पलक की पहली चुदाई

(Palak Ki Pahli Chudai)

सभी अन्तर्वासना के पाठक-पाठिकाओं को मेरा प्रणाम। मैं यहाँ अपने जीवन की पहली और वास्तविक कहानी लिखने जा रहा हूँ, जिसे लिखने की प्रेरणा मुझे यहाँ से ही पढ़कर मिली तो मैंने भी सोचा कि अपनी भी कहानी यहाँ आप सबसे बाँटी जाए।

जैसा कि आप लोग जानते हैं कि सेक्स एक ऐसा विषय है जिसे परिपूर्ण तरीके से कोई भी शायद नहीं लिख सकता है। अतः मैं यहाँ अपनी अनुभव की हुई बातों को आप लोगों के सामने प्रस्तुत कर रहा हूँ और आशा करता हूँ कि आप लोगों को मेरी कहानी पसंद आएगी।

मेरा नाम मनीष है, मैं 23 साल का अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ, लखनऊ का रहने वाला हूँ। मेरे लंड की लम्बाई 6.5″ है और मुझे सेक्स करने का बहुत मन करता रहता है। यह समझ लो कि शायद ही मेरे लण्ड को शांति मिलती हो। अब मैं अपनी कहानी पर आता हूँ।

एक दिन मेरे पास अपने फ़ोन का बिल जमा करने के लिए एक कन्या का फ़ोन आया उसका नाम पलक था व उसकी आवाज बहुत ही मधुर थी, तो बातों ही बातों में मैंने उसको बोल दिया, “मैडम आपकी आवाज बहुत ही प्यारी है..!
तो उसने कहा- कोई बात नहीं.. आप बिल जमा करा दीजिएगा!

तो मैंने उसे कहा- आप शाम को एक बार मुझे याद दिला दीजिएगा ताकि मैं आराम से बिल का भुगतान कर सकूँ।
वास्तविकता में तो बिल एक बहाना था, मुझे तो उस खूबसूरत बला की आवाज सुनना था, तो उसने कहा- जैसा आप कहें सर.. मैं आपको शाम को याद दिला दूँगी।
मैं शाम का बड़ी बेसब्री से इंतजार करने लगा।

शाम को लगभग 6.30 बजे उसका फ़ोन आया तो फिर बात होने लगी और मैंने बातों-बातों में उसका नंबर ले लिया ताकि अगर कभी परेशानी हो तो उस पर कॉल की जा सके और मैंने अपने बिल का भुगतान कर दिया।

कुछ दिनों के बाद मैंने सोचा कि आज पलक से बात की जाए तो मैंने उसको एक एसएमएस कर दिया और साथ में यह भी लिख दिया कि जब वो खाली हो तब बात करे!

उसके बाद मैं उसका फ़ोन आने का इंतजार करने लगा और उसके बाद शाम को उसने ऑफिस से निकलने के बाद फ़ोन किया तो फिर हमारी बात होनी शुरू हो गई।

मैंने उसको कहा- आपकी आवाज बहुत ही खूबसूरत है और अगर आप बुरा न माने तो मैं आपसे मिलना चाहता हूँ।
थोड़ी देर ना-नुकुर करने के बाद वो तैयार हो गई और हम लोगों का रविवार के दिन मिलने का प्रोग्राम तय हुआ।

मैं रविवार को फन सिनेमा पहुँच कर उसका इंतजार करने लगा।
लगभग 30 मिनट बाद वो आई, तो पहले तो मैं उसे देख कर चकरा गया। वाकयी में वो बला की खूबसूरत थी और फिर हम दोनों पिक्चर देखने चले गए।

जैसा कि आप सभी लोग जानते हैं कि आजकल का युवा वर्ग जो पिक्चर देखने जाते हैं, उनका ध्यान पिक्चर में कम और कुछ करने में ज्यादा लगता है। आप समझ गए होंगे कि मेरे कहने का मतलब क्या है।

