Pyar Muhabbat, love Shayari, Poetry – प्यार-मुहब्बत प्रेम पर शेरो-शायरी कवितायें

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इक प्यार का नगमा है !

दिल से दिल लगाते हैं लोग HOT!

By - एक पाठक On 2015-04-19 Tags:

वादे वफ़ा करके क्यूँ मुकर जाते हैं लोग..? क्यूँ किसी से दिल लगाकर तड़पते हैं लोग..? अगर दिल लगाकर निभा नहीं पाते तो फिर, क्यूँ किसी के दिल से इतना दिल लगाते हैं लोग..??

तेरे बिना

By *** On 2015-04-18 Tags:

तेरी यादों के बिना ज़िंदगी अधूरी है! तू जो मिल जाए तो ज़िंदगी पूरी है! तेरे साथ जुड़ी हैं मेरी खुशियाँ! बाकी सबके साथ हंसना तो मेरी मजबूरी है…!

गुलशन में बहार आए

By *** On 2015-04-17 Tags:

इजाज़त हो तो चुन लें हम भी दो-एक फूल ही गुलाब के दुआ तो हमने ही माँगी थी कि गुलशन में बहार आए...

ज़रा दिल की बात सुनाऊँ तुझे HOT!

By - एक पाठक On 2015-04-14 Tags:

पास आ ज़रा दिल की बात सुनाऊँ तुझे कैसे धड़कता है दिल आवाज़ सुनाऊँ तुझे आके तू देख ले दिल पर लिखा है नाम तेरा, अगर कहता है तो दिल चीर के दिखाऊँ तुझे ज़ितना ज़लाया है तूने प्यार में मुझे दिल तो करता है कि मैं भी ज़लाऊँ तुझे अज़नबी होता तो ऐसा भी […]

बस बेवफा यार मिला!

By - एक पाठक On 2015-04-13 Tags:

मुझे न मुहब्बत मिली न किसी का प्यार मिला मुझको जो भी मिला बस बेवफा यार मिला! अपनी तो बन गयी तमाशा जिंदगी हर कोई अपने मक़सद का तलबग़ार मिला!!

मोहब्बत किस्मत

By *** On 2015-04-12 Tags:

ये रात इतनी तन्हा क्यूँ होती है सबको किस्मत से शिकायत क्यूँ होती है हम जिसे अपना नहीं सकते उसी से मोहब्बत क्यूँ करते हैं…

सपनों में आके मिलना कभी

By - एक पाठक On 2015-04-11 Tags:

दिल की किताबों को पढ़ना कभी सपनों में आके मिलना कभी मैंने दुनिया सजाई है तेरे लिए मेरी नज़रों की उम्मीद बनना कभी बहुत दूर है सितारों से रोशन जहाँ जरा हमकदम बन के चलना कभी कितना नाज़ुक सीने में दिल है मेरा तुम अंदाज ए मोहब्बत बन के धड़कना कभी..

मुहब्बत मेरे नाम कर दो

By - एक पाठक On 2015-04-05 Tags:

इससे पहले कि वक्त का कारवाँ गुज़र जाए तुम अपने जज़बों की सच्चाईयाँ मेरे नाम कर दो इससे पहले कि सन्नाटा तन्हाई के ज़हर में ढलने लगे तुम अपनी मोहब्बत का जाम-ए-अमृत मेरे नाम कर दो इससे पहले कि ज़िंदगी की शाम ढल जाए तुम अपने जीवन की कोई नई सुबह मेरे नाम कर दो […]

इक़रार करूँ तो कैसे करूँ HOT!

By - एक पाठक On 2015-04-03 Tags:

अपने प्यार का इज़हार कैसे करूँ दूर भी इतना उनसे कैसे रहूँ हमने सब कुछ कब का उनके नाम कर दिया उनके आगे जा कर इक़रार करूँ तो कैसे करूँ..?

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