्मी की गांड सहला रहे थे। मैं तो गर्म होने लगी, लेकिन मम्मी अभी गर्म नहीं हुई थीं।
मम्मी ने मुझसे पूछा- क्यों बेटी, लंड चूसोगी…!
मैंने कहा- आप लोग जैसा आदेश करें। मैं तो अनाड़ी हूँ, मुझे आप लोगों के मार्ग-निर्देशन में ही पेलवाना है।

मम्मी बोलीं- तब ठीक है, मैं जैसा कहती हूँ वैसा करो, हम तीनों ऐसी पोजीशन में हो गए कि मैं उनका लंड चूस रही थी, मम्मी मेरी चूत चाट रही थीं और अंकल मम्मी की चूत चाट रहे थे। अर्थात तीनों लोगों ने एक सर्किल बना रखा था। मैं तो मम्मी द्वारा चूत की चटाई से ही एक बार झड़ गई।
थोड़ी देर बाद मैंने मम्मी से कहा- माँ, मेरी बुर में जल्दी लंड डलवा दो, नहीं तो मैं पागल हो जाऊँगी..!

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माँ ने कहा- अच्छा, अपनी टांगें फैला कर पीठ के बल लेट जाओ, मैं वैसलीन की शीशी लाती हूँ..!

मम्मी ने मेरी चूत के अन्दर वैसलीन लगा दी और अंकल से बोलीं- मेरी रानी बिटिया की कुंवारी चूत में लंड का प्रथम प्रवेश करवाइए। और मम्मी ने अंकल के सुपाड़े पर भी वैसलीन लगा दिया।

अंकल ने मेरी टांगों को फैलाकर लंड को मेरी प्यासी चूत के मुहाने पर रखा और मेरी मम्मी ने अंकल के पीछे से मेरी चूत को फैला रखा था। अंकल ने धक्का लगाया, लेकिन निशाना चूक गया।
मेरी चूत तड़प रही थी कि जल्दी से उसमें लंड घुसे।
मैं लगभग रोते हुए बोली- माँ… पेलवा दो न, क्यों देरी हो रही है…!

माँ ने कहा- इस बार घुस जाएगा बेटी, घबराओ मत, मैं भी तो लगी हूँ इसी कोशिश में, पेलिए जी मेरी बेटी को, बेचारी तड़प रही है।
और जब इस बार अंकल ने अपना सुपाड़ा घुसा दिया तो मुझे लगा कि मेरी जान निकल जाएगी, लेकिन मैंने अपने दांत दबा लिए थे। मम्मी मेरी चूत को पीछे से सहला रही थीं ताकि दर्द न हो।

अंकल ने थोड़ा और घुसाया तो मुझे लगा कि अब पूरा हो गया, लेकिन जब मैंने अंकल से कहा- अब धक्का लगाइए..!
तो उनके बोलने से पहले मम्मी ने बाहर निकले हुए लंड को नापकर कहा- बस बेटी चार इंच लंड अभी बाहर है तीन इंच तो तुमने निगल लिया है।

यह सुनकर मेरी तो हालत खराब हो गई। खैर अंकल ने थोड़ा और जोर लगाया, तो दो बार में पूरा लंड जड़ तक घुस गया। अंकल ने स्पीड तेज़ की, तो धीरे-धीरे मुझे दर्द में ही मज़ा आने लगा।
मैं- आह्ह्ह्ह ऊहह ह ह ह ह पेल दो राजा फाड़ दो… मेरी बुर को… उफ़…!
थोड़ी देर के बाद ‘फच-फच’ की आवाज़ आने लगी। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। अंकल ने मेरी चूचियों के निप्पल को दबा-दबा कर लाल कर दिए थे।

उधर मम्मी मेरी चूत को सहला रही थीं। बीच-बीच में वह मेरी चूत और उसमें फंसे हुए लंड को चाटने भी लगती थीं। कुछ देर के बाद मुझे ऐसा लगा कि मैं आसमान में उड़ रही होऊँ। मैंने अंकल को खूब जोर से भींच लिया और अपनी गांड इस क़दर उचकाने लगी कि लंड खूब गहराई तक जाए। अब मेरा काम तमाम होने वाला था।

मैं बड़बड़ाने लगी- अह मेरे राजा उन्हआह औच… ओह…मैं आ गई आहह ह हह ओहओहोहोह अहः अह अह अह अह आह आह आह ऊह ओह्ह…!
और मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया, लेकिन अंकल रुकने का नाम नहीं ले रहे थे।

मम्मी ने मुझसे पूछा- क्यों बेटी मज़ा आया..! कहो तो मैं भी चुदवा लूँ, तुम्हें चुदवाते देख कर मेरी बुर भी पनिया गई है।
अंकल ने अपना 7 इंच का लपलपाता हुआ लंड बाहर निकाल लिया। मम्मी को इतना जोश चढ़ चुका था कि अंकल ज्यों ही पीठ के बल लेटे, मम्मी उनके

खड़े लंड को अपनी चूत में फंसा दिया और धक्का मारने लगीं। मैं मम्मी के पीछे जाकर उनकी चिरी हुई चूत में अंकल के फंसे हुए लंड को देखने लगी।
क्या गज़ब का नजारा था..!
मैं बुर लंड के संधिस्थल को चाटने लगी। मेरी बुर फिर से पनियाने लगी थी।

मम्मी ने उछल-उछल कर खूब चुदवाया। अब मम्मी पीठ के बल लेट गईं और अंकल ने सामने से अपना लंड घुसा दिया और जोर-जोर से चोदने लगे। थोड़ी देर बाद उनका पानी निकल गया।

उस रात को अंकल ने हम माँ-बेटी को तीन बार चोदा। रात के दो बजे हम लोग सो गए। मुझे उम्मीद है आप लोगों को मेरी इस रसीली कहानी में मजा आया होगा। मैं सच कह रही हूँ कि कहानी लिखते-लिखते मैं इतना गर्म हो चुकी हूँ कि चूत को फिर से अंकल का लौड़ा याद आने लगा है और यदि आपका खड़ा हो गया हो तो लगाने के लिए मेरी चूत प्रस्तुत है।

आप जल्दी से मुझे मेल करो न..!
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