तो दोस्तो, पिक्चर देखते समय मैंने अपना एक हाथ उसके गले में डाल दिया। पहले तो उसने मना किया, किन्तु मेरे समझाने पर वो मान गई। कुछ देर बाद पिक्चर में थोड़ा सा हॉट सीन आया तो मैंने अपने हाथ से उसके मम्मों को ऊपर से सहलाना शुरू कर दिया और उसने कोई भी विरोध नहीं किया। शायद वो भी थोड़ा सा मजा लेने चाह रही होगी।

कुछ देर उसके मम्मों को सहलाने के बाद मैंने अपना एक हाथ उसकी सलवार के ऊपर रख दिया और ऊपर से ही उसकी चूत का जायजा लेने लगा।
जैसे ही मैंने अपना हाथ उसके सलवार में डालने का प्रयास किया तो उसने मना कर दिया- यहाँ नहीं, कोई देख लेगा.. तो ठीक नहीं लगेगा और बदनामी होगी..!

तो मैंने उससे पूछा- क्या मेरे रूम पर चलें?
तो वो तैयार हो गई और हम लोग पिक्चर छोड़ कर अपने रूम पर आ गए जहाँ पर कोई दिक्कत नहीं थी।

रूम पर आते ही हम लोग एक-दूसरे से ऐसे चिपक गए, जैसे की जन्मों से प्यासे हों और होंठों को चूसने लगे। वाकयी में उसके होंठ बहुत ही रसीले थे, मैं उसका अनुभव शब्दों मैं बयान नहीं कर सकता हूँ।

थोड़ी देर तक चुम्बन करने के बाद उसने मेरा लंड निकाल कर जोर-जोर से चूसना आरंभ कर दिया, तो मैंने पहले उसको रोकते हुए अपने अपने कपड़े उतारने के लिए कहा और हम लोगों ने एक-दूसरे के कपड़े बहुत जल्दी उतार डाले।

ऊपर वाले ने उसका जिस्म ऐसे तराशा था जैसे कि एक मूर्ति कलाकार अपने हाथों से किसी मूर्ति को गढ़ता है।
उसके बाद उसने मेरा लंड चूसना शुरू किया तो मैंने उससे पूछ ही लिया- इस तरह मस्त तरीके से लंड चूसना तुमने कहाँ से सीखा?

तो उसने बताया- एक बार मैं अपनी बड़ी बहन के यहाँ गई थी, जिसकी शादी हो चुकी है तो मैंने अपने जीजा जी के साथ दीदी की रासलीला देखी थी और तभी से चुदाई की तरफ मेरा मन भटकने लगा था। किन्तु मैं कर भी क्या सकती थी और कभी-कभी अपने हाथ से ही अपना काम चला लिया करती थी।

तो मैंने उसको बोल दिया- अब हाथ से काम लाने की कोई कोई आवश्यकता नहीं है, अब हम लोग एक-दूसरे का ख्याल रखेंगे और किसी को भी इसके बारे में कुछ नहीं बताएँगे!
तो वो तैयार हो गई और हम लोग फिर एक-दूसरे को चूमने लगे।

थोड़ी ही देर मैं उसने कहा- अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है… प्लीज अपना लंड मेरी बुर में डाल दो..!
तो मैंने कहा- अभी रुको!

क्योंकि मैं जानता हूँ कि लड़की को जितना आप चुदाई के लिए तरसाएंगे, दोनों को उतना ही ज्यादा मजा आएगा।
मैंने उसकी बुर को चाटना शुरू कर दिया तो वो और ज्यादा ही व्याकुल होने लगी और कहने लगी- अब और मत तरसाओ.. प्लीज.. अन्दर करो.. अब रहा नहीं जाता..!

पर जब मैंने उसकी बुर का जायजा लिया तो पता चला कि उसकी बुर इतनी ज्यादा कसी हुई थी कि मेरे हाथ की एक ऊँगली तक नहीं जा रही थी। जबकि उसकी बुर उसके पानी से नहा चुकी थी तो मैंने तेल की शीशी उठा कर खूब सारा तेल उसके बुर पर मला और ऊँगली को डालने लगा ताकि उसकी बुर थोड़ी सी ढीली हो जाए और लंड महाराज आराम से अन्दर चले जाएं।
काफी देर तक सहलाने के बाद उसने कहा- अब अन्दर डाल दो जो होगा देखा जाएगा!

तो मैंने भी अपने लंड पर तेल लगाया और बैठ कर उसको अपने ऊपर आराम-आराम से बैठने के लिए कहा। पहले तो वो बैठने की कोशिश कर रही थी, किन्तु जैसे ही उसे दर्द हुआ तो मना करने लगी, पर जब मैंने उसे धीरज बँधाया तो वो फिर एक बार मेरे ऊपर जैसे ही बैठने लगी तो मैंने उसकी कमर को पकड़ कर नीचे की तरफ एक जोर का झटका दिया ताकि थोड़ा सा लंड अपनी जगह बना ले।

करीब 2″ लंड अन्दर घुस गया तो कहने लगी- बहुत दर्द हो रहा है..
और हो भी क्यों न.. वो मेरे साथ पहली बार चुदाई कर रही थी।

करीब 5 मिनट तक हम लोग ऐसे ही रहे ताकि उसे ज्यादा दर्द का सामना न करना पड़े और मैं उसके मम्मों सहलाता और दबाता रहा ताकि वो आराम से जल्दी नार्मल हो जाए। जैसे ही वो थोड़ी नार्मल हुई तो मैंने उसे फिर थोड़ा सा ऊपर उठा कर फिर झटके के साथ बैठने के लिए कहा और उसने ऐसा ही किया और मेरा पूरा लंड उसकी बुर में समा गया।

इस दौरान उसकी आँखों से आँसू तक छलक आए, पर थोड़ी ही देर में उसने खुद ही ऊपर से धीरे-धीरे धक्के चालू कर दिए और 4-5 मिनट धक्के लगाने के बाद थक गई।
फिर मैंने उसने नीचे लेटा कर धक्के मारना शुरू किया तो वो कहने लगी- जोर-जोर से मारो.. आज मुझे इतना मजा आ रहा है कि मैं बता नहीं कर सकती.. मनीष और जोर से..!

जोरों से धक्के लगाने के करीब 15 मिनट बाद मैंने कहा- मेरा पानी निकलने वाला है… बताओ कहाँ डालूँ?
तो उसने कहा- बाहर निकाल लो.. मुझे पानी का स्वाद लेना है!

फिर मैंने अपना लंड निकाल कर उसके मुँह के पास कर दिया, उसने मेरे लंड को मुँह में ऐसे चूसना शुरू किया जैसे की बच्चे लॉलीपॉप चूसते हैं और मैंने अपना सारा पानी उसके ही मुँह में छोड़ दिया और वो सारा पानी चाट-चाट कर पी गई।

अब हम दोनों लोग तृप्त हो गए थे और एक-दूसरे को एक अच्छा और विश्वसनीय साथी मिल गया था। अब हम लोग जब भी चाहते, आराम से चुदाई का मजा ले सकते थे।

फिर मैंने उसे उसके घर के पास छोड़ दिया और फिर मिलने का वादा करके हम लोग अपने-अपने घर चले गए। तब से आज तक हम लोग एक-दूसरे को खूब प्यार करते हैं। जब भी मौका मिलता है खूब चुदाई भी करते हैं।

यह थी मेरी छोटी मगर सच्ची कहानी, मुझे आप लोगों की राय की प्रतीक्षा है, ईमेल करके अवश्य बताएँ कि आप लोगों को मेरी कहानी कैसी लगी।
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